जर्मन पुलिस की एक नई टुकड़ी भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगी. इसका नाम बीएफई प्लस है जो सबूत इकट्ठा करने और गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार होगी और आतंकी हमले की स्थिति में जीएसजी 9 की मदद करेगी.
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जर्मनी के गृह मंत्री थोमस डे मेजियेर ने कहा है कि आतंकवाद विरोधी इकाई का गठन पेरिस पर हुए हमले से सबक लेकर किया गया है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जर्मनी पर आतंकी हमलों का खतरा बना रहेगा, "सुरक्षा अधिकारियों को इसके लिए तैयार रहना होगा." बीएफई प्लस संघीय पुलिस की मदद करेगा और विशेष टुकड़ी जीएसजी 9 को बंधक छुड़ाने जैसे कामों के लिए खाली रखेगा.संघीय पुलिस के मुख्यालय ब्लूमबर्ग में 50 पुलिसकर्मियों ने काम करना शुरू कर दिया है. अगले साल और 250 कमांडो की भर्ती होगी जो जर्मनी के विभिन्न ठिकानों पर तैनात होंगे.
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सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पहले आतंकी हमले समय और इलाके के हिसाब से सीमित होते थे, लेकिन पिछले दिनों में समन्वित आतंकी कार्रवाइयों के मामले बढ़े हैं, जिसमें हमलावर बम हमलों, गोली चलाने और बंधक बनाने जैसी घटनाओं को एक साथ जोड़ रहे हैं. ये कई दिनों तक चलते रह सकते हैं और पूरे के पूरे शहर को जाम कर सकते हैं. अन्य मामलों में बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बनाया गया है. पेरिस में 13 नवंबर को हुए हमले और जनवरी में चार्ली एब्दो के दफ्तर पर हुए हमले इसकी मिसाल हैं. 2008 में मुंबई में इस्लामी कट्टरपंथियों ने होटल, कैफे, रेलवे स्टेशन और यहूदी प्रार्थनागृह को एक साथ निशाना बनाया था. 60 घंटे तक चले हमलों में 166 लोग मारे गए थे. इससे पहले मॉस्को के एक थिएटर और बेसलान के स्कूल पर भी आतंकी हमले हुए थे.
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आतंकवाद विरोधी पुलिस के लिए सवाल यह है कि क्या उनकी टुकड़ी इस तरह के लंबे समय तक चलने वाले हमलों का मुकाबला करने के लिए तैयार है. जर्मनी में हर प्रांत की पुलिस की विशेष कमांडो टुकड़ी और संघीय पुलिस की कमांडो टुकड़ी जीएसजी 9 है, जिनकी इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने की ट्रेनिंग है. इसके अलावा पुलिस की टुकड़ियां इस तरह की घटनाओं का अभ्यास भी कर रही है. 2012 में श्लेस्विष होलश्टाइन की पुलिस ने 800 कमांडो के साथ एक पार्क में बंधक कांड का अभ्यास किया था. लेकिन मौजूदा पुलिस टुकड़ियों की सीमाएं हैं, क्योंकि उन्हें संगठित अपराध के खिलाफ भी कार्रवाई करनी होती है.
इसलिए जर्मन सरकार ने देश भर में उपलब्ध त्वरित तैनाती दस्ता तैयार करने का फैसला किया. बीएफई की इकाइयां प्रांतीय पुलिस के पास भी हैं और वे पुलिस की ऐसी विशेष रूप से प्रशिक्षित टुकड़ियां हैं जो ऐसे खतरनाक मामलों को देखती है जिसके लिए और प्रशिक्षित विशेष टुकड़ी या जीएसजी 9 को बुलाने की जरूरत नहीं है. विशेष साज सामानों से लैस ये कमांडो खतरनाक अपराधियों की गिरफ्तारी में अपने सहकर्मियों की मदद करते हैं. इसके अलावा उन्हें दंगों और छापामारी के दौरान भी तैनात किया जाता है. अब उनमें से कुछ को आतंकवादी हमलों के दौरान तैनाती के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा.
एमजे/एसएफ (डीपीए, एएफपी)
आतंकी हमलों की जद में देश
विजन ऑफ ह्यूमैनिटी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 2000 से अब तक आतंकवाद के कारण होने वाली मौतों की संख्या पांच गुना बढ़ी है. दुनिया के कौन से देश आतंकी घटनाओं के सबसे ज्यादा शिकार हैं, एक नजर...
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1. इराक
साल 2014 के आंकड़ों पर आधारित ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के मुताबिक इराक आतंकी गतिविधियों में सबसे आगे हैं. 2014 में इराक में 3370 आतंकी हमले हुए जिनमें करीब 10,000 लोग मारे गए और 15,000 के करीब घायल हुए.
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2. अफगानिस्तान
दूसरे स्थान पर है अफगानिस्तान. 2014 में अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमलों में 4500 लोग मारे गए और 4700 जख्मी हुए. अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों के हटाए जाने के बाद भी वहां तालिबान का साया बरकरार है. बीते दिनों कुंदुस में हुए हमलों में बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए.
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3. नाइजीरिया
नाइजीरिया में आतंकवादी समूह बोको हराम के 662 हमलों में 7512 लोग मारे गए. इन हमलों में 22,000 लोग घायल हुए. विजन ऑफ ह्यूमैनिटी की रिपोर्ट के मुताबिक बोको हराम के हमलों में मारे जाने वाले 77 फीसदी लोग निहत्थे नागरिक थे.
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4. पाकिस्तान
पाकिस्तान में 2014 में आतंकवाद संबंधी 1821 घटनाएं हुईं. इनमें 1760 लोग मारे गए और 2836 घायल हुए. पाकिस्तान में कई आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं लेकिन प्रमुख है तहरीक ए तालिबान. पेशावर में स्कूल पर हुए हमले की जिम्मेदारी भी इसी ने ली थी जिसमें 132 स्कूली छात्र मारे गए.
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5. सीरिया
सीरिया में आतंकवाद और गृह युद्ध के शिकार लोगों के बीच अंतर करना आसान नहीं है. विजन ऑफ ह्यूमैनिटी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया में 2014 में 232 आतंकवादी हमले हुए जिनमें मुख्य हाथ इस्लामिक स्टेट और अल नुसरा मोर्चे का था.
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6. भारत
2008 के मुंबई हमले के बाद ऐसा माना जाता है कि भारत में कोई बड़ी आतंकवादी घटना नहीं हुई, लेकिन विजन ऑफ ह्यूमैनिटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में भारत में 763 आतंकी घटनाएं हुईं जिनमें 416 लोग मारे गए. इनमें ज्यादातर साम्यवादियों, इस्लामी कट्टरपंथियों और अलगाववादियों का हाथ था. पिछले साल माओवादियों ने हमला कर पुलिस और सुरक्षा बल के 22 जवानों की हत्या कर दी.
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7. यमन
कुल 512 आतंकी हमलों के साथ 2014 यमन के लिए एक बुरा साल रहा. इन घटनाओं में 654 लोग मारे गए. यमन में इन हमलों के लिए अल कायदा और हूथी विद्रोही जिम्मेदार हैं. यमन में अल कायदा एकमात्र ऐसा संगठन है जो आत्मघाती हमले करता है.
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8. सोमालिया
2014 सोमालिया के लिए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे ज्यादा खूनखराबे वाला साल था. 469 आतंकी घटनाओं में करीब 800 लोग मारे गए. अफ्रीकी देश में अल शबाब आतंकवादी समूह सबसे बड़ा खतरा है.
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9. लीबिया
लीबिया में 2014 में आतंकी गतिविधियों में अचानक 225 फीसदी तेजी आई. 554 आतंकी हमलों में 429 लोगों ने जान गंवा दी. लीबिया में कई आतंकी समूह सक्रिय हैं जिनमें एक इस्लामिक स्टेट भी है.
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10. थाईलैंड
2014 में थाईलैंड में 336 आतंकी घटनाएं हुईं जिनमें 156 लोग मारे गए. ज्यादातर घटनाएं दक्षिणी इलाकों में हुईं जहां मलय मुसलमानों का सरकारी बलों के खिलाफ संघर्ष जारी है. थाईलैंड में होने वाले 60 फीसदी आतंकी हमले बम धमाकों के रूप में हुए.