दक्षिणपंथी तानाशाह फुल्गेन्सियो बातिस्ता के खिलाफ छापामार अभियान चला कर और उन्हें सत्ता से बेदखल करने के बाद 16 फरवरी 1959 को कास्त्रो प्रधानमंत्री बने. क्यूबा की क्रांति अधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1953 को शुरू हुई. अमेरिकी समर्थन वाले तानाशाह बातिस्ता तख्ता पलट के बाद सत्तासीन हुए थे. उस समय कास्त्रो को बहुत कम लोग जानते थे. युवा वकील जो तानाशाह के खिलाफ 1952 के चुनाव में खड़े तो हुए लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. क्यूबा के लोग वोट कर पाते इससे पहले ही वोटिंग खत्म कर दी गई.
क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो ने 90 साल की उम्र में 25 नवंबर 2016 को दुनिया को अलविदा कह दिया. एक नजर उनके जीवन पर.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/E. MAstrascusaफिदेल कास्त्रो का नाम उन बड़े नेताओं में शामिल है, जिनके लिए इतिहास में 20वीं सदी को जाना जाएगा.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/E. MAstrascusaकास्त्रो ने लगभग पचास साल तक क्यूबा पर एकछत्र राज किया. उनके समर्थक जहां समाजवाद को बढ़ावा देने के लिए उनकी प्रशंसा करते हैं, वहीं विरोधियों का कहना है कि उन्होंने अपने आलोचकों का उत्पीड़न और शोषण किया.
तस्वीर: Getty Images/Keystoneअमेरिका के मियामी में रहने वाले क्यूबा मूल के बहुत से लोगों ने फिदेल कास्त्रो की मौत पर जश्न मनाया. मियामी को लिटिल हवाना कहा जाता है.
तस्वीर: picture alliance/dpa/G. De Cardenasकास्त्रो का पूरा नाम फिदेल अलेयांद्रो कास्त्रो रूज था और उनका जन्म 13 अगस्त 1926 को हुआ था. उनके पिता एंजेल मारिया बाउतिस्ता कास्त्रो ई एरगिज एक अमीर किसान थे जो स्पेन से क्यूबा में जाकर बसे थे.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/E. Felixफिदेल जन्म के समय अपने पिता की नाजायज संतान थे. उनकी मां लिना रुज गोंजालेज फिदेल कास्त्रो के पिता के फार्म पर नौकरी करती थीं. दोनों की दोस्ती हो गई. फिदेल के जन्म के बाद दोनों ने शादी कर ली.
तस्वीर: picture alliance /AP Photo/A. St. Georgeकास्त्रो पढ़ाई में ज्यादा अच्छे नहीं थे, उनका मन खेलकूद में ज्यादा लगता था. हवाना यूनिवर्सिटी में पढ़ते हुए 1940 में कास्त्रो एक राजनीतिक कार्यकर्ता बन गए थे. वह गजब के वक्ता थे.
तस्वीर: picture-alliance/ZUMAPRESS.comउनके निशाने पर होती थी क्यूबा की सरकार, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति रोमोन ग्राउ कर रहे थे. उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के बहुत आरोप थे.
तस्वीर: Getty Images/AFP/N. Duarteफिदेल कास्त्रो मानते थे कि क्यूबा की आर्थिक समस्याओं की वजह बेतहाशा पूंजीवाद है और इसका हल सिर्फ एक जनक्रांति है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/Y. Lage1952 में फुलजेंसियो बातिस्ता ने सैन्य तख्तापलट में क्यूबा के राष्ट्रपति कारलोस प्रियो को सत्ता से बाहर कर दिया. लेकिन अमेरिका से उनकी नजदीकी और समाजवादी संगठनों पर कार्रवाई ने कास्त्रो की बुनियादी राजनीतिक सोच पर चोट की.
तस्वीर: Getty Images/AFP/STFकानूनी रूप से लड़ाई में नाकाम रहने के बाद कास्त्रो ने द मूवमेंट नाम से एक संगठन बनाया ताकि भूमिगत रह कर बातिस्ता सरकार को उखाड़ा जा सके.
तस्वीर: picture alliance/AP Photo/F. Lezcanoकास्त्रो ने जुलाई 1953 में सेंटियागो के पास मोनकाडा आर्मी बैरकों से हथियार लूटने की योजना बनाई. लेकिन हमला नाकाम रहा. बहुत से क्रांतिकारी मारे गए. कास्त्रो को जेल हुई. हालांकि 15 साल की सजा के बावजूद उन्हें सिर्फ 19 महीने ही जेल में काटने पड़े क्योंकि कैदियों को आम माफी के दौरान उन्हें भी रिहा कर दिया गया.
विरोधियों के खिलाफ बातिस्ता की कार्रवाई से बचने के लिए कास्त्रो मैक्सिको चले गए जहां उनकी मुलाकात एर्नेस्टो चे गुएरा नाम के एक युवा क्रांतिकारी से हुई.
तस्वीर: AFP/Getty Images1956 में कास्त्रो 81 सशस्त्र साथियों के साथ क्यूबा लौटे. उन्होंने सिएरा माइस्त्रा की पहाड़ियों में शरण ली और दो साल तक सरकार के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध चलाते रहे.
तस्वीर: picture-alliance/dpa2 जनवरी 1959 को विद्रोही सेना क्यूबा की राजधानी में दाखिल हुई और बातिस्ता को भागना पड़ा.
तस्वीर: Getty Images/AFP/OFFनई सरकार में राउल कास्त्रो को प्रधानमंत्री का पद मिला. सरकार ने लोगों को उनकी जमीनें वापस देने और गरीबों के लिए हितों के काम करने का वादा किया.
तस्वीर: Getty Images/Keystoneलेकिन देश में एक पार्टी वाला शासन लागू किया गया. हजारों लोगों को जेल भेजा गया जबकि कुछ लोग लेबर कैंपों में भेजे गए. मध्य वर्ग के हजारों लोगों ने क्यूबा छोड़ दिया.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/A. Ernestoबताते हैं कि अमेरिका ने कई बार कास्त्रो की हत्या की साजिश रची और उनकी सरकार को गिराने की कोशिश भी की गई. लेकिन उन्हें हर बार नाकामी हाथ लगी.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/R. Moreकास्त्रो 2008 में बिगड़ती तबियत के कारण राष्ट्रपति पद से हट गए. उनके छोटे भाई राउल कास्त्रो ने देश की बागडोर संभाली.
तस्वीर: Getty Images/AFP/I. Franciscoअब क्यूबा की सरकार के साथ अमेरिका के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं. लेकिन एक पीढ़ी के लिए कास्त्रो का मतलब क्यूबा था और कास्त्रो का मतलब क्यूबा.
तस्वीर: picture-alliance/dpaकास्त्रो ने करीब 130 लोगों का साथ जुटाया और सैन डियागो डे क्यूबा में मोनकाडा सैनिक छावनियों को अपने हाथों में लेने की कोशिश की और वहां रखे हथियारों को हथियाने की भी. उन्हें उम्मीद थी कि इस बैरक के 400 सैनिक एक दिन पहले के सेंट जेम्स उत्सव के बाद थके हुए होंगे या फिर वहां नहीं होंगे. लेकिन यह योजना विफल हो गई और कई क्रांतिकारियों को फांसी दे दी गई जबकि बाकी पर मुकदमा चला. कास्त्रो को भी गिरफ्तार किया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया. कास्त्रो पर सरकार को उखाड़ फेंकने का आरोप लगा. कास्त्रो ने सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि वह और उनके विद्रोही क्यूबा में लोकतंत्र बहाली के लिए लड़ाई लड़ रहे थे. लेकिन उनकी यह दलील नहीं मानी गई.
कास्त्रो को 15 साल की सजा हुई. दो साल बाद बातिस्ता अपनी ताकत को लेकर इतना आश्वस्त हुए कि उन्होंने सभी नेताओं को माफी दे दी. इसके बाद कास्त्रो अपने भाई राउल कास्त्रो के साथ मेक्सिको चले गए और वहां चे ग्वेरा के साथ मिलकर 26 जुलाई की क्रांति की शुरुआत की. बातिस्ता के खिलाफ क्यूबा में अंसतोष बढ़ता चला गया. 2 दिसंबर 1956 को कास्त्रो क्यूबा के तट पर हथियार से लैस 81 लोगों के साथ पहुंचे. कास्त्रो, राउल और चे ग्वेरा समेत नौ लोग बच गए और बाकी या तो मारे गए या पकड़े गए. गुरिल्ला लड़ाई में बातिस्ता की सेना कमजोर होती गई. 1958 के मध्य तक कास्त्रो के लिए क्यूबा में समर्थन बढ़ता गया.
अमेरिका ने भी बातिस्ता को सैन्य मदद रोक दी. इसके बाद कास्त्रो के सहयोगी चे ग्वेरा ने दिसंबर 1958 में सांता क्लारा पर हमला कर दिया. एक जनवरी 1959 को बातिस्ता अपनी कमजोर होती सेना को देख डॉमिनिक गणराज्य भाग गए. उस वक्त कास्त्रो के पास एक हजार से भी कम जवान थे. बावजूद इसके कास्त्रो ने क्यूबा सरकार के 30,000 सैनिकों की कमान संभाल ली. अन्य विरोधी नेताओं के पास लोकप्रियता और समर्थन की कमी होने का लाभ कास्त्रो को मिला. 16 फरवरी 1959 को फिडेल कास्त्रो ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इसके बाद लगभग आधी सदी तक वह क्यूबा के प्रमुख बने रहे.
हर चीज को अपने मुताबिक करवाने की सनक, ताकत और अतिमहत्वाकांक्षा का मिश्रण धरती को नर्क बना सकता है. एक नजर ऐसे तानाशाहों पर जिनकी सनक ने लाखों लोगों की जान ली.
तस्वीर: Getty Images/H.Hoffmannआधुनिक चीन की नींव रखने वाले माओ त्से तुंग के हाथ अपने ही लोगों के खून से रंगे थे. 1958 में सोवियत संघ का आर्थिक मॉडल चुराकर माओ ने विकास का नारा दिया. माओ की सनक ने 4.5 करोड़ लोगों की जान ली. 10 साल बाद माओ ने सांस्कृतिक क्रांति का नारा दिया और फिर 3 करोड़ लोगों की जान ली.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photoजर्मनी के नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर के अपराधों की लिस्ट बहुत ही लंबी है. हिटलर ने 1.1 करोड़ लोगों की हत्या का आदेश दिया. उनमें से 60 लाख यहूदी थे. उसने दुनिया को दूसरे विश्वयुद्ध में भी धकेला. लड़ाई में 7 करोड़ जानें गई. युद्ध के अंत में पकड़े जाने के डर से हिटलर ने खुदकुशी कर ली.
तस्वीर: Getty Images/H.Hoffmannसोवियत संघ के संस्थापकों में से एक व्लादिमीर लेनिन के मुताबिक जोसेफ स्टालिन रुखे स्वभाव का शख्स था. लेनिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सोवियत संघ की कमान संभालने वाले स्टालिन ने जर्मनी को हराकर दूसरे विश्वयुद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई. लेकिन स्टालिन ने अपने हर विरोधी को मौत के घाट भी उतारा. स्टालिन के 31 साल के राज में 2 करोड़ लोग मारे गए.
तस्वीर: picture-alliance/akg-imagesकंबोडिया में खमेर रूज आंदोलन के नेता पोल पॉट ने सत्ता में आने के बाद चार साल के भीतर 10 लाख लोगों को मौत के मुंह में धकेला. ज्यादातर पीड़ित श्रम शिविरों में भूख से या जेल में यातनाओं के चलते मारे गए. हजारों की हत्या की गई. 1998 तक कंबोडिया के जंगलों में पोल पॉट के गुरिल्ला मौजूद थे.
तस्वीर: picture alliance/United Archives/WHAइराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन की कुर्द समुदाय के प्रति नफरत किसी से छुपी नहीं थी. 1979 से 2003 के बीच इराक में 3,00,000 कुर्द मारे गए. सद्दाम पर रासायनिक हथियारों का प्रयोग करने के आरोप भी लगे. इराक पर अमेरिकी हमले के बाद सद्दाम हुसैन को पकड़ा गया और 2006 में फांसी दी गई.
तस्वीर: picture-alliance/dpaसात साल तक युगांडा की सत्ता संभालने वाले ईदी अमीन ने 2,50,000 से ज्यादा लोगों को मरवाया. ईदी अमीन ने नस्ली सफाये, हत्याओं और यातनाओं का दौर चलाया. यही वजह है कि ईदी अमीन को युगांडा का बूचड़ भी कहा जाता है. पद छोड़ने के बाद ईदी अमीन भागकर सऊदी अरब गया. वहां मौत तक उसने विलासिता भरी जिंदगी जी.
तस्वीर: Getty Imagesइथियोपिया के कम्युनिस्ट तानाशाह से अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ लाल आतंक अभियान छेड़ा. 1977 से 1978 के बीच ही उसने करीब 5,00,000 लाख लोगों की हत्या करवाई. 2006 में इथियोपिया ने उसे जनसंहार का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई. मरियम भागकर जिम्बाब्वे चला गया.
तस्वीर: picture alliance/dpaइन सभी तानाशाहों में सिर्फ किम जोंग इल ही ऐसे हैं जिन्हे लाखों लोगों को मारने के बाद भी उत्तर कोरिया में भगवान सा माना जाता है. इल के कार्यकाल में 25 लाख लोग गरीबी और कुपोषण से मारे गए. इल ने लोगों पर ध्यान देने के बजाए सिर्फ सेना को चमकाया.
तस्वीर: dapdमुअम्मर गद्दाफी ने 40 साल से ज्यादा समय तक लीबिया का शासन चलाया. तख्तापलट कर सत्ता प्राप्त करने वाले गद्दाफी के तानाशाही के किस्से मशहूर हैं. गद्दाफी पर हजारों लोगों को मौत के घाट उतारने और सैकड़ों औरतों से बलात्कार और यौन शोषण के आरोप हैं. 2011 में लीबिया में गद्दाफी के विरोध में चले लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों में गद्दाफी की मौत हो गई.
तस्वीर: Getty Images/AFP/C. Simon1957 में हैती की कमान संभालने वाला डुवेलियर भी एक क्रूर तानाशाह था. डुवेलियर ने अपने हजारों विरोधियों को मरवा दिया. वो अपने विरोधियों को काले जादू से मारने का दावा करता था. हैती में उसे पापा डुवेलियर के नाम से जाना जाता था. 1971 में उसकी मौत हो गई. फिर डुवेलियर का बेटा भी हैती का तानाशाह बना.
तस्वीर: picture-alliance / United Archives/TopFoto