केंद्र के नए कृषि कानूनों की वजह से पंजाब और केंद्र के बीच चल रहे टकराव के बीच पंजाब में एक अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है. इस संकट से उबरने के लिए पंजाब कई कोशिशें कर रहा है.
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पंजाब जून से ही नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है. राज्य में विरोध इतना गंभीर हो गया था कि शुरुआत में कानूनों का समर्थन करने वाली अकाली दल को भी बाद में अपना मोर्चा बदलना पड़ा. उसने भी विरोध किया और केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए से अपना दशकों पुराना रिश्ता तोड़ लिया.
केंद्र के तीन नए कानून हैं आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक और कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक. इनका उद्देश्य ठेके पर खेती यानी 'कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग' को बढ़ाना, खाद्यान के भंडारण की सीमा तय करने की सरकार की शक्ति को खत्म करना और अनाज, दालों, तिलहन, आलू और प्याज जैसी सब्जियों के दामों को तय करने की प्रक्रिया को बाजार के हवाले करना है.
कानूनों के आलोचकों का मानना है कि इनसे सिर्फ बिचौलियों और बड़े उद्योगपतियों का फायदा होगा और छोटे और मझौले किसानों को अपने उत्पाद के सही दाम नहीं मिल पाएंगे. सरकार ने कानूनों को किसानों के लिए कल्याणकारी बताया है, लेकिन कई किसान संगठनों, कृषि विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का कहना है कि इनकी वजह से कृषि उत्पादों की खरीद की व्यवस्था में ऐसे बदलाव आएंगे जिनसे छोटे और मझौले किसानों का शोषण बढ़ेगा.
बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार किसानों को पटरियों से नहीं हटा रही हैतस्वीर: Seerat Chabba/DW
अक्टूबर में केंद्र के कानूनों को बेअसर करने के लिए राज्य सरकार अपने कानून ले कर आई और उन्हें विधान सभा से पारित करा कर राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेज दिया. राज्यपाल की स्वीकृति ना मिलने पर जब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने का समय मांगा तो राष्ट्रपति ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया.
लेकिन इस सांकेतिक टकराव के अलावा केंद्र ने एक ऐसा कदम भी उठाया हुआ है जिससे पंजाब में एक अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है. विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों द्वारा राज्यों में ट्रेनों को रोकने के बाद केंद्र ने माल ढोने वाली ट्रेनों का पंजाब जाना पूरी तरफ से बंद कर दिया.
अब हालात ये हैं कि राज्य में कोयले की भारी कमी हो गई है और राज्य के ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन रुक गया है. राज्य के निवासी अब बड़े पैमाने पर बिजली कटने की आशंका के बीच स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहे हैं. दिन में ऊर्जा की कमी 1,000 से 1,500 मेगावाट तक पहुंच गई है.
सिंह ने कहा है कि राज्य में कोयला, यूरिया और फर्टिलाइजर की सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है. इसके विरोध में वो अपने विधायकों को लेकर दिल्ली आ रहे हैं और बुधवार से वे राजघाट पर धरना शुरू करेंगे.
उधर बीजेपी का कहना है कि राज्य में कोयला इसलिए नहीं पहुंच रहा है क्योंकि राज्य सरकार जान बूझकर किसानों को ट्रेन की पटरियों पर से नहीं हटा रही है.
अगर इस समस्या का जल्द ही समाधान नहीं निकला तो पंजाब में संकट और भी गंभीर मोड़ ले सकता है.
राज्य सभा में तीन घंटों में सात विधेयकों का पास हो जाना अपने आप में एक नई घटना है. यह तब संभव हुआ जब विपक्ष ने उसकी बात ना सुने जाने के विरोध में सदन का बहिष्कार कर दिया. जानिए क्या है इन विधेयकों में.
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बहिष्कार
मानसून सत्र 2020 के दौरान राज्य सभा से विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन के बाद, अधिकतर विपक्षी दलों ने सदन का बहिष्कार कर दिया. लेकिन इसके बावजूद सदन की कार्रवाई चलती रही और साढ़े तीन घंटों में ही एक के बाद एक सात विधेयक पारित हो गए.
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आईआईटीयों पर विधेयक
इनमें सबसे पहले पास हुआ भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां (संशोधन) विधेयक, 2020. इसके तहत पांच नए आईआईटीयों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित किया जाना है. इसके अलावा बाकी छह विधेयक भी लोक सभा से पहले ही पारित हो चुके थे.
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आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक
यह उन कृषि संबंधी विधेयकों में से एक है जिनका किसान और विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं. इसका उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की सूची से अनाज, दलहन, तिलहन, प्याज और आलू को निकालना और उन पर भंडारण की सीमा तय करने की सरकार की शक्ति को खत्म करना है.
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बैंककारी विनियमन (संशोधन) विधेयक
इस बिल का उद्देश्य सहकारी बैंकों को आरबीआई की देखरेख में लाना है. 2019 में पीएमसी सहकारी बैंक में करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आया था, जिससे आम खाताधारकों की जमापूंजी के डूब जाने का खतरा पैदा हो गया था.
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कंपनी (संशोधन) विधेयक
कंपनी अधिनियम, 2013 का और संशोधन करने वाले इस विधेयक का उद्देश्य है पुराने कानून के तहत कुछ नियमों के उल्लंघन के लिए सजा को कम करना. विपक्ष की आपत्ति थी कि सजा कम करने से कंपनी मालिकों को लगेगा की वे वित्तीय अनियमितताओं के दोषी पाए जाने पर भी बच जाएंगे.
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राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक
इस विधेयक का उद्देश्य गुजरात स्थित गुजरात न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय बनाना और उसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देना है.
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राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक
इस विधेयक का उद्देश्य है गुजरात में ही स्थित रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय बनाना और उसे भी राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देना.
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कराधान संबंधी विधेयक
इस विधेयक का उद्देश्य कराधान यानी टैक्सेशन संबंधी नियमों में कुछ संशोधन करना था, जिससे कंपनियों को कोरोना वायरस महामारी की वजह से हुए नुक्सान को देखते हुए कर संबंधी नियमों के पालन और भुगतान आदि के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सके. यह एक धन विधेयक यानी 'मनी बिल' था, इसलिए इसे लोक सभा वापस लौटा दिया गया.
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पहले भी हुआ
शोरगुल के बीच बिलों को पास कराने का काम पहले भी हुआ है. 2008 में लोक सभा में शोरगुल के बीच 17 मिनटों में आठ विधेयक पास करा लिए गए थे.