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कनाडा: ट्रूडो को बहुमत मिलना मुश्किल

२० सितम्बर २०२१

कनाडा के चुनावों में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की एक बार फिर जीत संभव है, लेकिन उनका संसद में बहुमत हासिल कर पाना मुश्किल लग रहा है. क्या चुनावों को समय से पहले कराने का उनका दांव रंग लाएगा?

तस्वीर: Carlos Osorio/REUTERS

ट्रूडो अल्पमत की सरकार चला रहे हैं जिसकी वजह से वो दूसरी पार्टियों पर निर्भर हैं. इस निर्भरता की वजह से उन्हें अपनी नीतियों पर समझौता भी करना पड़ा है. पिछले महीने ओपिनियन पोल में वो दूसरी पार्टियों से काफी आगे चल रहे थे, जिसकी वजह से उन्होंने चुनावों को तय समय से दो साल पहले ही कराने का ऐलान कर दिया.

उनका कहना था कि उनकी लेफ्ट-ऑफ-सेंटर लिबरल सरकार का कोविड-19 महामारी से निपटने में कैसा प्रदर्शन रहा इस पर जनता की मुहर की जरूरत है. लेकिन चुनाव जल्दी कराने के फैसले से लोग खुश नहीं हुए और धीरे धीरे उन्होंने अपनी बढ़त को गंवा दिया.

मजबूत नेतृत्व का लक्ष्य

लिबरल रणनीतिकार भी मान रहे हैं कि हाउस ऑफ कॉमन्स की 338 सीटों में से अधिकतर को जीतना मुश्किल होगा. 49-वर्षीय ट्रूडो की सरकार ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ने में रिकॉर्ड दर्जे का ऋण ले लिया. हाल के दिनों में उन्होंने सबके टीकाकरण पर अपना ध्यान केंद्रित किया.

कंजर्वेटिव पार्टी के नेता एरिन ओ'टूल एक बहस के दौरान बोलते हुएतस्वीर: Justin Tang/The Canadian Press/AP Photo/picture alliance

वो वैक्सीन को अनिवार्य बनाने में विश्वास रखते हैं जबकि कंजर्वेटिव पार्टी के 48-वर्षीय नेता एरिन ओ'टूल रैपिड टेस्टिंग को वरीयता देते हैं. 19 सितंबर को चुनावी अभियान का आखिरी दिन था और इस दिन ट्रूडो ने पूरे देश में 4,500 किलोमीटर लंबी यात्रा की. 

उन्होंने ओंटारियो के नियाग्रा फॉल्स में अपने समर्थकों को बताया, "हमें एक स्पष्ट, मजबूत नेतृत्व की जरूरत है जो बिना किसी आना कानी के टीकाकरण को आगे बढ़ाता रहे और हम यही करेंगे. मिस्टर ओ'टूल ऐसा नहीं कर सकते और करेंगे भी नहीं."

ट्रुडो अगर वकई बहुमत हासिल नहीं कर पाते हैं तो इससे उनके भविष्य पर सवाल उठेंगे. वो एक करिश्माई और प्रगतिशील राजनेता हैं और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे लिबरल नेता पिएरे ट्रूडो के बेटे हैं. वो 2015 में सत्ता में आए थे, लेकिन 2019 में चेहरे पर काला रंग पोते हुए उनकी पुरानी तस्वीरों के सामने आने के बाद उनकी सरकार अल्पमत में आ गई.

नाराज हैं मतदाता

पोल में सामने आया है कि लिबरल और कंजर्वेटिव दोनों को बराबर लोकप्रियता हासिल है, जिसकी वजह से सैद्धांतिक रूप से ट्रूडो को बढ़त मिलनी चाहिए, क्योंकि शहरी केंद्रों में लिबरल पार्टी मजबूत है. अधिकतम सीटें शहरी केंद्रों में ही हैं.

अगस्त में ओंटारियो में लोगों के गुस्से की वजह से ट्रूडो के एक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा थातस्वीर: Carlos Osorio/REUTERS

एक लिबरल रणनीतिकार ने बताया, "यह निश्चित रूप से काफी करीबी लड़ाई है. क्या बहुमत संभव है? हां. क्या इसकी सबसे ज्यादा संभावना है? नहीं." लिबरल यह मान रहे हैं कि जल्दी चुनाव कराने की वजह से मतदाता खुश नहीं हैं. जब भी मतदान कम होता है तो उसका फायदा कंजर्वेटिव पार्टी को मिलता है. 

दोनों पार्टियां मतों के विभाजन का भी सामना कर रही हैं जिसकी वजह से मामला और पेचीदा हो गया है. लिबरलों की वाम की तरफ झुकाव वाले न्यू डेमोक्रैट्स से भी टक्कर है और दूसरी तरफ टीकाकरण का विरोध करने वाली दक्षिणपंथी पीपल्स पार्टी ऑफ कनाडा (पीपीसी) कंजर्वेटिव पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है.

ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से सजग रुख अपनाया है और बहुमत के सवाल से बचते रहे हैं. उन्होंने मोंट्रियल में पत्रकारों को बताया, "मैं चाहता हूं कि पूरे देश में जितने संभव हों उतने लिबरल जीतें क्यों हमें एक मजबूत सरकार की जरूरत है."

लेकिन निजी तौर उनके साथी खुल कर बात कर रहे हैं. एक का कहना है, "आप महामारी में चुनाव फिर से एक अल्पमत की सरकार पाने के लिए तो नहीं कराते हैं."

सीके/एए (रॉयटर्स)

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