इंटरनेट के डोमेन नेम अब जल्दी ही भारत की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे. यानी लोग अब अंग्रेजी की बजाय किसी वेबसाइट का नाम हिंदी में लिख कर भी उस तक पहुंच सकते हैं.
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हिंदी में गूगल डॉट काम लिखते ही गूगल की साइट खुल जाएगी. इसका मकसद दुनिया की ऐसी 48 फीसदी आबादी को इंटरनेट से जोड़ना है जो अंग्रेजी में टाइप नहीं कर सकती. देश में इंटरनेट के डोमेन नेम अब तक अंग्रेजी में ही होते हैं, लेकिन अब जल्दी ही भारतीय भाषाओं में भी यह उपलब्ध होंगे. अब कोई भी व्यक्ति अपनी क्षेत्रीय भाषा में यह डोमेन नेम हासिल कर सकेगा. पूरी दुनिया में इंटरनेट डोमेन नेम प्रणाली का प्रबंधन देखने वाली अमेरिकी संस्था द इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइंड नेम्स एंड नंबर्स (आईसीएएनएन) भारत में बोली जाने विभिन्न भाषाओं में डोमेन नेम की तैयारियों में जुटा है. इनमें देश की 22 आधिकारिक भाषाएं भी शामिल हैं. आईसीएएनएन के भारतीय प्रमुख समीरन गुप्ता बताते हैं, "नौ भारतीय लिपियों देवनागरी, बांग्ला, गुजराती, गुरूमुखी, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, तमिल, मलयालम व तेलुगू में यह काम चल रहा है. इससे कई दूसरी भाषाएं भी कवर हो जाएंगी.”
कहां हैं सबसे ज्यादा भाषाएं
दुनियाभर में कुल 6,500 भाषाएं बोली जाती हैं. हालांकि 2000 से ज्यादा भाषाओं के बोलने वाले 1000 से भी कम बचे हैं. सबसे ज्यादा लोग मैंडरिन बोलते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा भाषाएं किस देश में हैं? देखिए...
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ब्राजील (229)
पुर्तगाली देश में सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषा है.
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ऑस्ट्रेलिया (245)
यहां 99% साक्षरता दर है और आबादी के हिसाब से यह एक बहुभाषी देश है.
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कैमरून (281)
अंग्रेजी और फ्रेंच इस अफ्रीकी देश की राष्ट्रीय भाषाएं हैं.
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मेक्सिको (289)
इनमें से 280 भाषाएं तो आदिवासियों की हैं.
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चीन (300)
70 फीसदी देशवासी मैंडरिन की ही कोई बोली बोलते हैं.
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अमेरिका (422)
इनमें से 211 यानी आधी भाषाएं प्रवासी लेकर आए.
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भारत (454)
हिंदी और अंग्रेजी देश की राष्ट्रीय भाषाएं हैं लेकिन हर राज्य में अपनी दर्जनों भाषाएं हैं.
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नाइजीरिया (526)
इतनी भाषाओं के बावजूद अंग्रेजी ही देश की राष्ट्रीय भाषा है.
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इंडोनेशिया (707)
98 स्थानीय भाषाएं ऐसी हैं जिन पर विलुप्त हो जाने का खतरा मंडरा रहा है.
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पापुआ न्यू गिनी (839)
यूरोप में जितनी भाषाएं बोली जाती हैं उससे दोगुनी इस छोटे से देश में हैं.
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वह बताते हैं कि निगम दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली लिपियों के लिए शीर्ष डोमेन को सुरक्षित और स्थिर रूप से परिभाषित करने के लिए नियम तय करने की दिशा में काम कर रहा है. इसका मकसद यह है कि अंग्रेजी नहीं जानने वाले लोग भी ऑनलाइन जाकर अपनी भाषा में डोमेन नेम लिख कर मनचाही वेबसाइट को देख सकें. हिंदी सामग्री के लिए फिलहाल उपभोक्ता को अंग्रेजी में ही डोमेन नेम टाइप करना पड़ता है. लेकिन अब जल्दी ही कोई भी व्यक्ति हिंदी में डोमेन नेम लिख सकता है.
गुप्ता बताते हैं, "अब दुनिया की 52 फीसद आबादी की इंटरनेट तक पहुंच है. आईसीएएनएन डिजिटल खाई को पाटने की दिशा में काम कर रहा है.” वह बताते हैं कि जिन 48 फीसद लोगों की इंटरनेट तक पहुंच नहीं है उनमें से ज्यादातर गैर-अंग्रेजीभाषी हैं और वे अंग्रेजी में टाइप नहीं कर सकते. उन लोगों के लिए अब अपनी भाषा में काम करना आसान हो जाएगा.
हालांकि गूगल और दूसरे सर्च इंजनों में तो अब भी क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री तलाशना संभव है? इस पर गुप्ता कहते हैं, "मौजूदा प्रयास का मकसद क्षेत्रीय भाषाओं में डोमेन नेम लिखने की सुविधा मुहैया कराना है.” वह बताते हैं कि इस काम के लिए गठित समूह में भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और सिंगापुर के 60 से ज्यादा तकनीकी विशेषज्ञ और भाषाविद् शामिल हैं. गुप्ता कहते हैं, "फिलहाल पूरी दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की तादाद 4.2 अरब है जिसके वर्ष 2022 तक बढ़ कर पांच अरब तक पहुंच जाने की संभावना है.”
हिंदी को आप कितना जानते हैं?
हिंदी भाषियों को हिंदी के बारे में बताना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है. लेकिन फिर भी कई ऐसी बातें हो सकती हैं जो आप न जानते हों, डालते हैं इन्हीं पर एक नजर.
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कैसे मिला नाम
हिंदी को अपना नाम हिंद से मिला. 11वीं सदी में फारसी भाषी तुर्क हमलावरों ने सिंधु नदी के इलाके को हिंद नाम दिया था. और इस तरह हिंद में इलाके में बोलने वाली भाषा को नाम हिंदी पड़ा.
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पहली किताब
लल्लू लाल की ‘प्रेम सागर’ हिंदी की पहली प्रकाशित किताब मानी जाती है जो 1805 में छपी थी. इस किताब में हिंदू देवता कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है.
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हिंदी बोलने वाले कितने?
हिंदी को अपनी प्रथम भाषा के तौर पर इस्तेमाल करने वालो की संख्या 42.5 करोड़ है जबकि 1.2 करोड़ लोग अपनी दूसरी भाषा के तौर पर हिंदी बोलते हैं और समझते हैं.
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भारत की सबसे प्रचलित भाषा
बहु भाषी भारत में बांग्ला, तेलुगु, तमिल, मराठी, उड़िया और गुजराती जैसी कई बड़ी भाषाएं हैं, लेकिन हिंदी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली भाषा है.
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हिंदी पट्टी
भारत के नौ राज्यों में हिंदी मुख्य भाषा है जिनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान शामिल हैं.
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विदेशों में हिंदी
भारत के अलावा नेपाल, मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिडाड और टोबोगो में भी हिंदी बोलने समझने वालों की अच्छी खासी संख्या है.
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सरकारी दर्जा
भारत में हिंदी को राज भाषा का दर्जा मिला हुआ है. हालांकि बहुत सारा सरकारी कामकाज अंग्रेजी में होता है. करियर के लिहाज से अंग्रेजी को बहुत अहम माना जाता है.
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टेढ़ी हिंदी
उच्चारण के लिहाज किम्कर्तव्यविमूढ़ को हिंदी के सबसे मुश्किल शब्दों में गिना जाता है. वहीं ट्रेन को लोग लौहपथगामी और सिगरेट को धूम्रपान दंडिका कह लोग खूब चुटकी लेते हैं. वहीं कच्चा पापड़-पक्का पापड़ पर खूब जबान पलटे मारती है.
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मददगार हिंदी
हिंदी का उदगमम संस्कृत से हुआ है. हिंदी की जानकारी संस्कृत, उर्दू, नेपाली, बांग्ला और गुजराती जैसी दूसरी भाषाएं सीखने में मददगार होती है. यह भाषाएं या तो बोलने में हिंदी जैसी हैं यहां लिखने में.
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चर्चित मुहावरे
दुनिया की हर समृद्ध भाषा की तरह हिंदी में भी मुहावरों और कहावतों की भरमार है. लोगों की जुबान पर कर भला हो भला, जैसी करनी वैसी भरनी, जैसे को तैसा, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद और बहती गंगा में हाथ धोना जैसे मुहावरे होते हैं.
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बॉलीवुड
दुनिया भर में बॉलीवुड फिल्मों की लोकप्रियता ने हिंदी को दुनिया के कोने कोने तक पहुंचाया है. यूरोप और अमेरिका की बहुत सी यूनिवर्सिटियों में हिंदी पढ़ाई जाती है.
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बढ़ते उपभोक्ता
स्मार्टफोन और ब्रॉडबैंड के बढ़ते चलन के कारण देश के ग्रामीण इलाकों में भी इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. देश में इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 को शुरू हुई थी. बीते साल देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की तादाद लगभग 32 करोड़ थी जिसके 2022 तक बढ़कर लगभग 52 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. वर्ष 2016 के आंकड़ों के मुताबिक देश में 32 करोड़ से ज्यादा लोग मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे. यह तादाद 2022 तक बढ़ कर 49 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है. पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे के मुताबिक भारत में लगभग 780 भाषाएं बोली जाती हैं. इनमें से 22 आधिकारिक भाषाएं हैं.
हिंदी संवैधानिक रूप से देश की राजभाषा होने के साथ-साथ देश में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है. फिलहाल देश की कुल आबादी में से लगभग 65 प्रतिशत लोग हिंदी भाषा को जानने-समझने वाले हैं. लेकिन अंग्रेजी जानने-समझने वालों की तादाद महज पांच फीसदी है. बाकी 30 फीसदी लोगों में गैर-हिंदी और गैर-अंग्रेजी जानने वाले शामिल हैं. गुप्ता कहते हैं, "क्षेत्रीय भाषाओं में डोमेन नाम की उपलब्धता विशेष तौर पर ग्रामीण इलाके के लोंगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी. इससे उनके लिए संभावनाओं की नई राह खुल जाएगी और सुदूर इलाकों में भी इंटरनेट का तेजी से प्रसार होगा.”