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ई नाक से पता चलेगा टीबी का

Priya Esselborn८ नवम्बर २०११

भारतीय वैज्ञानिकों ने कहा है कि वह एक इलेक्ट्रॉनिक नाक बना रहे हैं जिससे सांस का परीक्षण किया जाएगा और ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा.

तस्वीर: AP

इस तेज जांच से कई हजार जिंदगियां बचाई जा सकेंगी. ई नोज यानी इलेक्ट्रॉनिक नाक बैटरी से चलेगी और बहुत छोटा सा उपकरण होगा. ठीक उसी तरह का जैसे पुलिस सांस में अल्कोहोल की मात्रा जांचने के लिए रखती है.

मरीज से कहा जाएगा कि वह इस ई नाक में सांस छोड़े. उपकरण में लगे सेंसर टीबी के अंदेशे को भांप लेंगे. इसके नतीजे एकदम मिलेंगे और काफी हद तक सटीक भी. ई नाक नई दिल्ली के जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी अंतरराष्ट्रीय सेंटर और कैलिफोर्निया की नेक्स्ट डाइमेन्शन टेक्नोलॉजी का साझा प्रयास है. मुख्य वैज्ञानिक रंजन नंदा ने बताया, हमें उम्मीद है कि पहला प्रोटोटाइप 2013 अक्टूबर तक क्लीनिकल परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगा.

दुनिया भर में हर साल टीबी या क्षय रोग के कारण 17 लाख लोगों की मौत हो जाती है और शोधकर्ताओं का मानना है कि ई नोज के कारण विकासशील देशों में सालाना कम से कम चार लाख लोगों की जिंदगियां बच जाएंगी क्योंकि क्षय रोग जल्दी पकड़ में आ जाएगा और इसलिए इलाज भी वक्त से होगा.

सोमवार को इस प्रोजेक्ट को बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और ग्रैंड चैलेंजेस कनाडा की ओर से साढ़े नौ लाख डॉलर की मदद मिली है. नंदा ने बताया, "हमारा शोध दिखाता है कि नई तकनीक की मदद से दूसरी बीमारियों जैसे फेंफड़ों के कैंसर और न्यूमोनिया जैसी बीमारियों का भी जल्दी पता लग सकता है."

ई नोज की कीमत अंदाजन 20 से 30 डॉलर होगी. छोटे आकार और बैटरी से चलने के कारण यह गांवों में भी आसानी से इस्तेमाल की जा सकेगी. ऐसे इलाकों में भी जहां बिजली की समस्या है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा टीबी का संक्रमण है और वहां हर रोज एक हजार लोग क्षय रोग के संक्रमण का शिकार होते हैं. नंदा ने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि इलेक्ट्रॉनिक नाक गरीब और दूरदराज के इलाकों में उपलब्ध करवाई जाए जहां अक्सर ट्यूबरकुलोसिस के बहुत मामले सामने आते हैं और जानलेवा बन जाते हैं."

टीबी बैक्टीरिया के कारण होता है और इसका संक्रमण तेजी से फैसला है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीबी से पीड़ित एक व्यक्ति से साल में कम से कम 10 से 15 लोग संक्रमित हो जाते हैं.

रिपोर्टः एएफपी/आभा मोंढे

संपादनः ओ सिंह

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