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काइट्स से हमें बहुत उम्मीदें हैं: रितिक

समय ताम्रकर, सौजन्य: वेबदुनिया२६ अप्रैल २०१०

बॉलीवुड के सुपरस्टारों में से एक रितिक रोशन ‘काइट्‍स’ के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़ुद को स्थापित करने की कोशिश में लगे हुए हैं. 21 मई को रिलीज होने वाली इस फिल्म से उन्हें बेहद आशाएं हैं. क्या कहते हैं रितिक.

तस्वीर: UNi

'काइट्‌स' को लेकर सबके मन में यह सवाल है कि सफल निर्देशक होने के बावजूद राकेश रोशन ने इसके निर्देशन की जिम्मेदारी क्यों नहीं ली?
रितिक: फिल्म का जो कंसेप्ट है वो मेरे डैड का ही है. लेकिन उन्होंने यह सोचा कि इस आइडिए के साथ एक युवा निर्देशक कैसी फिल्म बनाएगा. उसका क्या अलग एप्रोच होगा, इसलिए निर्देशन की बागडोर उन्होंने अनुराग बसु को सौंप दी.

'काइट्‌स' रिलीज के लिए तैयार है, क्या कहेंगे आप इस फिल्म के बारे में?
रितिक: यह फिल्म मेरी ढाई साल की मेहनत का नतीजा है. ऐसा लग रहा है कि इस फिल्म के ज़रिए मैं लांच होने जा रहा हूं. मेरी पहली फिल्म के रिलीज पर जो घबराहट महसूस कर रहा थी, वैसी ही घबराहट मुझे अभी हो रही है. यह एक अलग ही तरह की फिल्म है.

क्या अलग है इस फिल्म में?
रितिक: यह एक सिम्पल लव स्टोरी है, लेकिन कहानी को एक नए अंदाज में पेश किया गया है. यह हमारे दिल से निकली हुई फिल्म है. हमने इसके निर्माण के समय में फिल्म के साथ पूरी ईमानदारी बरती है, जो फिल्म की बेहतरी के लिए अच्छा लगा हमने वही किया. फिल्म बनाते हुए दर्शकों के बारे में नहीं सोचा. कभी ये सोच कर सीन नहीं फिल्माए कि अमुक सीन पंजाब के दर्शकों के लिए डाल दो या मेट्रो सिटी के दर्शकों की पसंद वाला एक सीन ठूंस दो या 6 गाने और चंद फाइट सीन शूट कर डाल दो. यह एक मेनिपुलेशन होता है, लेकिन ‘काइट्‍स' में यह बात नज़र नहीं आएगी.

बिना दर्शक की पसंद या नापसंद को ध्यान रखे इतनी महंगी फिल्म बनाना जोखिम भरा निर्णय नहीं है?
रितिक: मैं आपको ऐसी कई फिल्मों के उदाहरण दे सकता हूँ जिनमें आइटम सांग, फाइट सीन या फॉर्मूले नहीं हैं, फिर भी उन फिल्मों ने कामयाबी हासिल की है. उन फिल्मों की सफलता का राज ही यह है कि वे दर्शक का दिल छू लेती हैं. काइट्‌स में भी यही बात है. हमने फिल्म को वास्तविकता के नज़दीक रखने की कोशिश की है. मुझ पर फिल्माया गया गाना भी मैंने इसीलिए गाया है ताकि बनावटीपन ना झलके.

अनुराग बसु के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
रितिक: अनुराग के साथ काम कर मुझे बेहद मज़ा आया. उनका वर्किंग स्टाइल बहुत अलग है. शूटिंग के पहले दिन उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जानता हूँ कि तुम बेहद अच्छे डांसर हो, स्टंट भी अच्छे कर लेते हो, सुपरस्टार हो, लेकिन उस रितिक रोशन की मुझे जरूरत नहीं है. मैं उस रितिक की तलाश में हूं, जो रियल है. जब वह एक्टिंग नहीं कर रहा होता है तब कैसा रहता है, कैसे बात करता है, उस रितिक को मैं पेश करना चाहता हूं. यह सुनकर मैं थोड़ा घबरा गया क्योंकि यह मुझे बहुत कठिन काम लगा. इस बारे में मैंने सोचा तो पाया कि जब मैं कैमरे के सामने रहता हूं तो मेरी चाल बदल जाती है. चेहरे के एक्सप्रेशन में बदलाव आ जाता है. मैं सुपर सितारा की तरह हो जाता हूं जो मैं एक आम ज़िंदगी में नहीं हूं. मैंने इसी बात को 'काइट्‌स' में आज़माया. मैंने अपने बालों या चलने की स्टाइल पर कभी ध्यान नहीं दिया, कभी यह नहीं सोचा कि मैं कैसा दिख रहा हूं. शॉट ‌ओके होने के बाद कभी स्क्रीन पर यह देखने के लिए नहीं भागा कि मैंने कैसे यह सीन किया. शॉट के बाद मैं यह भूल जाता था कि मैंने क्या किया, क्योंकि मैं एक्टिंग कर ही नहीं रहा था. इससे मुझे एक अलग ही तरह का अनुभव हुआ. सुपरस्टार बन एक जैसे रोल निभाकर मैं थक गया था.

क्या यह सही है कि बार्बरा मोरी ने आपकी कुछ पिछली फिल्में देखीं और आपकी अभिनय शैली को देख परेशान हो गई थीं?
रितिक: ये सही है. यह बात तब की है जब 'काइट्‌स' के लिए उनसे बात की जा रही थी. उन्होंने जोधा अकबर के कुछ दृश्य देखें तो उन्हें समझ में ही नहीं आया कि मैं ऐसी एक्टिंग क्यों कर रहा हूँ. मैं उस फिल्म में अकबर बना था, इसलिए थोड़ा अकड़ कर बैठता था, मेरी डॉयलॉग डिलीवरी अलग ही तरह की थी, मेरा अभिनय लाउड था. उन्हें समझ में ही नहीं आया कि यह किस तरह की एक्टिंग है.

आपके द्वारा कुछ सीन डायरेक्ट किए जाने की भी चर्चा हुई थी?
रितिक: अनुराग बसु बहुत तेजी से अग्रेंजी बोलते हैं, इससे बार्बरा को समझने में कठिनाई होती थी. मदद के लिए वे मेरे पास आती थीं और मैं उन्हें अनुराग की बात समझाता था, इससे अफवाह उड़ गई कि मैंने कुछ दृश्य डायरेक्ट किए हैं.


परफेक्शन की तलाश: रितिकतस्वीर: AP
जोधा अकबर के बाद काइट्सतस्वीर: UNI

'काइट्‌स' जबसे बनना आरंभ हुई है, लगातार कई कारणों से चर्चा में रही हैं. कभी आपके और बार्बरा के रोमांस के किस्से सामने आते हैं तो कभी इस फिल्म के क्लाइमैक्स के बारे में बता दिया जाता है.
रितिक: इस मैं पत्रकारिता नहीं मानता, ये बेहद घटिया हरकतें हैं. किसी ने फिल्म का क्लाइमैक्स नहीं देखा और जो मन में आया वो छाप दिया. वह मेरे बारे चाहे जो लिख देते हैं. मैं मीडिया से ज़्यादा बात नहीं करता तो मेरे बारे में इस तरह के समाचार प्रकाशित कर मुझे उकसाने की कोशिश की जाती है.यह कुछ कुंठित लोगों का काम है.

आप इस बारे में अपना पक्ष क्यों नहीं रखते?
रितिक: मैं एक बार ऐसा कर चुका हूँ और वो मेरी बहुत बड़ी भूल थी. मेरे कुछ कहने से विवाद को और हवा मिल गई साथ ही उन्होंने मेरी बात को तोड़-मोड़कर प्रकाशित किया, जिससे अर्थ का अनर्थ हो गया.

आपने अपने लंबे करियर में बहुत कम फिल्में की हैं, क्या आपको नहीं लगता कि आप अपनी प्रतिभा के साथ अन्याय कर रहे हैं?
रितिक: मैं तो चाहता हूं कि एक समय में 10 फिल्में करूं. मैं आमिर खान या शाह रुख़ खानजैसा बनना चाहता हूं जो एक ही समय में ढेर सारे काम साथ करते हैं, लेकिन मैं एक समय में केवल एक काम ही पर फोकस कर पाता हूं. वो भी तब तक करता रहता हूँ जब तक वो परफेक्ट नहीं हो जाता. शूटिंग के दौरान मैं अपने कैरेक्टर में इस कदर घुस जाता हूं कि दूसरा कुछ भी काम नहीं कर पाता. मैं उस दौरान अपने परिवार के सदस्यों तक का फोन नहीं उठाता. उन्हें कोई जरूरी काम होता है तो वे मेरे ड्राइवर को फोन करते हैं.

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