आज का दिन भारत के इतिहास में ब्लैक फ्राइडे के रूप में जाना जाता है. 1993 में इस दिन मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोग मारे गए और करीब 800 जख्मी हुए.
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ये धमाके दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बदले के रूप में सामने आए. बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के बाद फैले इन दंगों में करीब 2000 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग बेघर भी हुए. हमलों की साजिश सोने के तस्कर और गैंगस्टर टाइगर मेमन ने रची थी. मेमन ने इस काम को दाऊद इब्राहीम की मदद से अंजाम दिया था.
पहला धमाका बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग के सामने हुआ और उसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में 12 धमाके हुए. अभी मुंबई सांप्रदायिक दंगों की तकलीफ से उबर भी नहीं पाया था कि इन धमाकों ने भीड़भाड़ भरे मुंबई शहर को हिला कर रख दिया.
इस मामले में सैकड़ों गिरफ्तारियां हुई और विशेष टाडा कोर्ट में मामले की चार्जशीट दाखिल की गई. 2007 में विशेष अदालत ने इस मुकदमे में 100 आरोपियों को सजा दी. टाइगर मेमन और उनके भाई याकूब मेमन समेत 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई. 20 को उम्रकैद और 67 को 3 से 14 साल तक की सजा सुनाई गई. अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में टाइगर और याकूब की मौत की सजा को बरकरार रखते हुए बाकी दस की सजा को उम्र कैद में बदल दिया.
दाऊद इब्राहीम और टाइगर मेमन को आज तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. माना जाता है कि वे पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं. भारत सरकार कई बार पाकिस्तान को इनके खिलाफ सबूत देकर भारत को उन्हें सौंपे जाने की मांग कर चुकी है लेकिन पाकिस्तान ने अब तक इस मामले में सकारात्मक संकेत नहीं दिया है.
1993 मुंबई ब्लास्ट में तब से अब तक
12 मार्च 1993 को मुंबई में 12 जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिसमें 257 लोग मारे गये थे और 713 लोग घायल हुए थे. पढ़िए कि इस मामले में कब क्या हुआ था?
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जब दहली मुंबई
पहला धमाका स्टॉक एक्सचेंज में हुआ था जिसमें 50 लोग मारे गये थे. आधे घंटे के भीतर ही 13 धमाके हुए. यह दुनिया भर में सीरियल बम विस्फोटों का पहला मामला था.
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अब तक फरार
इन धमाकों के मुख्य अभियुक्त माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. पुलिस के अनुसार धमाके भारत से बाहर रहने वाले दाऊद ने कराये थे.
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10 हजार पन्ने की चार्जशीट
नवंबर 1993 में 189 लोगों के खिलाफ 10,000 पन्ने की प्राथमिक चार्जशीट दायर की गई थी और यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया.
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पहली सुनवाई
अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई आरंभ हुई थी. अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किये गये.
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कुछ को सजा कुछ बरी
सितंबर 2006 में अदालत ने फैसला सुनाना शुरू किया. मामले में 123 अभियुक्त हैं जिनमें से 12 को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई. 20 लोगों को उम्रकैद और 68 लोगों को उससे कम की सजा सुनाई गई. 23 लोग निर्दोष पाये गये.
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संजय दत्त ने भी काटी सजा
नवंबर 2006 में संजय दत्त को अवैध रूप से पिस्तौल और एके-56 राइफल रखने का दोषी पाया गया. संजय दत्त को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 18 महीने जेल में बिताने पड़े.
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धमाके के दोषी
साल 2006 में मुंबई की अदालत ने जिन लोगों को धमाकों का दोषी पाया उनमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी थे. याकूब मेमन, यूसुफ मेमन, इसा मेमन और रुबिना मेमन को साजिश और आंतकवाद को बढ़ावा देने का दोषी पाया गया.
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याकूब मेमन को फांसी
धमाकों के वांटेड टाइगर मेमन के भाई याकूब मेमन को इसी फैसले में सजा सुनाई गई थी. याकूब मेमन को 30 जुलाई 2015 को महाराष्ट्र के यरवडा जेल में फांसी दे दी गई.
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बाबरी का बदला?
इन धमाकों के मकसद के बारे में कहा गया था कि यह उन मुसलमानों की मौत का बदला लेने के लिए किये गये थे जो बाबरी मस्जिद को गिराये जाने के बाद मुम्बई में हुए दंगों में मारे गए थे.