कश्मीर के अलगाववादियों के अल कायदा से जुड़ने की खबर है. तो क्या कश्मीर मुद्दे को इस्लामिक चरमपंथियों से हाइजैक कर लिया है. दक्षिण एशिया विशेषज्ञ अग्नियेश्का कुशेवस्का इसके लिए भारत की नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराती हैं.
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डीडब्ल्यू: हाल ही में एक प्रभावशाली कश्मीरी नेता जाकिर मूसा ने अलगाववादी मूवमेंट से दूरी बना ली और अल कायदा में शामिल हो गया. कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि दशकों पुराना भारत विरोधी अभियान तेजी से इस्लामीकरण की तरफ बढ़ रहा है. क्या आप इस समीक्षा से सहमत हैं?
अग्नियेस्का कुसजेवस्का: जाकिर मूसा अब हिज्बुल मुजाहिद्दीन अलगाववादी गुट से नहीं जुड़ा है. संगठन ने माना है कि "हुर्रियत के नेताओं का सर कलम करने" वाला मूसा का बयान अस्वीकार्य है और यह उसकी निजी राय है.
मूसा ने कहा कि वह "कश्मीर में शरिया" लागू करना चाहता है और यह ताकत के जरिये होना चाहिए न कि जनमत के जरिये. चरमपंथ के विस्तार और तथाकथित "कश्मीरी तालिबान" के उदय की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है. हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी की कश्मीर के प्रति कड़ी नीति हालात को भड़का रही है. अगर भारत ने घाटी में कड़ी नीति जारी रखी तो कश्मीरी मूवमेंट के कुछ धड़े ज्यादा कट्टर हो सकते हैं.
विशेषज्ञ कहते हैं कि कश्मीर के विवाद में पाकिस्तान 1980 के दशक के आखिर में सीधे शामिल हुआ, इसके बाद ही कश्मीर का नरमपंथी आंदोलन ज्यादा धार्मिक रंग लेने लगा. क्या आपको लगता है कि यह और ज्यादा कट्टर होता जा रहा है, शायद वैश्विक आतंकी संगठनों के संभावित तालमेल के चलते?
दुनिया में कहां कहां अलगाववाद
दुनिया में कई जगहों पर अलग देशों को लेकर आंदोलन चल रहे हैं. विभिन्न ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों से हो रहे ये आंदोलन दुनिया को नए देश दे सकते हैं.
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कश्मीर, भारत
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कैटेलोनिया, स्पेन
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फ्लेमिश रिपब्लिक, बेल्जियम
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वेनेटो, इटली
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स्कॉटलैंड, ब्रिटेन
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अबखासिया, जॉर्जिया
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साउथ ओसेतिया, जॉर्जिया
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ट्रांसनिस्ट्रिया, मोल्डोवा
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न्यू रशिया, यूक्रेन
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वेस्ट पापुआ, इंडोनेशिया
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सोमालीलैंड, सोमालिया
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इलाके में इस्लामी चरमपंथ का उभार 1980 के दशक में अफगान युद्ध के दौरान आया. इसका सीधा असर कश्मीर विवाद पर भी पड़ा. 1990 में पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने वाले उग्रवादियों की घुसपैठ से भारत विरोधी आंदोलन ज्यादा इस्लामिक हो गया. मौजूद डाटा और तथ्यों की समीक्षा के आधार पर मुझे लगता है कि कश्मीर के लोग इस्लाम का विस्तारवाद नहीं चाहते, वे चरमपंथी संगठनों को भी पंसद नहीं करते और ज्यादातर शरिया लागू करने के भी खिलाफ हैं. कई देशों में फैले आंतकी गुटों के पास कश्मीर में बड़ा समर्थन नहीं है.
श्रीनगर में जब मैं "वेलकम तालिबान" की ग्रैफिटी देखती हूं तो मेरे दिमाग में दो बातें आती हैं. पहली, कुछ युवा कश्मीरी और उग्रवादी संगठन इन संगठनों के प्रति अपना हल्का सा समर्थन जताते हैं क्योंकि वे घाटी में मानवाधिकारों के हालात के खिलाफ विरोध करना चाहते हैं. दूसरी बात है, यह सुरक्षा तंत्र द्वारा भी किया जा सकता है, वे इनकाउंटरों और मानवाधिकार के हनन के अन्य मामलों के लिए बदनाम हैं.
नये कश्मीरी आंदोलन को ज्यादातर नाराज युवा चला रहे हैं, वे भारत और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ नजर आते हैं. लेकिन यह 1990 से पहले के उस आंदोलन से कैसे अलग है, जब पाकिस्तान से उम्मीदें नहीं थीं?
यह अलग है क्योंकि बीते तीन दशकों में भूरणनैतिक आयाम बदल चुके हैं. यह इसलिए भी अलग है कि युवा पीढ़ी कई साल की हिंसा देख चुकी है और उनकी स्मृतियां और सदमे पुरानी पीढ़ी के मुकाबले अलग हैं. कश्मीर के युवा थके हैं, गुस्से में है और समाधान की सख्त जरूरत महसूस कर रहे हैं. सुरक्षा बलों के दुर्व्यवहार की वजह से प्रतिरोध ज्यादा लोगों को आकर्षित कर रहा है. युवा अपनी जान दांव पर लगाने को तैयार हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी अब खुद को छुपा नहीं रहे हैं. वे सारे दुर्व्यवहार को रिकॉर्ड कर रहे हैं और फिर सोशल मीडिया के जरिये दुनिया से साझा कर रहे हैं. बीते साल जुलाई में सुरक्षा बलों के हाथों मरने वाला बुहरान वानी इस नए ट्रेंड में काफी कुशल था.
इंटरव्यू: शामिल शम्स
अग्निएश्का कुशेव्स्का वारसा यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइसेंस में प्रोफेसर हैं और थिंक टैंक पोलैंड एशिया रिसर्च सेंटर से जुड़ी हैं.
(कश्मीर मुद्दे की पूरी रामकहानी)
कश्मीर मुद्दे की पूरी रामकहानी
आजादी के बाद से ही कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक फांस बना हुआ है. कश्मीर के मोर्चे पर कब क्या क्या हुआ, जानिए.
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1947
बंटवारे के बाद पाकिस्तानी कबायली सेना ने कश्मीर पर हमला कर दिया तो कश्मीर के महाराजा ने भारत के साथ विलय की संधि की. इस पर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया.
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1948
भारत ने कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया. संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव 47 पास किया जिसमें पूरे इलाके में जनमत संग्रह कराने की बात कही गई.
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1948
लेकिन प्रस्ताव के मुताबिक पाकिस्तान ने कश्मीर से सैनिक हटाने से इनकार कर दिया. और फिर कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया.
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1951
भारतीय कश्मीर में चुनाव हुए और भारत में विलय का समर्थन किया गया. भारत ने कहा, अब जनमत संग्रह का जरूरत नहीं बची. पर संयुक्त राष्ट्र और पाकिस्तान ने कहा, जनमत संग्रह तो होना चाहिए.
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1953
जनमत संग्रह समर्थक और भारत में विलय को लटका रहे कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया गया. जम्मू कश्मीर की नई सरकार ने भारत में कश्मीर के विलय पर मुहर लगाई.
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1957
भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर को भारत के हिस्से के तौर पर परिभाषित किया गया.
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1962-63
चीन ने 1962 की लड़ाई भारत को हराया और अक्साई चिन पर नियंत्रण कर लिया. इसके अगले साल पाकिस्तान ने कश्मीर का ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट वाला हिस्सा चीन को दे दिया.
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1965
कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ. लेकिन आखिर में दोनों देश अपने पुरानी पोजिशन पर लौट गए.
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1971-72
दोनों देशों का फिर युद्ध हुआ. पाकिस्तान हारा और 1972 में शिमला समझौता हुआ. युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा बनाया गया और बातचीत से विवाद सुलझाने पर सहमति हुई.
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1984
भारत ने सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण कर लिया, जिसे हासिल करने के लिए पाकिस्तान कई बार कोशिश की. लेकिन कामयाब न हुआ.
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1987
जम्मू कश्मीर में विवादित चुनावों के बाद राज्य में आजादी समर्थक अलगाववादी आंदोलन शुरू हुआ. भारत ने पाकिस्तान पर उग्रवाद भड़काने का आरोप लगाया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया.
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1990
गवकदल पुल पर भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 100 प्रदर्शनकारियों की मौत. घाटी से लगभग सारे हिंदू चले गए. जम्मू कश्मीर में सेना को विशेष शक्तियां देने वाले अफ्सपा कानून लगा.
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1999
घाटी में 1990 के दशक में हिंसा जारी रही. लेकिन 1999 आते आते भारत और पाकिस्तान फिर लड़ाई को मोर्चे पर डटे थे. कारगिल की लड़ाई.
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2001-2008
भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की कोशिशें पहले संसद पर हमले और और फिर मुबई हमले समेत ऐसी कई हिंसक घटनाओं से नाकाम होती रहीं.
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2010
भारतीय सेना की गोली लगने से एक प्रदर्शनकारी की मौत पर घाटी उबल पड़ी. हफ्तों तक तनाव रहा और कम से कम 100 लोग मारे गए.
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2013
संसद पर हमले के दोषी करार दिए गए अफजल गुरु को फांसी दी गई. इसके बाद भड़के प्रदर्शनों में दो लोग मारे गए. इसी साल भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मिले और तनाव को घटाने की बात हुई.
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2014
प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ गए. लेकिन उसके बाद नई दिल्ली में अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात पर भारत ने बातचीत टाल दी.
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2016
बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में आजादी के समर्थक फिर सड़कों पर आ गए. अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और गतिरोध जारी है.
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2019
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 46 जवान मारे गए. इस हमले को एक कश्मीरी युवक ने अंजाम दिया. इसके बाद परिस्थितियां बदलीं. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है.
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2019
22 जुलाई 2019 को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे को लेकर मध्यस्थता करने की मांग की. लेकिन भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझेगा.
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2019
5 अगस्त 2019 को भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संशोधन विधेयक पेश किया. इस संशोधन के मुताबिक अनुच्छेद 370 में बदलाव किए जाएंगे. जम्मू कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. लद्दाख को भी एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. धारा 35 ए भी खत्म हो गई है.