अर्थव्यवस्था के मामले में दुनिया के कुछ सबसे तेजी से भाग रहे देशों में भारत शामिल है. इस रफ्तार का बीज आज ही के दिन 1991 में बोया गया था.
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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का जनक माना जाता है. 1991 में जब नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने तो उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत डावांडोल थी और भारत दिवालियेपन की कगार पर था. तब मनमोहन सिंह कैबिनेट में वित्त मंत्री के रूप में शामिल किए गए थे.
आज ही के दिन 1991 में मनमोहन सिंह ने संसद में बजट पेश किया जिसने भारत के लिए आर्थिक उदारीकरण के रास्ते खोले. इस प्रस्ताव में विदेश व्यापार उदारीकरण, वित्तीय उदारीकरण, कर सुधार और विदेशी निवेश का रास्ते को खोलने का सुझाव शामिल था. इसका नतीजा यह हुआ कि सकल घरेलू उत्पाद की औसत वृद्धि दर (फैक्टर लागत पर) जो 1951 से 91 के दौरान 4.34 प्रतिशत थी 1991 से 2011 के दौरान 6.24 प्रतिशत के रूप में बढ़ी.
10 भारतीय चीजें जिनसे दुनिया को है प्यार
भारत दूसरी सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है. लोकतांत्रिक भारत तेज आर्थिक विकास की राह पर है. अर्थव्यवस्था में दिलचस्पी के अलावा उसे ताज महल, बॉलीवुड और योग के लिए जाना जाता है.
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विविध संस्कृति
विदेशियों में भारत की विविध और रंगीन संस्कृति के बारे में जानने की काफी जिज्ञासा रहती है. यहां के नृत्य, पारंपरिक पोशाकें, गहने और त्योहार हमेशा उनका ध्यान खींचते हैं. भारतीय संस्कृति की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जर्मनी के कई शहरों में धूमधाम से रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है.
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आईटी
सूचना प्रौद्योगिकी या आईटी के क्षेत्र में सारी दुनिया में भारत के इंजीनियरों ने अपना लोहा मनवाया है. दुनिया के लगभग हर देश में भारतीय आईटी कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही हैं. भारत के इंजीनियर पूरे विश्व में इतना फैल गए हैं कि विदेशों में हर भारतीय पेशेवर को पहले आईटी इंजीनियर ही समझ लिया जाता है.
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ताज महल
शाहजहां द्वारा निर्मित मोहब्बत की यह नायाब निशानी आज भी विदेशियों के बीच सबसे लोकप्रिय भारतीय पर्यटन स्थल है. शायद विदेशों में रहने वाले कुछ ही भारतीय या प्रवासी भारतीय होंगे जिससे किसी विदेशी ने ताज महल का जिक्र ना किया हो.
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रॉयल बंगाल टाइगर
ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय बाघों की दहाड़ पूरे विश्व में गूंजती है. दुनिया भर से पर्यटक इस शाही जानवर की एक झलक पाने के लिए भारत जाते हैं. दुनिया भर के करीब 60 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं.
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भव्य शादियां
भारत की शादियां अपनी भव्यता के कारण "द बिग फैट इंडियन वेडिंग" के नाम से मशहूर हैं. लंबे चौड़े रिवाजों और मेहमानों की भीड़ के कारण भारतीय शादियां हमेशा से पश्चिमी देशों में आकर्षण का केंद्र रही हैं. पश्चिमी देशों की शादियों में तड़क-भड़क कम होती है और उनमें कुछ खास रिश्तेदार व मित्र ही आमंत्रित होते हैं.
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मसालेदार जायके
सादा भोजन करने वाले विदेशियों को भारत के मसालेदार व्यंजन काफी पसंद आते हैं. आप विश्व के लगभग हर बड़े शहर में कोई ना कोई भारतीय रेस्तरां जरूर पाएंगे. भारतीय व्यंजनों की लोकप्रियता का अनुमान इससे भी लगा सकते हैं कि मात्र 3 लाख आबादी वाले जर्मनी के बॉन शहर में 7 दक्षिण एशियाई रेस्तरां हैं.
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बॉलीवुड
कई देशों में आज बॉलीवुड भारत की पहचान बन चुका है. तड़क-भड़क और मनोरंजन से भरपूर बॉलीवुड संगीत एवं नृत्य की दीवानगी पश्चिमी देशों में लगातार बढ़ रही है. और शायद इसी वजह से शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान की फिल्में विदेशों में भी करोड़ों का कारोबार करती हैं.
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क्रिकेट फीवर
भारतवासियों की क्रिकेट के लिए दीवानगी जगजाहिर है. जर्मनी में फुटबॉल बहुत लोकप्रिय है और लोग क्रिकेट को समझ नहीं पाते हैं लेकिन उन्हें भी पता है कि भारत में लोग क्रिकेट को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान मानते हैं.
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योग
भारत की विश्व को एक महत्वपूर्ण देन है योग. विगत कुछ सालों में विदेशों में इस प्राचीन जीवन पद्धति की लोकप्रियता और भी बढ़ी हैं. 21 जून को पूरे विश्व ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है. मेग रायन, मडोना और रिकी मार्टिन जैसी मशहूर हस्तियां नियमित योग करती हैं.
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चाय
दुनिया भर में भारतीय चाय चाव से पी जाती है. उसकी लोकप्रियता का हिसाब आप इससे लगा सकते हैं कि भारत विश्व के सबसे बड़े चाय निर्यातकों में से एक है. खासकर दार्जिलिंग चाय की गिनती दुनिया के सबसे लोकप्रिय चायों में होती है.
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वित्त मंत्री बनने से पहले मनमोहन सिंह भारत के केंद्रीय बैंक- भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे और उनका नाम नोटों पर रहा करता था. 1996 में नरसिंह राव के सत्ता से जाते-जाते भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल पटरी पर आ गई बल्कि उसने गति भी पकड़नी शुरू कर दी. वाजपेयी सरकार ने इसे और गति दी, लेकिन 2004 में बीजेपी का भारत उदय नारा लोगों को रिझा न सका.
कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई और सरकार की कमान मनमोहन सिंह को सौंपी गई. पंडित नेहरू के बाद वह एकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में आए. हालांकि मनमनोहन के ही दूसरे कार्यकाल में अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती भी नजर आ रही है. बीते चार साल से विकास दर लगातार गिरती जा रही है.
रुपये के बारे में दिलचस्प बातें
भारत में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट यकायक बंद देने के सरकार के फैसले से सब हैरान हैं. वैसे ये पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह नोट बंद किए हैं. चलिए जानते हैं रुपये के बारे में कुछ दिलचस्प बातें.
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क्या आप जानते हैं कि भारत में कभी पांच हजार और दस हजार रुपये के नोट भी चलते थे? ये नोट 1954 से 1978 के बीच चलन में थे. यहां जो आप देख रहे हैं वह नया नोट है, लेकिन अब यह भी इतिहास का हिस्सा है.
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जब विभाजन हुआ तो शुरू में पाकिस्तान में भारत सरकार की मुहर वाले ही नोट चले. जब पाकिस्तान ने अपने नोट छाप लिए. तब भारतीय नोटों का चलन वहां बंद हुआ.
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एक रुपये के नोट को छोड़ कर बाकी सभी नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं. एक रुपये के नोट पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं.
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रुपया भारत के अलावा ओमान, कुवैत, बहरीन, कीनिया, युगांडा, सेशेल्स और मॉरिशस जैसे कई देशों की मुद्रा का नाम रहा है. बाद में इनमें से कई देशों ने दूसरी मुद्रा अपना ली.
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बताते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब भारत का पांच रुपये का सिक्का बांग्लादेश तस्करी करके ले जाया जाता था और वहां उसका रेजर बनता था.
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रुपए का नया चिन्ह अगर आपको टाइप करना है तो इसके लिए कंट्रोल+शिफ्ट+$ को एक साथ दबाना होगा.
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दस रुपये के एक सिक्के को बनाने पर 6.10 रुपये की लागत आती है.
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भारत के अलावा नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान की मुद्रा का नाम भी रुपया ही है.
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नेपाल में भी पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद किए जा चुके हैं.
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हिंदी और अंग्रेजी को छोड़कर 15 अन्य भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल भी भारतीय रुपये पर किया जाता है.
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भारत में पांच सौ और दो हजार रुपये के नए नोट जारी किए जाएंगे, लेकिन ये वाला नोट तो अब इतिहास का हिस्सा बन गया है.