अयमान अल जवाहिरी ने भारत और उसके पड़ोसी देशों में अल कायदा की ब्रांच शुरू करने के एलान कर हड़कंप मचा दिया है. दक्षिण एशिया में भारत ही ऐसा देश है जिसने एशिया में फैलते आतंकवाद को अपनी सीमा पर रोका हुआ है.
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पाकिस्तान से लेकर इराक और आगे लीबिया तक आतंकवाद का एक गलियारा से बन चुका है. फिलहाल भारत ही ऐसा देश है जिसने आतंकवाद को पूर्वी एशिया की तरफ फैलने से रोका है. एक वीडियो संदेश में अल जवाहिरी ने इस्लामिक राज्य का विस्तार करने का एलान करते हुए "जिहाद के झंडे को" भारतीय उपमहाद्वीप में आगे बढ़ाने का एलान किया.
जवाहिरी के मुताबिक अल कायदा के लड़ाके "बर्मा, बांग्लादेश, असम, गुजरात और कश्मीर में" मुसलमानों की लड़ाई लड़ेंगे. गुजरात और असम में खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. भारत में 18 करोड़ मुसलमान रहते हैं. यह आबादी का 15 फीसदी हिस्सा है.
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भारत सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और राज्यों से चौकसी बढ़ाने को कहा है. भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करने वाले एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है. अलर्ट जारी कर दिया गया है.
वीडियो ऐसे वक्त में आया है जब अल कायदा पहचान के संकट से जूझ रहा है. ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल कायदा और इराक व सीरिया में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (आईएस) में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. आईएस के पास भारत समेत दुनिया भर के लड़ाके हैं. मध्य एशिया में उसका प्रभाव बढ़ता जा रहा है.
भारत में आखिरी बार बड़ा आतंकवादी हमला 2008 में मुंबई में हुआ था. उसके तार पाकिस्तान से जुड़े. इसके बाद से भारत में कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है. लेकिन इस बीच देश के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा जरूर हुई. केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के कुछ छुटभैय्ये नेता भी लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं. अल कायदा साप्रंदायिक हिंसा और इस तरह के बयानों से उपजते गुस्से को भुनाना चाहता है.
ओएसजे/एएम (रॉयटर्स)
2013 के आतंकी हमले
रूस में दो आतंकवादी हमलों के साथ साल खत्म हो गया. यूरोप से लेकर अमेरिका तक गुजरा साल आतंकवादी हमलों से जूझता रहा.
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अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
केन्या की राजधानी नैरोबी में सितंबर को अचानक कुछ बंदूकधारियों ने वेस्टगेट मॉल में घुस कर लोगों को बंधक बना लिया. इस अचानक हुए हमले ने दुनिया को हैरान कर दिया. इसमें भारतीयों सहित कुल 72 लोगों की जान गई.
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अफ्रीका में अफरा तफरी
केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य में ईसाइयों और मुस्लिमों का झगड़ा नवंबर दिसंबर के महीनों में खुल कर सामने आया. इस पर काबू पाने के लिए फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र सेना की मदद ली गई. झगड़े में 600 से ज्यादा लोगों की जान चली गई.
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अल्जीरिया का बंधक संकट
गैस भंडार में जब अल कायदा के मुख्तार बेलमुख्तार की अगुवाई वाले ग्रुप ने करीब 800 लोगों को बंधक बना लिया, तो पूरी दुनिया की सांसें फूल गईं. जनवरी में चार दिन के संकट में करीब 40 लोग मारे गए और 29 आतंकवादी ढेर हो गए.
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मैराथन में मातम
अमेरिकी शहर बॉस्टन में इस साल मैराथन दौड़ के खत्म होते होते अचानक बम विस्फोट होने लगे. जांच में पता लगा कि चेचन्या के दो भाइयों ने प्रेशर कुकर से विस्फोट किए. इस घटना में पांच लोगों की जान गई.
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सीरिया, सरीन और सिहरन
तीन बरस से धधक रहा सीरिया अचानक रासायनिक हथियारों की जद में आ गया. सरीन गैस के इस्तेमाल की बात आई, जिसके बाद सीरिया पर अंतरराष्ट्रीय सैनिक कार्रवाई की संभावनाएं बढ़ने लगीं. हालांकि रूस के दखल के बाद यह टल गया.
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लथपथ इराक
पूरा साल इराक धमाकों, बम विस्फोटों और गोलियों की आवाज से गूंजता रहा. दिसंबर तक 7000 लोगों की जान इस खून खराबे की वजह से चली गई. हालांकि शांति की उम्मीद अब भी नहीं.
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नेता बनाम नक्सली
भारत के छत्तीसगढ़ में माओवादियों के हमले में कांग्रेस के नेताओं का पूरा दल साफ हो गया. इनमें वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल भी शामिल थे. मई महीने में घात लगा कर किए गए इस हमले में 28 लोगों की मौत हो गई.
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नहीं सुधरे हालात
अफगानिस्तान से 2014 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय सेना की वापसी होने वाली है. लेकिन वहां हमलों में कमी नहीं आ रही है. ऐसे ही एक हमले में भारत के दूतावास पर अगस्त में आतंकवादी हमला हुआ.
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पाकिस्तान के तालिबान
यूं तो एशिया का यह देश साल भर अशांत रहा लेकिन सितंबर में चर्च पर हमले की वजह से यह खास तौर पर सुर्खियों में रहा. हमले में कम से कम 85 लोग मारे गए. तालिबान ने पाकिस्तान के अंदर ही हिंसक खेल शुरू कर दिया.
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ओलंपिक से पहले हमले
वोल्गोग्राड शहर में 24 घंटे में दो आतंकवादी हमलों ने रूस की नींद उड़ा दी. छह हफ्ते में विंटर ओलंपिक शुरू हो रहा है और देश इसकी तैयारियों में लगा है. लेकिन दिसंबर में हुए हमलों से सवाल उठते हैं.