मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 11 देशों ने एकजुट होकर ईरान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने और अरब देशों के मामले में दखंलदाजी का आरोप लगाया है.
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इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को लिखे पत्र में यह बात कही है. पत्र के मुताबिक ईरान पूरे क्षेत्र में तनाव भड़का रहा है. इन देशों का कहना है कि ईरान यमन में शिया हूथी बागियों का समर्थन कर रहा है जबकि लेबनान में शिया हिज्बुल्लाह गुट का साथ दे रहा है. हिज्बुल्लाह ने सीरिया में अपने सैनिक भेजे हैं जो राष्ट्रपति बशर अल असद की तरफ से लड़ रहे हैं.
पत्र में ईरान पर बहरीन, इराक, सऊदी अरब, कुवैत और अन्य देशों में आतंकवादी गुटों और ईकाइयों को समर्थन देने का आरोप भी लगाया गया है. इन 11 देशों ने सितंबर में बहरीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से दिए गए बयान को भी दोहराया जिसके मुताबिक ईरान को अपनी विदेश नीतियों में बदलाव करना होगा और दुश्मनी खत्म करनी होगी.
इराक में आईएस से लोहा लेती ईरानी कुर्द हसीनाएं, देखिए
आईएस से लोहा लेतीं ईरान की कुर्द हसीनाएं
ईरान की लगभग दो सौ कुर्द महिलाएं उत्तरी इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रही हैं. ये महिला फाइटर कुर्दों की फोर्स पेशमर्गा में शामिल हैं और इन्हें अमेरिकी सेना का समर्थन हासिल है.
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पहले गीत, फिर मशीन गन
समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि जब भी आईएस के चरमपंथियों की तरफ से ईरान की इन कुर्द महिलाओं पर मोर्टार गोले दागे जाते हैं तो सबसे पहले ये उनका जबाव लाउडस्पीकर पर गीत गाकर देती हैं. इसके बाद मशीनगनों की तरफ हाथ बढ़ाती हैं और निशाने पर होता है इस्लामिक स्टेट.
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"हमें खौफ नहीं"
21 साल की मानी नसरुल्ला का कहा है कि वो गीत इस वजह से गाती हैं ताकि आईएस के चरमपथियों को और गुस्सा आए. वो कहती हैं, “इसके अलावा हम इन्हें बताना चाहती हैं कि हमें उनका खौफ और डर नहीं हैं.” लगभग दो सौ कुर्द औरतें ईरान छोड़ कर इराक में जंग लड़ रही हैं.
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छह सौ की यूनिट में
ये महिलाएं जिस यूनिट का हिस्सा हैं, उसमें छह सौ लोग शामिल हैं. यह यूनिट कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के साथ मिल कर लड़ रही है. कुर्द इसे पीओके के नाम से पुकारते हैं.
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अलग देश की जंग
ये यूनिट अब इराक और अमेरिकी सेना के साथ मिल कर काम कर रही है. कुर्द लोग अपने लिए एक अलग देश के लिए भी लड़ रहे हैं.
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विरोध
कुर्द लोग ईरान, सीरिया, इराक और तुर्की के कुछ हिस्सों को मिलाकर अपना अलग देश चाहते हैं. लेकिन इसका काफी विरोध होता है. तुर्की तो कुर्द बागियों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रहा है.
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"लड़ते रहेंगे"
एक महिला कुर्द सैनिक का कहना है कि वो अपनी सरमजीन की हिफाजत के लिए लड़ रही है. अब वो सरजमीन चाहे ईरान के कब्जे में हो या इराक के. इनके सामने चाहे इस्लामिक स्टेट हो या कोई और दूसरी ताकत, वो अपनी अपनी सरजमीन की आजादी के लिए लड़ती रहेंगी.
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आईएस की कोई परवाह नहीं
इस समय ये महिलाएं पुरुष कुर्दों के साथ उत्तरी इराक में स्थित फजलिया नाम के एक देहाती इलाके में लड़ रही हैं. एक 32 वर्षीय महिला फाइटर का कहना है, “ये सच है कि इस्लामिक स्टेट खतरनाक है, लेकिन हमें उसकी परवाह नहीं है.”
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"मैं भी दूंगी जबाव"
वहीं एक अन्य फाइटर का कहना है कि उसने पेशमर्गा में शामिल होने का फैसला उस वक्त किया था जब हर तरफ से ये खबरें आ रही थीं कि इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी महिलाओं के साथ बहुत बुरा व्यवहार करते हैं. “मैंने फैसला किया कि मैं भी उनको जवाब दूंगी.”
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विवाद
हालांकि उत्तरी इराक में इन महिलाओं की मौजूदगी को लेकर विवाद भी हो रहा है. ईरान ने कुर्दिस्तान की क्षेत्रीय सरकार पर इन महिलाओं को बेदखल करने का दबाव बढ़ दिया है. 2016 में कुर्द लड़ाकों की ईरानी सेना के साथ कम से कम छह बार झड़पें हो चुकी हैं.
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गर्व
इन महिलाओं के पुरुष कमांडर हाजिर बाहमानी कहते हैं कि इनके साथ पुरुषों जैसा ही बराबर सलूक किया जाता है और उन्हें इन महिलाओं पर गर्व है. इन्हें छह हफ्ते की स्नाइपर ट्रेनिंग भी दी गई है.
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ईरान के मुद्दे पर इन देशों को संयुक्त अरब अमीरात ने एकजुट किया है और पत्र पर जिन देशों ने हस्ताक्षर किए हैं उनमें सऊदी अरब, मिस्र, सूडान, मोरक्को, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, यमन और जॉर्डन के नाम शामिल हैं. शिया बहुल ईरान और ज्यादातर सुन्नी बहुल अरब देशों में अकसर तनाव रहता है. सीरिया से लेकर यमन तक विभिन्न मुद्दों पर उनकी सोच और हितों में टकराव होता आया है.
यमन में सितंबर 2014 से गृह युद्ध छिड़ा है जहां हूथी बागियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया जिसके बाद राष्ट्रपति अब्द रब्ब मंसूर हादी को सऊदी अरब जाना पड़ा. सऊदी नेतृत्व वाली खाड़ी देशों का गठबंधन हूथी बागियों के खिलाफ वहां हवाई हमले कर रहा है.
ईरान अपने ऊपर लगने वाले इन आरोपों को खारिज करता है कि वो हूथी पर बागियों का साथ दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरानी राजनयिक अब्बास यजदानी उलटे यूएई और अन्य अरब देशों पर सीरिया, इराक और अन्य देशों में आतंकवादियों की मदद करने का आरोप लगाते हैं.
एके/ओएसजे (एपी)
देखिए ईरान ने खोला रॉकेटों का खजाना
ईरान ने खोला रॉकेटों का खजाना
लंबे विवाद के बाद ईरान की संसद और अभिभावक परिषद ने ऐतिहासिक परमाणु संधि का अनुमोदन कर दिया है तो दूसरी ओर उसने सुरंगों में छुपे मध्यम दूरी के मिसाइलों का प्रदर्शन. ईरान का कहना है कि सारे रॉकेट तैनाती के लिए तैयार हैं.
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ईरान ने पहली बार जमीन के 500 मीटर नीचे बने बंकर में जमा अपने मिसाइलों और नेशनल रिवोल्यूशनरी गार्ड की टुकड़ी को दिखाया है.
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ईरान के रिवोल्यूशन गार्ड के जनरल अमीर अली हाजीसादे ने सुरंग में रॉकेट दिखाते हुए कहा है कि देश भर में सैकड़ों ऐसे अड्डे हैं. ये रॉकेट 1,700 किलोमीटर से 2,000 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकते हैं.
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ईरान ने पिछले हफ्ते एक नए रॉकेट का सफल परीक्षण किया था जो 'शहाब 3' का उत्तराधिकारी मॉडल है. 'एमाद' प्रकार का जमीन से जमीन पर मार करने वाला रॉकेट पिछले रॉकेटों के मुकाबले ज्यादा सटीक है.
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हथियारों की क्वालिटी और उसके परीक्षण के बारे में ईरान में स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करना संभव नहीं है. ईरान में होने वाले सारे टेस्ट तटस्थ पर्यवेक्षकों के बिना किए जाते हैं और बाद में उसकी जानकारी दी जाती है.
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ईरान ने अपने हथियारों का प्रदर्शन ऐसे दिन किया जब ईरानी सैनिकों को सीरिया भेजने की खबर आई. प्रमुख ईरानी सांसद अलादीन बुरूजर्दी ने कहा है कि अगर सीरिया आग्रह करे तो ईरान अपने सैनिक भेजने को तैयार है.
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पश्चिमी देशों में चिंता रही है कि ईरान शहाब 3 रॉकेट से इस्राएल पर हमला कर सकता है. इस साल जुलाई में हुई परमाणु संधि के बाद इस तरह की चिंता कम हुई है.
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अभिभावक परिषद द्वारा परमाणु समझौते का अनुमोदन. धार्मिक नेताओं और न्यायविदों वाला अनुदारवादी अभिभावक परिषद संसद द्वारा पास कानून की संवैधानिकता और इस्लाम से अनुकूलता की जांच करता है.