अमेरिकी शिक्षण संस्थान दुनिया भर में छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं लेकिन अब इन संस्थानों को डर है कि देश का बदलता राजनीतिक माहौल विदेशी छात्रों की संख्या को घटा सकता है.
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अमेरिका के कॉलेज दुनिया भर में छात्रों के बीच पसंद किये जाते रहे हैं. इस साल भी अमेरिकी कॉलेजों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की अच्छी संख्या नजर आ रही है. लेकिन एक डर है जो इन कॉलेजों को अब सताने लगा है. देश में हुए एक सर्वे के मुताबिक, यहां के बदलते राजनीतिक माहौल में शिक्षण संस्थाओं को डर है कि आने वाले सालों में विदेशी छात्रों का रुझान कम हो सकता है. द इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि विदेशों से आने वाले कुल छात्रों की तुलना में इस साल तकरीबन सात फीसदी की गिरावट आयी है.
इस सर्वे में 500 से भी ज्यादा कॉलेज और यूनिवर्सिटी को शामिल किया गया है. हालांकि रुझान कैंपस दर कैंपस अलग-अलग रहा है लेकिन तमाम संस्थाओं को डर है कि यह राजनीतिक माहौल छात्रों को अमेरिका से दूर कर सकता है. देश के 45 फीसदी स्कूलों ने इस गिरावट को स्वीकार किया है, वहीं अब भी कुछ संस्थायें अधिक छात्रों के आने का दावा कर रही हैं तो 24 फीसदी संस्थाओं के मुताबिक इसमें कोई बदलाव नहीं आया है.
जर्मनी के लोकप्रिय विश्वविद्यालय
विदेशी छात्रों को जर्मन विश्वविद्यालयों में पढ़ना पसंद है. विदेशी छात्रों के बीच अंग्रेजी कोर्स वाले लोकप्रिय विश्वविद्यालयों में टॉप टेन.
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कोलोन यूनिवर्सिटी (10)
कार्निवाल के शहर कोलोन की यूनिवर्सिटी लोकप्रियता में 10वें नंबर पर है. पड़ोसी यूरोपीय देशों के बहुत से छात्र यहां आते हैं. यह भारतीय छात्रों में भी लोकप्रिय है. कोलोन से एम्सटरडम, ब्रसेल्स और पेरिस के लिए सीधी ट्रेनें और बसें हैं.
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गोएथे यूनिवर्सिटी, फ्रैंकफर्ट (9)
जर्मनी के मशहूर लेखक योहान वोल्फगांग फॉन गोएथे के नाम वाली यह यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट माइन में है. यहां जर्मनी का बैंकिंग सेक्टर होने के कारण काफी संभावनाएं हैं. यहीं यूरोपीय केंद्रीय बैंक का मुख्यालय भी है. यहां कई देशों के लोग रहते हैं.
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डुइसबुर्ग एसेन यूनिवर्सिटी (8)
37,000 छात्रों के साथ यह विश्वविद्यालय जर्मनी के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में एक है. 2003 में एसेन और डुइसबुर्ग यूनिवर्सिटी के मिलने से यह विश्वविद्यालय बना है. यह इलाका जर्मनी की सबसे घनी आबादी वाला इलाका है.
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हाइडेलबर्ग यूनिवर्सिटी (7)
1386 में बनी यह यूनिवर्सिटी जर्मनी की सबसे पुरानी है. यहां विदेशी छात्र आना बहुत पसंद करते हैं. सुंदर शहर वाली इस यूनिवर्सिटी में मेडिसिन से लेकर इंडोलॉजी तक कई विषयों की पढ़ाई होती है. यहां का पुराना शहर अभी भी पूरी तरह संरक्षित है.
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हुम्बोल्ट यूनिवर्सिटी, बर्लिन (6)
यह भी जर्मनी के पुराने विश्वविद्यालयों में एक है. यहां पढ़ाई करने वाले मशहूर छात्रों में जर्मनी के चांसलर ऑटो फॉन बिस्मार्क, लेखक हाइनरिष हाइने और चिकित्सक रोबेर्ट कॉख शामिल हैं. लोकप्रियता में छठे नंबर वाले इस विश्वविद्यालय का बहुत नाम है.
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टेकनिकल यूनिवर्सिटी, बर्लिन (5)
छात्रों का सबसे पसंदीदा शहर अगर कोई है तो वह एकीकृत जर्मनी की राजधानी बर्लिन है. यहां अंग्रेजी में एक से एक इंजीनियरिंग कोर्स हैं. यहां रहने का खर्चा दूसरे यूरोपीय शहरों की तुलना में काफी कम है.
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आखेन यूनिवर्सिटी (4)
आखेन बेल्जियम और नीदरलैंड्स के साथ लगने वाली जर्मन सीमा पर बसा शहर है. आरडबल्यूटीएच विश्वविद्यालय का मोटो है, भविष्य की सोच. जर्मनी में इस यूनिवर्सिटी की काफी प्रतिष्ठा है.
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तकनीकी यूनिवर्सिटी, म्यूनिख (3)
बवेरिया की राजधानी म्यूनिख की तकनीकी यूनिवर्सिटी सबसे बढ़िया विश्वविद्यालयों में एक मानी जाती है. यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक 2013 में यहां का हर पांचवां छात्र विदेशी था.
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लुडविष माक्सिमिलियान यूनिवर्सिटी (2)
म्यूनिख की एलएमयू यूनिवर्सिटी जर्मनी के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक है. 34 नोबेल पुरस्कार विजेता इस यूनिवर्सिटी से संबद्ध रहे हैं.
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फ्री यूनिवर्सिटी, बर्लिन (1)
बर्लिन की एफयू शहर के पश्चिमी हिस्से में 1948 में शुरू की गई थी. विभाजित शहर के पूर्वी हिस्से की हुम्बोल्ट यूनिवर्सिटी की तुलना में पश्चिम की ये यूनिवर्सिटी फ्री वर्ल्ड का हिस्सा थी.
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विशेषज्ञों के मुताबिकब, व्हाइट हाउस की ओर से कई देशों पर लगाये यात्रा प्रतिबंध जैसे कदमों ने विदेशों से आने वाले छात्रों के मन में शंकाएं पैदा की हैं. हालांकि इन्हीं कारणों के चलते अब कुछ कॉलेज कैंपसों ने विदेशी छात्रों के लिए मार्केटिंग ड्राइव भी शुरू कर दी है. इसका कुछ असर भी दिखा है लेकिन सर्वे के मुताबिक अब भी हालात पहले की तरह सामान्य नहीं हैं. देश के 500 कॉलेजों में से आधे को इस बात कि चिंता है कि देश का मौजूदा माहौल छात्रों को निराश कर सकता है. सर्वे की मानें तो अब तक 20 फीसदी छात्र इस कारण देश छोड़ कर जा भी चुके हैं.
संस्थाओं के मुताबिक छात्रों की इस बेरुखी के लिए, ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी, अन्य देशों के साथ मुकाबला और राजनीतिक माहौल को जिम्मेदार माना जा सकता है. सर्वे में कहा गया है कि चीन और भारत से आने वाले छात्रों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन इनकी दर पिछले सालों के मुकाबले कम है.
जर्मनी में छात्रों के ठिकाने
जर्मनी में बाहर से आने वाले छात्रों की तादाद इतनी ज्यादा कभी नहीं थी, जितनी अभी है. केवल कक्षा में ही नहीं, रहने के लिए भी घर का इंतजाम आसान नहीं. देखिए तस्वीरों में किस तरह के घरों में रहते हैं छात्र यहां....
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यह है म्यूनिख का ओ2 विलेज. 6.8 वर्ग मीटर क्षेत्र वाले सात घनाकार कमरे. इनका किराया करीब 13,000 रुपये है जो कि बाकी मकानों के मुकाबले कुछ भी नहीं.
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नया सेमेस्टर शुरू हो गया है. घर नहीं मिला तो भी कोई ना कोई रास्ता तो निकालना ही होगा. म्यूनिख और फ्रैंकफर्ट छात्रों के लिए सबसे महंगे शहर साबित होते हैं. म्यूनिख में एक कमरा 40,000 रुपये और फ्रैंकफर्ट में करीब 35,000 का पड़ता है.
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27 फीसदी जर्मन छात्र अभी भी माता पिता के साथ रहते हैं. इससे किराए के अलावा खाने पीने और कपड़े धुलने जैसे कामों पर पैसे बचते हैं. लेकिन हां, ऐसे में उनका कहना भी तो मानना पड़ता है.
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म्यूनिख, कोलोन और फ्रैंकफर्ट जैसे शहरों में घर मिल जाना अक्सर लॉटरी लगने जैसा होता है. सेमेस्टर के शुरुआत में कई युवा बेघर ही होते हैं. ऐसे में कई बार कैंपस के ही जिम में सोना पड़ जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं.
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जर्मनी के कुल छात्रों में से सिर्फ 12 फीसदी को ही यूनिवर्सिटी की होस्टल में जगह मिल पाती है. ठीक ठाक होस्टल में कमरा 17 वर्ग मीटर का होता है लेकिन कई जगह और छोटा भी हो सकता है. कोई अपार्टमेंट मिल जाए, तो तीन चार छात्र एक साथ भी रह लेते हैं. कोलोन में औसत किराया लगभग 20,000 रुपये है.
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1983 में गोएटिंगेन के छात्र संघ ने लकड़ी के इस घर की काफी सस्ते में मरम्मत की. तस्वीर में दिख रहे लोग मरम्मत के बाद इस घर में रहने वाले पहले लोग हैं. यह घर आज भी इस शहर के छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है.
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सर्बिया की तियाना को बॉन में सैनिकों के बैरक जैसा यह घर मिला है. एक व्यक्ति के लिए बमुश्किल 10 वर्ग मीटर क्षेत्र. टॉयलेट और किचन पर किसी एक का अधिकार नहीं, सब साझे में. खाना बनाने की सबकी एक एक कर के बारी आती है.
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क्लारा फुर्स्ट ने अपने घर में सारा को किराएदार रखा हुआ है. सौदा आसान है. सारा को रहने के लिए कमरा मिला है, तो बदले में उन्हें घर की देखरेख, गार्डन और किचन के कामों में फुर्स्ट की मदद करनी होती है. 1992 से लिविंग फॉर हेल्प संस्था देश भर में इस तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है.
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पुरानी फैक्ट्री हो, अस्पताल या स्कूल खाली रहें, तो खतरा रहता है. 2010 से इन इमारतों की रखवाली के लिए छात्र आगे आ रहे हैं. जगह की कोई कमी नहीं लेकिन तोड़फोड़ या अजनबी लोगों से इमारत को बचाना इनका काम है. यहां सिगरेट, पालतू जानवर और 10 से ज्यादा लोगों की पार्टी की इजाजत नहीं.
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2012 से 27 छात्र उल्म के एक खाली मठ में रह रहे हैं. जो विदेशी छात्र किराया नहीं भर सकते, उनके लिए चर्च की तरफ से यहां 10 कमरे मुफ्त हैं. हालांकि भविष्य में क्या होगा, इस बारे में चर्च ने फिलहाल कुछ तय नहीं किया है इसलिए छात्रों के साथ कांट्रैक्ट लंबे समय के लिए नहीं किए जाते.
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हथौड़ी और पेंच, थोड़ा इधर, थोड़ा उधर, और नया सस्ता सुंदर घर तैयार. स्वीडन की एक कंपनी के इस कंप्यूटर ग्राफिक में देखा जा सकता है कि इस तरह के घर कैसे दिखते हैं. जर्मनी में भी भविष्य में छात्रों के लिए ऐसे घर बनाने की योजना है.
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ये कंटेनर नहीं, घर हैं. ये आज से नहीं बल्कि 1980 से प्रचलित हैं, जब आर्थिक हालत ऐसी थी कि घर बनाना आसान नहीं हुआ करता था. इनका साइज 15 से 17 वर्ग मीटर होता है.