पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के लिए बेहद उपजाऊ साबित हो रहे हैं. नदिया और मुर्शिदाबाद जिलों के 17 गांवों में युवकों की भर्ती के लिए इस संगठन ने बांग्ला भाषा में पोस्टर लगाए हैं.
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केंद्रीय गृह मंत्रालय की चेतावनी के बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने अब तक इन गतिविधियों पर निगरानी के लिए न तो कोई साइबर सेल खोला है और न ही दूसरा कोई एहतियाती कदम उठाया है. अब बांग्लादेश में आईएस के स्थाई नेता की नियुक्ति के बाद यह खतरा और गहरा हो गया है. केंद्रीय खुफिया एजंसियों का कहना है कि आईएस अब बंगाल के खासकर सरहदी इलाकों के युवकों को संगठन में भर्ती के लिए लुभाने का प्रयास कर रहा है. इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की साइबर सेल की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि श्रीनगर, गुवाहाटी और पुणे के चिंचवाड़ के बाद कोलकाता से सटा हावड़ा देश का चौथा ऐसा शहर है जहां 16 से 30 साल के आयुवर्ग के युवक आईएस की वेबसाइट में खासी दिलचस्पी ले रहे हैं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते अगस्त में देश के 12 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की एक बैठक बुलाई थी. बंगाल के पुलिस महानदेशक जीएमपी रेड्डी भी इस बैठक में शामिल हुए. इसमें आईएस की वेबसाइट में दिलचस्पी लेने वालों की निगरानी के लिए राज्यों को साइबर सेल के गठन का निर्देश दिया गया. लेकिन बंगाल में बढ़ते खतरे के बावजूद मैनपावर की कमी का रोना रोते हुए अब तक इसका गठन नहीं किया गया है. इस सेल में तैनात कर्मचारियों को बंगलुरू स्थित नेशनल टेकनिकल एंड रिसर्च आग्रानाइजेशन (एनटीआरओ) की ओर से प्रशिक्षित किया जाना था.
आईएस से जुड़े पांच तथ्य
आईएस की बढ़ती ताकत दुनिया भर के देशों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भयानक आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं. जानिए आईएस से जुड़ी कुछ अहम बातें.
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आईएस में भर्ती
सीरिया और इराक के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने वाले इस आतंकी गुट ने 29 जून 2014 को खिलाफत का एलान किया. तब से अब तक संगठन ने अपनी संख्या बढ़ाने में बड़ी कामयाबी पाई है. रिपोर्टों के मुताबिक 2011 से अब तक आईएस में 90 देशों से 20,000 से ज्यादा लोग भर्ती हुए हैं.
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इतिहास को नुकसान
सीरिया में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जगहों को आईएस ने भारी नुकसान पहुंचाया है. ऐतिहासिक इमारतों और संग्रहालयों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं. आईएस ने इनसे मिली रकम का इस्तेमाल खुद को मजबूत करने में किया है.
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कत्लेआम
आईएस की क्रूरता किसी से छुपी नहीं है. आईएस की ओर से अक्सर जारी किए जाने वाले वीडियो उसके जुल्म की गवाही देते हैं. लोगों का सिर कलम कर देना, गर्दन रेत देना या जिंदा जला देना इनके आम कुकृत्य हैं.
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तकनीक के जानकार
यह आतंकवादी संगठन आधुनिक दौर में तकनीक की अहमियत समझता है. अपने प्रचार के लिए ये आतंकी गुट सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करता है. अपने वीडियो बनाने में ये संगीत, एक्शन सीन इत्यादि का इस्तेमाल कर रिलीज करते हैं, जिससे और लोगों को अपने साथ जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकें.
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खर्च
आईएस के पास इतना पैसा है कि वह अपनी आतंकवादी गतिविधियों को आराम से अंजाम दे रहा है. उसने डोनेशन पाने का अपने लिए एक मजबूत तंत्र भी विकसित कर लिया है. आतंकी संगठन धन जुटाने के लिए बंधक बनाता है और ब्लैकमेल भी करता है. कई छोटी बड़ी कंपनियां भी इसका निशाना बनी हैं.
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खुफिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि आईएस बंगाल में महज वेबसाइट और पोस्टरों के जरिए ही युवकों को संगठन में शामिल होने के लिए नहीं लुभा रहा है, बल्कि उसके कई एजंट भी सीमावर्ती गांवों में घूम रहे हैं. लेकिन इस खतरे के बावजूद आखिर अब तक साइबर सेल का गठन क्यों नहीं किया जा सका है?इस सवाल पर राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, "हम राज्य में इस्लामिक स्टेट की बढ़ती गतिविधियों से अवगत हैं और मौजूदा तंत्र की सहायता से उनकी गतिविधियों की निगरानी की कोशिश भी की जा रही है. लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते अब तक साइबर सेल का गठन नहीं किया जा सका है."
खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में इस्लामिक स्टेट के कई वीडियो सीडी भी दिखाए जा रहे हैं. खासकर नदिया व मुर्शिदाबाद जिलों के कई सीमावर्ती गांवों से आईएस के ढेरों पोस्टर भी बरामद किए गए हैं. इन पोस्टरों में कहा गया है कि भारत के मुसलमानों के लिए मुगलिस्तान नामक आजाद देश बनाया जाएगा.
इससे पहले बांग्लादेश के जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश के पश्चिम बंगाल में सक्रियता के सबूत तो मिल ही चुके हैं. बीते साल बर्दवान में हुए विस्फोटों के बाद जांच के दौरान पता चला था कि इस संगठन ने राज्य में अपना नेटवर्क कितना मजबूत कर लिया है. अब उसी नेटवर्क के सहारे इस्लामिक स्टेट भी बंगाल में अपने पांव पसार रहा है.
क्या है आईएस?
आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट लंबे समय से सुर्खियों में है. लेकिन आखिर आईएस है क्या? कितना शक्तिशाली है? आईएस से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब.
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क्या है "इस्लामिक स्टेट"?
यह एक सुन्नी आतंकवादी संगठन है जो अल कायदा से अलग हो कर बना है. सीरिया और इराक में निष्फल सरकारों से निपटने के लिए यह संगठन सक्रिय हुआ. इसके झंडे पर लिखा है, "मुहम्मद अल्लाह के रसूल है, अल्लाह के अलावा कोई दूसरा खुदा नहीं है." खुद को इस्लाम का प्रचारक कहने वाला आईएस विरोधियों लोगों की जान लेने में लगा है.
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कहां सक्रिय है "इस्लामिक स्टेट"?
आईएस अपनी खिलाफत स्थापित करने का उद्देश्य रखता है, एक ऐसी जगह बनाना चाहता है जहां इस्लाम की उसकी बनाई परिभाषा चलेगी और शरिया कानून लागू होगा. सीरिया और इराक में अस्थिरता के कारण आईएस इन दोनों देशों के कुछ इलाकों पर कब्जा करने में कामयाब हो पाया है.
अन्य आतंकी संगठनों से यह कैसे अलग है?
आईएस की बर्बरता इसकी सबसे बड़ी पहचान बन गयी है. मासूम लोगों और अपने दुश्मनों को डराने की खातिर इस्लामिक स्टेट ने कई लोगों के सर कलम किए हैं. जिन इलाकों में आईएस का कब्जा है वहां इसी की हुकूमत चलती है.
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अन्य आतंकी संगठनों से संबंध?
हाल ही में नाइजीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन बोको हराम ने आईएस के लिए अपना समर्थन जाहिर किया. वहीं अल कायदा खुद को इससे अलग मानता है. अल कायदा की शाखा जभात अल नुसरा आईएस के खिलाफ है. इन संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा है कि कौन किससे ज्यादा खूंखार है. बोको हराम के नाम 13,000 जानें हैं, तो आईएस 24,000 लोगों को मारने या घायल करने के लिए जिम्मेदार है.
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कौन हैं आईएस के समर्थक?
अलग अलग देशों से 20,000 से ज्यादा लोग आईएस के साथ जुड़ चुके हैं. आईसीएसआर की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 4,000 से ज्यादा पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका से हैं. स्वीडन और बेल्जियम जैसे छोटे देशों से भी लोग इस्लामिक स्टेट का साथ देने पहुंच रहे हैं.
कैसे निपट रहा है पश्चिम?
अगस्त 2014 से अमेरिका सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है. सीरिया में अब तक 1,422 और इराक में 2,242 हमले किए जा चुके हैं. वहीं जर्मनी सीरिया से लौटे 30 कथित आतंकवादियों पर मुकदमा चलाने जा रहा है.
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सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में इन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए सरकार व सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते ठोस कार्रवाई करनी होगी. राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं. इसी का फायदा उठा कर इस्लामिक स्टेट के एजंट बंगाल से युवकों की भर्ती की कवायद में जुटे हैं. इसके साथ ही वे यहां खतरनाक वारदात अंजाम दे सकते हैं. इसलिए समय रहते इस दिशा में ठोस कदम उठाना होगा.
सरकार का दावा है कि सीमाई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गई है. लेकिन अतीत में सक्रिय बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन की गतिविधियों व वारदातों को ध्यान में रखते हुए महज सुरक्षा व्यवस्था चुस्त करने से ही काम नहीं होगा. इसके लिए आईएस की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी अंकुश लगाना जरूरी है ताकि राज्य के युवा उसकी ओर आकर्षित ना हों.
वैसे भी सीमावर्ती इलाकों से हजारों युवक रोजगार के सिलसिले में इराक और मध्यपूर्व के देशों में जाते रहे हैं. ऐसे में इनमें से कितने युवक सीरिया का रुख कर लें, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है.