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ईरान भारत को कच्चा तेल देता रहेगा

२ जनवरी २०११

ईरान के तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भुगतान के तरीकों पर विवाद होने के बावजूद भारत को तेल की सप्लाई जारी रहेगी. पिछले दिनों रिजर्व बैंक के नए फरमान के बाद ईरान ने तेल सप्लाई बंद करने का एलान किया था.

तस्वीर: picture-alliance/ dpa

भारत को तेल के कारोबार के लिहाज से पुराना और भरोसेमंद साझीदार बताते हुए ईरान की सरकारी तेल कंपनी एनआईओसी के प्रमुख अहमद कालेबानी ने कहा, "भारत को तेल की बिक्री और निर्यात नहीं रोकी गई है." भारत ईरान से हर दिन चार लाख बैरल तेल खरीदता है और वो ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. कालेबानी ने कहा कि दोनों देश भुगतान के नए तरीकों पर विवाद होने के बावजूद आपसी सहयोग जारी रखना चाहते हैं. भारत ने पिछले हफ्ते कहा था कि वो क्षेत्रीय भुगतान तंत्र के साथ काम नहीं करना चाहता. भारत इस तंत्र की पारदर्शिता से संतुष्ट नहीं है.

तस्वीर: picture alliance/dpa

ईरान दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है लेकिन उसके विवादित परमाणु कार्यक्रम के कारण उस पर फिलहाल कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को डर है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का लक्ष्य बम बनाना है हालांकि ईरान इससे इंकार करता है और उसका कहना है कि वो सिर्फ ऊर्जा पैदा करने के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यक्रम चला रहा है.

अमेरिका के तरफ से लगाए प्रतिबंधों में तेल की बिक्री शामिल नहीं है लेकिन एशियाई भुगतान तंत्र एसीयू पर आरोप लग रहे हैं कि उसके कामकाज का तरीका पारदर्शी नहीं है. ईरान और भारत के बीच इसी तंत्र के माध्यम से कारोबार होता है. कहा जा रहा है कि एसीयू के जरिए ईरान के किन संस्थाओं पैसा जा रहा है इस पर निगाह रखना मुश्किल है. अमेरिका का आरोप है कि उसने जिन संस्थाओं पर पाबंदी लगा रखी है उन्हें एसीयू के जरिए पैसा मिल रहा है.

शुक्रवार को ईरान में तेल मंत्रालय के उप मंत्री अहमद खालिदी ने बताया कि कारोबार की मुद्रा में बदलाव करके इस विवाद को हल कर लिया जाएगा. खालिदी ने कहा,"तेल के कारोबार के लिए मुद्रा बदल कर भारत और ईरान के बीच का विवाद सुलझा लिया गया." शुक्रवार को दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बारे में बात करने के लिए मुलाकात की. इस बैठक में शामिल एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों ने लेनदेन के लिए डॉलर की बजाय यूरो का इस्तेमाल करने पर बातचीत की है. दोनों देशों को ये तय करना होगा कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक इन दोनों के बीच कारोबार की पारदर्शिता से संतुष्ट हो.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ओ सिंह

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