आतंकवाद और सीरिया नहीं, तुर्की में महंगाई है बड़ा मुद्दा
१८ जून २०१८
चुनाव के मुहाने पर खड़े तुर्की में इस बार आतंकवाद या पड़ोसी देश सीरिया का गृहयुद्ध मुद्दा नहीं है, मुद्दा है खराब आर्थिक हालात जिसकी वजह से मुद्रा लीरा की कीमत में भारी गिरावट देखने को मिल रही है.
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नतीजा यह है कि महंगाई चरम पर है और लोगों को रोजमर्रा के सामान खरीदने में भी मुश्किलें आ रही हैं. 24 जून को तुर्की में राष्ट्रपति और संसद का चुनाव होना है. इस्तांबुल के उस्कुदार बाजार में रोजमर्रा का सामान खरीदने आई 54 वर्षीय महिला आएसे तातर कहती हैं, "हमारे किचन और फ्रिज खाली पड़े हैं. इतनी महंगाई में कैसे खाने-पीने का सामान खरीदा जा सकता है?"
राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोवान ने पिछले दिनों अपनी एक रैली में कहा था कि तुर्की में रेफ्रिजरेटर की बिक्री में भारी इजाफा देखने को मिला है. अगर हर घर में फ्रिज है तो इसका मतलब हम समृद्ध हो रहे हैं और अर्थव्यवस्था अच्छी चल रही है. इस पर तातर का कहना है कि अर्थव्यवस्था कैसे सही है? लोगों ने फ्रिज खरीदे हैं, लेकिन वे खाली हैं. लोगों के पास खाने-पीने का सामान खरीदने की क्षमता नहीं है.
ये देश एशिया और यूरोप, दोनों का हिस्सा हैं
दुनिया का हर देश किसी ना किसी महाद्वीप का हिस्सा है. लेकिन कुछ ऐसे भी देश हैं जो दो महाद्वीपों में पड़ते हैं. एक नजर ऐसे ही देशों पर जो एशिया और यूरोप में गिने जाते हैं.
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रूस
रूस दुनिया का सबसे विशाल देश है जिसका 39 लाख वर्ग किलोमीटर का हिस्सा यूरोप में पड़ता है जबकि उसका कुल क्षेत्रफल 1.7 करोड़ वर्ग किलोमीटर है.
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तुर्की
तुर्की के इस्तांबुल शहर को एशिया और यूरोप के बीच एक पुल समझा जाता है. तुर्की के कुल 7.8 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में से 23 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका यूरोप का हिस्सा है.
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कजाखस्तान
कजाखस्तान की गिनती मध्य एशियाई देशों में होती है. लेकिन उसका 1.8 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र यूरोप की सीमाओं में आता है जबकि उसका कुल क्षेत्रफल 27 लाख वर्ग किलोमीटर है.
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अजरबैजान
एक और मध्य एशियाई देश अजरबैजान का भी एक हिस्सा यूरोप की भौगोलिक सीमाओं में पड़ता है जो लगभग 6.9 हजार वर्ग किलोमीटर का है. लेकिन उसके कुल 86.6 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल का ज्यादातर हिस्सा एशिया में ही है.
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जॉर्जिया
जॉर्जिया का भी लगभग ढाई हजार वर्ग किलोमीटर का हिस्सा यूरोप में गिना जाता है. यूरोप का हिस्सा बनने की कोशिशों के कारण 69 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश की रूस से खासी तनातनी रहती है.
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साइप्रस
साइप्रस भौगोलिक रूप से यूरोप में नहीं आता है. लेकिन पारंपरिक तौर पर वह यूरोप के साथ नजदीकी तौर पर जुड़ा हुआ है. वह यूरोपीय संघ का भी हिस्सा है.
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आर्थिक विकास और महंगाई
राष्ट्रपति एर्दोवान की रैली के बाद सोशल मीडिया पर उनके कई मीम बने और वायरल हुए. इनमें से एक काफी चर्चित रहा जिसमें 2002 में एर्दोवान के सत्ता में आने से पहले तुर्कों को आदिकाल का दिखाया गया है. 2018 की शुरुआत में तुर्की की अर्थव्यवस्था 7.4 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही थी, लेकिन इसी दौरान 12.15 फीसदी महंगाई दर और लीरा में 20 फीसदी की गिरावट भी देखने को मिली. देश के सांख्यिकी विभाग तुर्कस्टैट के मुताबिक, इस साल मई में खाने-पीने की चीजों के दाम पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी बढ़ गए.
अखबार हैबरतुर्क की रिपोर्ट बताती है कि मई में शुरू हुए रमजान में ब्रेड, आलू, प्याज और मीट जैसे मूल खाने के दाम आसमान को छूने लगे. उस्कुदार बाजार में खरीदारी करने आए अकाउंटेट इरदम चीजों के दाम को देखकर आगे बढ़ जाते हैं. वह कहते हैं, "हमसे उम्मीद की जाती है कि हम किराया और बिल वक्त पर भरें और अपने परिवार का पेट पालें, लेकिन 1600 लीरा (करीब 345 डॉलर) में हम क्या कर सकते हैं? ईद के लिए पैसे बचे नहीं हैं."
पिछले साल उस्कुदार जिले में हुए चुनाव में राष्ट्रपति एर्दोवान हार गए थे. यहां उनकी पार्टी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) का संसदीय क्षेत्र और वोट बैंक था. पिछले साल तीन बड़े शहरों के चुनाव में भी राष्ट्रपति को हार का सामना करना पड़ा था. बहुत से लोग मानते हैं कि इस हार का मतलब राष्ट्रपति को यह संदेश देना है कि वह अपने आर्थिक फैसलों पर दोबारा विचार करें.
एक स्टॉक मार्केट ट्रेडर ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि देश की अर्थव्यवस्था बद से बदतर हो जाएगी अगर राष्ट्रपति यूं ही बाजार में मुकाबला करते रह गए और लोगों के बारे में सोचना छोड़ दिया.
एर्दोवान ने सत्ता के शुरुआती एक दशक तेज आर्थिक विकास से आम लोगों के दिल में जगह बनाई थी. 2008 की वैश्विक मंदी से खुद को बचाने की कोशिश की और सस्ते कर्ज लिए. लेकिन अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने कर्ज को महंगा कर दिया है और तुर्की जैसे देश विदेशी निवेशकों को कम पसंद आ रहे हैं.
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मुंह फेर रहे विदेशी निवेशक
क्यूएनबी फाइनेंस बैंक के आर्थिक विशेषज्ञ डेनिज सिसेक के मुताबिक, "आर्थिक सुधारों की कमी, बाजार के उतार-चढ़ाव और राजनीतिक पंगुता की वजह से तुर्की बड़े जोखिम की चपेट में है." आर्थिक विभाग के आंकड़े बताते है कि 2017 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 10.8 अरब डॉलर रहा जो 7 वर्षों में सबसे कम है. इसी के साथ केंद्रीय बैंक का मोर्चा संभालने की एर्दोवान की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से हालात और भी खराब हो रहे है.
तुर्की के राष्ट्रपति महंगा कर्ज देने के विरोधी रहे हैं और उनका तर्क है कि इससे महंगाई बढ़ती है. सिसेक का कहना है कि तुर्की के केंद्रीय बैंक को निवेशकों को यह समझाना पड़ रहा है कि वह अब भी स्वायत्त संस्था है. फिलहाल विदेशी कर्ज और राजनीतिक उतार-चढ़ाव से देश में संवेदनशील हालात है.
पिछले दिनों केंद्रीय बैंक ने 2 महीने के अंदर-अंदर मुख्य रेट्स को 500 बेसिस प्वाइंट बढ़ा दिया जिससे मुद्रा लीरा पर असर पड़ा. कीमत घटने से छोटे और मझोले कारोबारियों को दिक्कतें हुईं. तुर्की की बड़ी कंपनियां जैसे यिलडिज, तुर्क टेलिकॉम के मुख्य शेयरहोल्डर ओटास और डोगस होल्डिंग को कर्ज देने के लिए दोबारा अपनी रणनीति बनानी पड़ी.
इस्तांबुल के मशहूर ग्रैंड बाजार के सुनार रेमजी सुबह से ग्राहकों के आने का इंतजार करते हैं. वह कहते हैं कि बाजार में आने से सिर्फ वक्त बर्बाद होता है. महंगाई के इस दौर में कोई ग्राहक नहीं आ रहा है.
बतौर रेमजी, राष्ट्रपति ने लोगों से अपनी जमापू्ंजी बैंकों में डालने के लिए कहा था लेकिन लोगों के कानों में जूं तक न रेंगी. कोई भी ग्राहक सोने के बदले कैश लेने नहीं आ रहा है. यह वक्त एक्चेंज करने का नहीं है, लेकिन मुझे अमेरिकी डॉलर में अपना किराया चुकाना है.
मुख्य विपक्षी पार्टी सेक्युलर रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के नेता मुहर्रम इंस एर्दोवान की लोकप्रियता में सेंध लगाने की धमकी दे रहे हैं. वह अपनी रैलियों में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं. बतौर इंस, खाने-पीने में महंगाई 30 फीसदी कर पहुंच चुकी है. तुर्की डूब रहा है.
हाल ही में हुए पोल से पता चला है कि फैसले के लिए चुनाव का दूसरा राउंड कराना जरूरी हो सकता है. अभी यह कहना मुश्किल है कि एर्दोवान की पार्टी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) सत्ता बचा पाने में कामयाब होगी या नहीं.
इस्तांबुल में कितना यूरोप बसता है?
यूरोप और तुर्की में जो साझी चीजें हैं उनमें एक है इस्तांबुल. करीब डेढ़ करोड़ लोगों का शहर केवल भौगोलिक रूप से ही यूरोप का हिस्सा नहीं है. एक नजर विषमताओं से भरे इस शहर पर.
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इस्तांबुल यूरोप का या एशिया का?
इस्तांबुल दुनिया के उन शहरों में सबसे नामचीन है जो दो महादेशों में हैं. यूरोप और एशिया में बसे इस्तांबुल में परंपरा का आधुनिकता, धर्म और धर्मनिरपेक्ष जीवनशैली से मेल होता है. कई लोग मानते हैं कि यही चीज इस शहर को जादुई बना देती है.
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दो हजार साल से पुराना शहर
इस्तांबुल का इतिहास करीब 2600 साल तक जाता है और इसकी झलक आज के शहर में भी दिख जाएगी. कई शासकों ने इस पर कब्जे की कोशिश की जिनमें ईरानी, ग्रीक, रोमन और ओटोमन प्रमुख हैं. कांस्टान्टिनोपोल बाइजानटीन और बाद में ओटोमन साम्राज्य का केंद्र था. 1930 में शहर का नाम दोबारा इस्तांबुल कर दिया गया.
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दो दुनिया के बीच
बोस्पोरस इस्तांबुल की आत्मा है. यह जलडमरुमध्य यूरोपीय शहर के यूरोपीय और एशियाई इलाकों को जोड़ता है. हर दिन दसियों हजार लोग फेरी से किनारे बदलते हैं. समुद्री चिड़िया चहचहाती रहती है और फेरियों में लोगों को चाय के साथ तिल वाली ब्रेड सिमित परोसी जाती है. यूरोप के काराकोय से एशिया के कादिकोय का सफर 20 मिनट का है.
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महादेशों के बीच पुल
गलाता ब्रिज नावों के साथ और भी बहुत कुछ दिखाती है. मछुआरे अच्छे शिकार की खोज में यहां आपस में होड़ करते हैं. उन्हीं के बीच व्यापारी, सैलानी, जूते पॉलिश करने वाले, मक्का बेचने वाले भी दिखते हैं. यहां पहला पुल 1845 में बना था तब शहर को कॉन्स्टांटिनोपोल कहा जाता था.
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"यूरोप एक अहसास है"
हाथ हिलाते एक मछुआरे ने कहा, "मेरा नाम वेफ्की है, मैं खुद को यूरोपीयन महसूस करता हूं. हम ज्यादा आजादी चाहते हैं और इसके लिए तुर्की और यूरोपीय संघ को फिर से पास आना चाहिए." वेफ्की को पेंशन मिलती है और मछली पकड़ना उनका शौक होने के साथ ही कमाई का दूसरा जरिया है. बाजार में वो 2 किलो मछली करीब 550 रूपये में बेचते हैं.
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शहर के दिल में मीनारें
तातसिम चौराहे को शहर का दिल भी कहा जाता है. यहां बड़ी तेजी से एक मस्जिद बनाई जा रही है. इसमें 30 मीटर ऊंचा गुम्बद और दो मीनारें होंगी. 2019 के आम चुनाव से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य है. आलोचक कहते हैं कि राष्ट्रपति रिचप तैयब एर्दोवान चौराहे पर नई पहचान थोप रहे हैं.
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यूरोपीय और पवित्र
इस्तांबुल के फातिह इलाके में रोजमर्रा की जिंदगी थोड़ी ज्यादा रुढ़िवादी है, हालांकि यह शहर के यूरोपीय हिस्से में हैं. यहां रहने वाले ज्यादातर लोग एनातोलिया से काम और बेहतर जिंदगी की तलाश में आए हैं. कुछ लोग फातिह को "पवित्र शहर" कहते हैं. तुर्की के राष्ट्रपति और सत्ताधारी पार्टी के बहुत से समर्थक यहीं रहते हैं.
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मस्जिद के साये में खरीदारी
फातिह की मस्जिद के पास हर बुधवार को एक बाजार लगता है. लोग रसोई का सामान, कपड़े, चादर, फल और सब्जियां खरीदने के लिए बड़ी संख्या में उमड़ते हैं. शहर की दूसरी दुकानों की तुलना में कीमतें कम होती हैं, क्योंकि यहां किराया कम है. आजकल कई सीरियाई परिवार बी फातिह में रहते हैं. तुर्की ने सीरिया में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद किसी भी देश से ज्यादा यानी करीब 30 लाख शरणार्थियों को पनाह दी है.
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इस्ताबुल में छोटा सीरिया
फातिह की एक पहचान सीरियाई रेस्तरां भी हैं. यहां की कवाब में तेज लहसुन का जायका होता है. शरणार्थियो को आधिकारिक रूप से "मिसाफिर" या "गेस्ट" कहा जाता है. यूरोपीय संघ की तरह यहां शरण देने का को आधिकारिक तरीका नहीं है. बावजूद इसके सरकार ने हजारों सीरियाई लोगों को तुर्की की नागरिकता का वादा किया है. आलोचक इसे वोट हासिल करने का हथकंडा बताते हैं.
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नाइटलाइफ
जो लोग यहां बाहर निकल कर पार्टी करना या फिर शराब पीना चाहते हैं उन्हें इस्तांबुल के पड़ोस में दूसरे इलाके में एशिया की तरफ कादीकोय या फिर काराकोय की तरफ जाना होता है. तस्वीर में दिख रहा कारोकोय पुराने इलाकों में है. यहां कैफे, कॉन्सेप्ट स्टोर्स और गैलरियों में स्थानीय लोग और सैलानी मिलते हैं.
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सैलानियों से उम्मीद
आयेशगुल साराकोग्लू गालाता के एक डिजाइनर स्टोर में काम करती हैं जो सैलानियों में बड़ा मशहूर है. वो कहती हैं, "इस्तांबुल बहुत बदल गया है. बहुत सारे यूरोपीय सैलानी यहां हाल के वर्षों तक आते हैं ज्यादातर अरब सैलानी ही आते हैं. यह हमारे व्यापार के लिए बहुत अच्छा नहीं है. मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही बदलाव होगा."