सजा काट रहे आतंकवादियों पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि निर्दोष लोगों का नरसंहार करने वालों को किसी भी प्रकार का पैरोल या अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती.
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उच्चतम न्यायालय ने कहा "अगर आप निर्दोष लोगों की हत्या जैसे जघन्य अपराध में शामिल हैं तो पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर ऐसी मांग नहीं कर सकते. जिस पल आप ऐसे अपराध में दोषी पाए जाते हैं उसी वक्त से आपका नाता अपने घर-परिवार से टूट जाता है.”
नौशाद ने 27 फरवरी को अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए न्यायालय में एक महीने की छूट मांगी थी और अंतरिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी.
भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार
भारत में महिलाओं के लिए ऐसे कई कानून हैं जो उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से जीने के लिए सुविधा देते हैं. देखें ऐसे कुछ महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार...
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पिता की संपत्ति का अधिकार
भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है. अगर पिता ने खुद जमा की संपति की कोई वसीयत नहीं की है, तब उनकी मृत्यु के बाद संपत्ति में लड़की को भी उसके भाईयों और मां जितना ही हिस्सा मिलेगा. यहां तक कि शादी के बाद भी यह अधिकार बरकरार रहेगा.
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पति की संपत्ति से जुड़े हक
शादी के बाद पति की संपत्ति में तो महिला का मालिकाना हक नहीं होता लेकिन वैवाहिक विवादों की स्थिति में पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ता मिलना चाहिए. पति की मौत के बाद या तो उसकी वसीयत के मुताबिक या फिर वसीयत ना होने की स्थिति में भी पत्नी को संपत्ति में हिस्सा मिलता है. शर्त यह है कि पति केवल अपनी खुद की अर्जित की हुई संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है, पुश्तैनी जायदाद की नहीं.
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पति-पत्नी में ना बने तो
अगर पति-पत्नी साथ ना रहना चाहें तो पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने और बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है. घरेलू हिंसा कानून के तहत भी गुजारा भत्ता की मांग की जा सकती है. अगर नौबत तलाक तक पहुंच जाए तब हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 24 के तहत मुआवजा राशि तय होती है, जो कि पति के वेतन और उसकी अर्जित संपत्ति के आधार पर तय की जाती है.
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अपनी संपत्ति से जुड़े निर्णय
कोई भी महिला अपने हिस्से में आई पैतृक संपत्ति और खुद अर्जित की गई संपत्ति का जो चाहे कर सकती है. अगर महिला उसे बेचना चाहे या उसे किसी और के नाम करना चाहे तो इसमें कोई और दखल नहीं दे सकता. महिला चाहे तो उस संपत्ति से अपने बच्चो को बेदखल भी कर सकती है.
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घरेलू हिंसा से सुरक्षा
महिलाओं को अपने पिता या फिर पति के घर सुरक्षित रखने के लिए घरेलू हिंसा कानून है. आम तौर पर केवल पति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इस कानून के दायरे में महिला का कोई भी घरेलू संबंधी आ सकता है. घरेलू हिंसा का मतलब है महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना.
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क्या है घरेलू हिंसा
केवल मारपीट ही नहीं फिर मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना भी घरेलू हिंसा के बराबर है. ताने मारना, गाली-गलौज करना या फिर किसी और तरह से महिला को भावनात्मक ठेस पहुंचाना अपराध है. किसी महिला को घर से निकाला जाना, उसका वेतन छीन लेना या फिर नौकरी से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेना भी प्रताड़ना है, जिसके खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला बनता है. लिव इन संबंधों में भी यह लागू होता है.
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पुलिस से जुड़े अधिकार
एक महिला की तलाशी केवल महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है. महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस हिरासत में नहीं ले सकती. बिना वारंट के गिरफ्तार की जा रही महिला को तुरंत गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी होता है और उसे जमानत संबंधी उसके अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए. साथ ही गिरफ्तार महिला के निकट संबंधी को तुरंत सूचित करना पुलिस की ही जिम्मेदारी है.
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मुफ्त कानूनी मदद लेने का हक
अगर कोई महिला किसी केस में आरोपी है तो महिलाओं के लिए कानूनी मदद निःशुल्क है. वह अदालत से सरकारी खर्चे पर वकील करने का अनुरोध कर सकती है. यह केवल गरीब ही नहीं बल्कि किसी भी आर्थिक स्थिति की महिला के लिए है. पुलिस महिला की गिरफ्तारी के बाद कानूनी सहायता समिति से संपर्क करती है, जो कि महिला को मुफ्त कानूनी सलाह देने की व्यवस्था करती है.
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नौशाद ने अपनी याचिका में कहा कि वह अपनी जिदंगी के करीब 20 साल पहले ही जेल में काट चुका है और इस मामले के अलावा वह कभी किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल नहीं रहा. उसने बताया कि 24 अक्टूबर को उसने जेल प्रशासन के जरिये दिल्ली सरकार से अपनी बेटी की शादी के लिए पैरोल का अनुरोध किया था लेकिन उसे कोई जवाब नहीं दिया गया.
मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की तीन सदस्यीय बेंच ने मोहम्मद नौशाद की जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.
साल 1996 में दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में हुए बम धमाके के मामले में निचली अदालत और उच्च न्यायालय ने मोहम्मद नौशाद को दोषी करार दिया था. इस धमाके में 13 लोगों की मौत और 38 लोग जख्मी हो गए थे. निचली अदालत ने नौशाद को मौत की सजा सुनाई थी जिसे उच्च न्यायालय ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया था.
भारत में राजनीतिक भ्रष्टाचार
समय के साथ अपराधी भी राजनीति को अपना घर समझने लगे. 2014 के चुनावों के बाद नई संसद में पिछले दशकों में सबसे ज्यादा आपराधिक आरोपों वाले नेता चुने गए. भारत के कई प्रमुख नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमे चले हैं.
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लालू यादव
सालों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू यादव पर भ्रष्टाचार के 63 मामले थे लेकिन चारा घोटाले के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा और अपना पद छोड़ना पड़ा. अपराध साबित होने के कारण उन पर पिछला चुनाव लड़ने पर रोक लग गई. इस समय वे जमानत पर बाहर हैं.
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बीएस येदियुरप्पा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को 2008 में बीजेपी को प्रांत में पहली बार सत्ता में लाने का श्रेय जाता है. लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने परिवारवाद शुरू कर दिया और अपने बच्चों को जमीन के अलॉटमेंट में पक्षपात किया. भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया और अपना पद भी छोड़ना पड़ा.
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ए राजा
चार बार संसद के सदस्य और दो बार भारत के संचार मंत्री रहे ए राजा 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अभियुक्त हैं. मामले की जांच कर रही सीबीआई का कहना है कि 3000 करोड़ के इस घोटाले में मनपसंद लोगों को स्पेक्ट्रम के लाइसेंस दिए गए. 2011 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन 2012 से वे जमानत पर बाहर हैं.
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कणिमोझी
राजनीतिक भ्रष्टाचार का एक रूप फैसला लेने वाले राजनीतिज्ञों के करीबी लोगों के कारोबार में भागीदारी के रूप में सामने आया है. कणिमोझी डीएमके नेता एम करुणानिधि की बेटी हैं और आरोप है कि उनकी कंपनी कलाइनार टीवी में ए राजा की वजह से स्पेक्ट्रम लाइसेंस पाने वाले कारोबारियों का पैसा आया.
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सुरेश कलमाड़ी
कांग्रेस पार्टी के प्रमुख राजनीतिज्ञ के अलावा सुरेश कलमाड़ी देश के प्रमुख खेल अधिकारी भी रहे हैं. उनका नाम भारत में कॉमनवेल्थ कराने से जुड़ा है तो उसके आयोजन में हजारों करोड़ के घोटाले के साथ भी. कलमाड़ी और उनके सहयोगियों को धांधली के आरोप में गिरफ्तार किया गया. इस समय मामला अदालत में है.
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मधु कौड़ा
गरीब आदिवासी परिवार से आए झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कौड़ा राजनीति की वजह से कोरड़पति बन गए. उनकी दिलचस्पी सिर्फ अपने प्रांत में होने वाले खनन में ही नहीं थी बल्कि अफ्रीकी देशों में भी. उनपर 4000 करोड़ की संपत्ति रखने का आरोप लगा, जो प्रांत के बजट का एक चौथाई था. इस समय वे जमानत पर हैं.
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पीवी नरसिंह राव
भ्रष्टाचार के आरोप तो प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर भी लगे लेकिन नरसिंह राव भारत के पहले प्रधानमंत्री थे जिनपर पद पर रहते हुए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए गए जिसमें उन्हें सहअभियुक्त बनाया गया था.
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा "आप यह नहीं बोल सकते कि मेरा कोई बेटा या बेटी है. आप कोई जमानत नहीं मांग सकते. आप निचली अदालतों से मिली सजा को चुनौती जरुर दे सकते हैं. उसकी सुनवाई हम कर सकते हैं और इस पर फैसला भी दे सकते हैं. लेकिन आपको अंतरिम जमानत की अनुमति नहीं होगी क्योंकि निचली अदालत ने आपको सजा दी है और इस सजा को उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है. अगर आप बिना सोचे समझे लोगों को मार सकते हैं तो उसके लिए आपको कोई जमानत नहीं दी जा सकती.”
नौशाद की सजा को उम्रकैद से मौत में बदलने के लिए सीबीआई की अपील न्यायालय में पहले से ही लंबित है.