पाकिस्तान में तमाम कोशिशों के बावजूद आतंकवादी हमले रुकते नहीं दिख रहे हैं. लगता है कि हर तरह की सुरक्षा को भेद कर लोगों को निशाना बनाने का हुनर आतंकवादियों ने सीख लिया है.
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पाकिस्तान में बरसों से आंतकवादी हमले हो रहे हैं जिसमें आम लोग ही नहीं, बल्कि पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान भी मारे जा रहे हैं. आतंकवादी स्कूली बच्चों और धार्मिक स्थलों को भी नहीं बख्श रहे हैं. इन हमलों की सबसे बड़ी वजह तो पाकिस्तान में चरमपंथी गुटों की बड़ी तादाद है. इनमें से कुछ के खिलाफ सेना और सुरक्षा बल कार्रवाई भी कर रहे हैं.
दूसरा, जिस तरह का जटिल संबंध पाकिस्तानी राष्ट्र का चरमपंथियों से रहा है, वो भी इस हिंसा का एक कारण है. पाकिस्तानी सेना इनमें से कई गुटों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करती रही है. अफगानिस्तान में लगातार 30 साल से लड़ रहे चरमपंथी गुटों के साथ पाकिस्तान के रिश्ते किससे छिपे हैं. इतना ही नहीं, पाकिस्तान में आने वाली सरकारें भी लगातार कट्टरपंथियों का समर्थन हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाती रही हैं.
बीते दस साल पाकिस्तान पर किस कदर भारी रहे हैं, देखिए
पाकिस्तान: दहशत के दस साल
अफगानिस्तान पर 2001 में तालिबान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के बाद से पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हजारों लोगों की जान ली है. यहां तस्वीरों में पिछले एक दशक के कुछ प्रमुख कट्टरपंथी हमले.
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2017- शाहबाज कलंदर की मजार पर हमला
सिंध प्रांत के सेहवान में 16 फरवरी 2017 को एक सूफी संत शाहबाज कलंदर की मजार को निशाना बनाया जिसमें 70 से ज्यादा लोग मारे गए. आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने हमले की जिम्मेदारी ली है.
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2016 - क्वेटा पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज
24 अक्टूबर को क्वेटा के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज पर तीन आतंकवादियों ने हमला किया. इस हमले में 60 से ज्यादा कैडेटों की मौत हो गई. इस साल के सबसे भयानक हमलों में से एक में तीनों आत्मघाती हमलावरों को मार डाला गया.
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2016 - क्वेटा में अस्पताल पर हमला
आतंकवादियों ने 8 अगस्त 2016 को क्वेटा के सरकारी अस्पताल पर आत्मघाती हमला किया. फायरिंग और उसके बाद हुए आत्मघाती हमले में 70 लोग मारे गए. निशाना वकीलों को बनाया गया था जो अस्पताल में बार एसोसिएशन के प्रमुख बिलाल अनवर कासी की लाश के साथ आए थे. उन्हें अज्ञात लोगों ने गोली मार दी थी.
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2016 - लाहौर में पार्क पर हमला
27 मार्च 2016 को लाहौर में एक लोकप्रिय पार्क पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें 75 लोग मारे गए. हमला ईसाई समुदाय पर लक्षित था जो ईस्टर मना रहे थे. मृतकों में 14 लोगों की शिनाख्त ईसाइयों के रूप में हुई, बाकी मुसलमान थे. तहरीके तालिबान से जुड़े गुट जमात उल अहरार ने जिम्मेदारी ली.
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2015 - कराची में एक बस को बनाया निशाना
कराची में सफूरा गोठ में 8 बंदूकधारियों ने एक बस पर हमला किया. फायरिंग में 46 लोग मारे गए. मरने वाले सभी लोग इस्माइली शिया समुदाय के थे. प्रतिबंधित उग्रपंथी गुट जुंदलाह ने हमले की जिम्मेदारी ली. हमले की जगह इस्लामिक स्टेट को समर्थन देने वाली पर्चियां भी मिली.
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2014 - पेशावर में बच्चों पर क्रूर हमला
16 दिसंबर 2014 को तहरीके तालिबान से जुड़े 7 बंदूकधारियों ने पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला किया. आतंकियों ने बच्चों और स्टाफ पर गोलियां चलाईं और 154 लोगों को मार दिया. उनमें 132 बच्चे थे. यह पाकिस्तान में होने वाला अब तक का सबसे खूनी आतंकी हमला था.
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2013 - पेशावर में चर्च पर हमला
पेशावर में 22 सितंबर 2013 को ऑल सेंट चर्च पर हमला हुआ. यह देश के ईसाई अल्पसंख्यकों पर सबसे बड़ा हमला था. इस हमले में 82 लोग मारे गए. हमले की जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान से जुड़े एक इस्लामी कट्टरपंथी गुट जुंदलाह ने ली.
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2011 - चारसद्दा में पुलिस पर हमला
13 मई 2011 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चारसद्दा जिले में शाबकदर किले पर दोहरा हमला हुआ. दो आत्मघाती हमलावरों ने एक पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के बाहर दस दिन की छुट्टी के लिए बस पर सवार होते कैडेटों पर हमला किया और 98 लोगों की जान ले ली. कम से कम 140 लोग घायल हो गए.
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2010 - कबायली इलाके पर दबिश
उत्तर पश्चिम के मोहमंद जिले में एक आत्मघाती हमलावर ने व्यस्त बाजार पर हमला किया और 105 लोगों की जान ले ली. केंद्र शासित कबायली इलाके में ये हमला 9 जुलाई को हुआ. माना जाता है कि हमले का लक्ष्य कबायली सरदारों की एक मीटिंग थी. जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने ली.
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2010 - लाहौर नरसंहार
मई 2010 के आतंकी हमले को लाहौर नरसंहार के नाम से भी जाना जाता है. 28 मई को जुम्मे की नमाज के दौरान अल्पसंख्यक अहमदिया संप्रदाय की दो मस्जिदों पर एक साथ हमले हुए. 82 लोग मारे गए. हमले की जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने ली.
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2010 - वॉलीबॉल मैच को बनाया निशाना
पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी जिले बन्नू के एक गांव में वॉलीबॉल मैच चल रहा था. आतंकवादियों ने इस मैच को भी शांति में नहीं होने दिया. उस पर कार में रखे बम की मदद से आत्मघाती हमला हुआ. हमले में 101 लोग मारे गए. खेल का मैदान कत्लेआम का गवाह बना.
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2009 - लाहौर का बाजार बना निशाना
दिसंबर 2009 में लाहौर के बाजार में दो बम धमाके किए गए और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर के भीड़ भरे बाजार में फायरिंग भी की गई. हमलों में कम से कम 66 लोग मारे गए. मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद महिलाओं की थी. इस हमले के साथ देश का प्राचीन शहर आतंकियों की जद में आ गया था.
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2009 - नया निशाना पेशावर
पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में बसे शहर पेशावर के मीना बाजार में एक कार बम का धमाका किया गया. इस धमाके में 125 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हो गए. पाकिस्तान की सरकार ने हमले के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया. लेकिन तालिबान और अल कायदा दोनों ने ही हमले में हाथ होने से इंकार किया.
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2008-राजधानी में लक्जरी होटल पर हमला
कट्टरपंथी आम लोगों पर हमले के तरह तरह के तरीके ईजाद कर रहे थे. एक ट्रक में विस्फोटक भर कर उन्होंने 20 सितंबर 2008 को राजधानी इस्लामाबाद के मैरियट होटल के सामने उसे उड़ा दिया. कम से कम 60 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हो गए. मरने वालों में 5 विदेशी नागरिक भी थे.
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2008-पाकिस्तान की हथियार फैक्टरी पर हमला
वाह में 21 अगस्त 2008 को पाकिस्तान की ऑर्डिनेंस फैक्टरी पर दोहरा आत्मघाती हमला किया गया. हमलों में कम से कम 64 लोग मारे गए. यह पाकिस्तानी सेना के इतिहास में उसके संस्थान पर हुआ अब तक का सबसे खूनी हमला है. तहरीके तालिबान पाकिस्तान के एक प्रवक्ता ने हमले की जिम्मेदारी ली.
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2007- बेनजीर की वापसी पर बम हमला
सैनिक तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने 2008 में चुनाव कराकर सत्ता के बंटवारे का रास्ता चुना था. दो बार प्रधानमंत्री रही बेनजीर भुट्टो चुनाव में भाग लेने निर्वासन से वापस लौटीं. करांची में उनके काफिले पर बम हमला हुआ. वे बाल बाल बची. लेकिन दो महीने बाद 27 दिसंबर को रावलपिंडी में भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया.
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पाकिस्तान में बहुत सारे चरमपंथी गुट पनप रहे हैं, जिनके अपने अपने मकसद हैं. इनमें से कुछ ने तो पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ युद्ध का एलान कर दिया है. तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और उससे टूटा ग्रुप जमात उल अहरार इन्हीं में शामिल हैं. उनका उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूदा सरकार को उखाड़ कर उसकी जगह देश भर में शरिया कानून लागू करना है. पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई से पड़े दबाव के कारण तहरीक ए तालिबान दर्जनों छोटे छोटे गुटों में बंट गया है और ये सब, छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन हमले कर रहे हैं.
वहीं लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे गुटों का ध्यान पाकिस्तान के पड़ोसी और प्रतिद्वंद्वी भारत से लड़ने पर है. उनका पाकिस्तान की सेना से कोई झगड़ा नहीं है, बल्कि कहते हैं कि उन्हें सैन्य अफसरों की तरफ से समर्थन मिलता है. ऐसे ज्यादातर गुट पाकिस्तान में आबादी से लिहाज से सबसे बड़े प्रांत पंजाब से अपनी गतिविधियां चलाते हैं.
दुनिया के सबसे खतरनाक देश, देखिए
सबसे खतरनाक देश
लेगाटम प्रोस्पैरिटी इंडेक्स 2015 ने ऐसे देशों की लिस्ट बनाई, जहां जीवन खतरनाक है. और ये 10 देश लिस्ट में टॉप पर हैं.
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नंबर 10, केन्या
सोमालियाई आतंकवादी संगठन अल शबाब ने चेतावनी जारी की है कि केन्या में हमले किए जाएंगे. केन्या ने सोमालिया में आतंकवादियों के खिलाफ सेना भेजी थी.
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नंबर 9, नाइजीरिया
इस्लामिक आतंकवादी संगठन बोको हराम का आतंक देश के ज्यादातर हिस्सों में महसूस किया जा सकता है. आतंकवादी हमले और बम धमाके लगातार होते हैं.
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नंबर 8, इराक
इराक में एक दशक से ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है. जून 2014 से तो गृह युद्ध ने देश को तीन तबकों में बांट दिया है जो एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं.
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नंबर 7, चाड
चाड की सीमा सूडान, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और नाइजीरिया से लगती है. तीनों देश हिंसा से पीड़ित हैं और उस आग की आंच इतनी ज्यादा है कि चाड को भी झुलसा रही है.
तस्वीर: Reuters/M. Nako
नंबर 6, सूडान
सूडान आमतौर पर एक सुरक्षित देश है. पारंपरिक लिबास में महिलाएं आराम से आ जा सकती हैं. चोरी-चकारी भी नहीं है. लेकिन देश के कुछ हिस्से गृह युद्ध की चपेट में हैं.
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नंबर 5, पाकिस्तान
आतंकवादी हमले पाकिस्तान को दुनिया के सबसे खतरनाक देशों की सूची में 5वें नंबर पर ले आए हैं. हाल यह है कि किसी देश की क्रिकेट टीम पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं.
तस्वीर: Reuters
नंबर 4, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक
दुनिया के सबसे गरीब देशों में शुमार यह देश इतनी ज्यादा दिक्कतों से जूझ रहा है कि इंसान के लिए मरना जीने से ज्यादा आसान हो गया है.
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नंबर 3, सीरिया
सीरिया अब एक देश नहीं, एक युद्ध का मैदान है. एक पत्रकार ने अपने बच्चों से जिंदगी के बारे में लिखने को कहा तो एक बच्चे ने लिखा: हम डरे हुए उठते हैं, डरे हुए दिन गुजारते हैं और डरे हुए ही सो जाते हैं.
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नंबर 2, अफगानिस्तान
काबुल में कब धमाका हो जाएगा, यह कोई नहीं बता सकता. सिर्फ आतंकवादी हमले नहीं, अपराध भी इतने बढ़ गए हैं क्राइम इंडेक्स में देश पांचवें नंबर पर है.
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नंबर 1, डीआर कांगो
इस रिपोर्ट के मुताबिक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोंगो दुनिया का सबसे खतरनाक देश है. अपहरण, बलात्कार और कत्ल इतना आम है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है.
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पाकिस्तान की सेना अकसर इस बात से इनकार करती है कि वो भारतीय कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों की मदद करती है, लेकिन माना यही जाता है कि जब तक कश्मीर मुद्दा सुलझ नहीं जाएगा, वहीं भारत विरोधी तत्व सक्रिय रहेंगे और उन्हें पाकिस्तान की मदद भी मिलती रहेगी.
चरमपंथ की ये गुत्थी यहीं नहीं खत्म हो जाती. बहुत से सुन्नी चरमपंथियों ने पाकिस्तान में आम शिया लोगों पर हमले किए हैं. सुन्नी आतंकवादी गुट इस्लामिक स्टेट ने पाकिस्तान में सक्रिय होने का दावा किया है. हालांकि उसने वहां किस हद तक अपने पैर जमा लिए हैं, इस बारे में अभी पक्के यकीन से कुछ नहीं कहा जा सकता.
बार बार इनकार के बावजूद पाकिस्तान की सेना पर अकसर आरोप लगते हैं कि वो सबको नहीं, बल्कि चुनिंदा आतंकी गुटों को निशाना बना रही है. पाकिस्तान की सरकार ने दहशतगर्दी को काबू करने के लिए नेशनल एक्शन प्लान बनाया है. हालांकि बहुत से लोगों का कहना है कि इसे लागू करने की राह में बहुत अड़चनें हैं.
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पाकिस्तानी सेना ने कबायली इलाकों में कई सफल अभियान चलाए हैं, जिनमें कई चमरपंथी नेता मारे गए हैं, उनके ठिकाने नष्ट किए गए हैं और उनके हथियार तबाह किए गए हैं. लेकिन माना जाता है कि इन्हीं सीमावर्ती इलाकों में अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे गुट अपनी गतिविधियां चला रहे हैं और अफगानिस्तान में हमलों को अंजाम दे रहे हैं.
हक्कानी ग्रुप का 1980 के दशक से पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों से संबंध रहा है. इस ग्रुप ने बार बार कहा है कि उसकी पाकिस्तान से कोई लड़ाई नहीं है. दूसरी तरफ, जो गुट भारत के खिलाफ सक्रिय हैं, उनके नेताओं को पाकिस्तान में खुले आम घूमने की आजादी है, जिनमें लशकर ए तैयबा का प्रमुख हाफिज सईद भी शामिल है.
पाकिस्तान में होने वाली हिंसा का एक पहलू अमेरिका के साथ पाकिस्तान के जटिल संबंधों से भी जुड़ा है. अमेरिका पाकिस्तान को अरबों डॉलर की मदद देता है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उसे अपना एक अहम साझीदार बताता है. लेकिन उसका ये आरोप भी बराबर रहता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी गुटों और खास कर हक्कानी नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए कुछ नहीं कर रहा है. इसके अलावा पाकिस्तान में होने वाले ड्रोन हमले जनता में अमेरिका विरोधी भावनाओं को भड़काते रहे हैं.
वहीं ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और सऊदी अरब की प्रतिद्वंद्विता का असर भी पाकिस्तान के ऊपर पड़ा है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को बहुत मदद दी है और वहां बहुत सारे सुन्नी मदरसे बनाए हैं. ये मदरसे शियाओं के खिलाफ अभियान चलाते हैं. अफगान तालिबान के बहुत से सदस्य पाकिस्तान में शरणार्थी रहते हुए इन्हीं मदरसों में पढ़े हैं. सऊदी अरब पर आरोप लगते हैं कि वो शियाओं को निशाना बनाने वाले लश्कर-ए-झांगवी गुट का समर्थन करता है. दूसरी तरफ ईरान पाकिस्तान में शिया मुस्लिम गुटों को पैसा भेजता है जिनमें तहरीक निफाज फिकाह ए जाफरिया भी शामिल है. ये गुट इस्लामिक शरिया कानून को लागू करने की बात करता है.