अमेरिका ने फलस्तीनी संगठन हमास के नेता इस्माइल हानिया को तीन अन्य समूहों के साथ विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) सूची में डाल दिया है. इसके बाद हानिया की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों सहित सभी परिसंपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा और वह अमेरिका के किसी भी शख्स के साथ किसी भी तरह का लेनदेन नहीं कर पाएंगे. वह अमेरिका की वित्तीय प्रणाली तक भी पहुंच नहीं बना पाएंगे. इस्लामिक हमास आंदोलन ने बुधवार को अमेरिका के इस फैसले की निंदा की. इस आंदोलन के नेता ने कहा कि वे अमेरिका के इस फैसले को बेतुका समझते हैं
प्रतिबंधों और आर्थिक परेशानियों के बावजूद हमास जैसा आतंकी संगठन गजा पट्टी में अब भी युवाओं के लिए समर कैंप चला रहा है. इस कैंप में हिस्सा लेने वालों को गुरिल्ला स्टाइल युद्ध की ट्रेनिंग दी जाती है.
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafaदुनिया के कई देशों में समर कैंपों के दौरान रॉक क्लाइबिंग, स्विमिंग या स्पोर्ट्स सिखाये जाते हैं. लेकिन हमास इस दौरान भविष्य के लड़ाकों की फौज तैयार करता है.
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafaहमास के समर कैंप में सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों युवा हिस्सा लेते हैं. आम तौर पर इनकी संख्या 15,000 से 25,000 के बीच होती है. ट्रेनिंग सेना जैसी कड़ी होती है. यह तस्वीर दक्षिणी गजा पट्टी के राफा समर कैंप की है.
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafaसमर कैंप के दौरान फलीस्तीनी किशोर आग जैसे खतरों की भी परवाह नहीं करते. इन तस्वीरों से अंदाजा लगता है कि वहां संघर्ष किस कदर समाज के बीच जा चुका है.
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafaइस कैंप का इस्तेमाल कर हमास किशोरों को इस्राएल के खिलाफ भड़काता भी है. हमास के मुताबिक एक अलग फलस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के लिए वह युवाओं को यह ट्रेनिंग दे रहा है.
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafaएक तरफ हमास बच्चों को लड़ने की ट्रेनिंग देता है और दूसरी तरफ हमलों में बच्चों के इस्तेमाल की आलोचना करता है.
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafaलड़ाई के साथ साथ कैंप में हिस्सा लेने वालों को प्राथमिक उपचार और राहत व बचाव करना भी सिखाया जाता है. रिपोर्ट: एपी/ओएसजे (रॉयटर्स)
तस्वीर: Reuters/I. Abu Mustafa हमास प्रवक्ता ने कहा कि यह फलस्तीनी सशस्त्र प्रतिरोध पर दबाव बनाने का असफल प्रयास है. फलस्तीन के इस्लामिक संगठन हमास ने वैश्विक आतंकवादियों की सूची में हमास प्रमुख इस्माइल हानिया को सूचीबद्ध करने के अमेरिकी निर्णय की निंदा की है. इस संगठन के नेताओं ने अमेरिकी फैसले को 'हास्यास्पद' करार दिया है. उन्होंने कहा कि फलस्तीनी लोग अमेरिकियों से अच्छे व्यवहार के प्रमाणपत्र का इंतजार नहीं कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने हमास के प्रवक्ता गाजा हाजेम कासेम के हवाले से कहा कि इस्माइल हानिया को आतंकवादियों की सूची में शामिल करना फलस्तीनी सशस्त्र प्रतिरोध पर दबाव बनाए रखने का एक असफल प्रयास है. कासेम ने कहा, "यह हमारे प्रतिरोध को आगे बढ़ने और इजराइली कब्जे से अंतिम छुटकारा पाने के हमारे प्रयासों को खत्म नहीं कर पाएगा." उन्होंने कहा कि हानिया अपने लोगों और अपने लक्ष्य के खातिर खुद को और उनके पास जो कुछ भी है उसका बलिदान करेंगे.
येरुशलम को इस्राएल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के अमेरिकी फैसले के बाद अमेरिका और इस फलस्तीनी गुट हमास के बीच तनाव बढ़ा है.
आईएएनएस/एए
इस्राएल-फलस्तीन टकराव का बड़ा मुद्दा येरुशलम है, 1967 में हुये इस्राएल-अरब युद्ध के दौरान दिखने वाले येरुशलम और आज के येरुशलम की तुलना कीजिये इन तस्वीरों में.
तस्वीर: Reuters/R. Zvulunपुराने शहर की दीवार और सोने का गुंबद डोम ऑफ द रॉक और पीछे नजर आने वाला पहाड़ जो पुराने शहर के पूर्व में स्थित है. यहां दुनिया का सबसे पुराना अभी भी इस्तेमाल हो रहा यहूदी कब्रिस्तान है जो पहाड़ के पश्चिमी और दक्षिणी ढलान पर स्थित है. एक वक्त में यहां बहुत सारे जैतून के पेड़ हुआ करते थे और इसलिये इस क्षेत्र का नाम माउंट ऑफ ऑलिव्स पड़ा.
तस्वीर: Reuters/R. Zvulunयदि प्राचीन ऑटोमन शहर की दीवार और दरगाह तस्वीर में नजर न आये तो लोग शायद यह समझ ही न पायें कि यह वही जगह है जिसकी तस्वीर हमने पहले देखी थी. यह तस्वीर 7 जून 1967 को ली गई थी जब अरब-इस्राएल युद्ध अपने चरम पर था.
तस्वीर: Government Press Office/REUTERSचांदी के रंग के गुंबद और विशाल हॉल वाली अल-अक्सा मस्जिद टेंपल माउंट पर स्थित है. मुस्लिम इस मस्जिद को "नोबल सेंचुरी" कहते हैं लेकिन यह यहूदी धर्म का भी सबसे पवित्र स्थल माना जाता है. मान्यता है कि यहां ऐसे दो इबादतखाने थे जिनका उल्लेख बाइबिल में मिलता है. इसे मक्का और मदीना के बाद सुन्नी इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल कहा जाता है.
तस्वीर: Reuters/A. Awadअल अक्सा का अनुवाद, "सबसे दूर स्थित" मस्जिद होता है. यह येरुशलम की सबसे बड़ी मस्जिद है. 1967 के छह दिवसीय युद्ध में येरुशलेम पर विजय प्राप्त करने के बाद इस्राएल का इस इलाके पर सख्त नियंत्रण रहा है. उस वक्त नेताओं के बीच यह सहमति बनी थी कि मस्जिद का प्रबंधन इस्लामिक धार्मिक ट्रस्ट, वक्फ के पास होगा.
तस्वीर: Reuters/इस दरवाजे का नाम दमिश्क दरवाजा इसलिये पड़ा क्योंकि यहां से गुजरने वाली सड़क दमिश्क को जाती है. येरुशलम के फलस्तीनी हिस्से का यह व्यस्त प्रवेश द्वार है. पिछले दो वर्षों में यह कई बार सुरक्षा संबंधी घटनाओं और फलस्तीन की ओर से इस्राएल पर हमलों का केंद्र रहा है
तस्वीर: Reuters/R. Zvulunइस ऐतिहासिक दमिश्क दरवाजे को तुर्क सुल्तान सुलेमान ने साल 1537 में तैयार करवाया था. यह काफी कुछ वैसा ही नजर आता है जैसा कि ये साल 1967 में नजर आता था. सात दरवाजों से होकर पुराने शहर और इसके अलग-अलग क्वार्टरों में प्रवेश संभव है.
तस्वीर: Reuters/येरुशलम की ओल्ड सिटी 1981 से यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में है और काफी जीवंत नजर आती है. यहां विभिन्न धर्मों के कई महत्वपूर्ण स्थल हैं, मुस्लिमों के लिये डोम ऑफ द रॉक, अल अक्सा मस्जिद, यहूदियों के लिए पश्चिमी दीवार, ईसाइयों के लिये चर्च. साथ ही यहां खाने-पीने और खरीदारी करने के भी शानदार ठिकाने हैं. यह पर्यटकों का मुख्य आकर्षण केंद्र है.
तस्वीर: Reuters/A. Awadयह तस्वीर साल जुलाई 1967 में ली गई थी. 50 साल बाद भी यहां कुछ चीजें बिल्कुल नहीं बदली हैं. सिर पर थाल लिये एक लड़का यहां की गलियों में ब्रेड बेच रहा है. अन्य लोगों की चहलकदमी भी साफ नजर आ रही है.
तस्वीर: Reuters/Fritz Cohen/Courtesy of Government Press Officeयह यहूदी लोगों के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. यहूदी लोग यहां प्रार्थना करने आते हैं और दीवार की दरारों में कई बार नोट भी रख जाते हैं. यहां महिलाओं और पुरुषों के लिये अलग-अलग व्यवस्था है और यह स्थल साल भर खुला रहता है. लेकिन अंदर आने के लिये सुरक्षा जांच अनिवार्य है.
तस्वीर: Reuters/R. Zvulunइस दीवार को "वेलिंग वॉल" के नाम से भी जाना जाता है लेकिन यहूदी इसे एक अपमानजनक शब्द मानते हैं और इसका इस्तेमाल नहीं करते. दीवार पर आने वालों की यह तस्वीर उस वक्त ली गई थी जब इस्राएल ने छह दिन चले युद्ध के बाद इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया था. 19 साल पहले इस इलाके पर जॉर्डन ने कब्जा कर लिया था.
तस्वीर: Reuters/Fritz Cohen/Government Press Office