दरगाह पर धमाके के बाद पाकिस्तान में देशव्यापी धरपकड अभियान छिड़ा. हमले के बाद पाकिस्तान के कुछ नागरिक देश से अपने भीतर झांकने को भी कह रहे हैं.
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सेहवान में लाल शाहबाज कलंदर दरगाह पर हुए भयानक आत्मघाती हमले के बाद शुक्रवार तड़के पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने देश भर में छापे मारने शुरू कर दिये. पैरामिलिट्री रेंजर्स ने एक बयान जारी कर कहा कि गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात हुए ऑपरेशन में सिंध प्रांत में कम से कम 18 आतंकवादी मारे गए. पूर्वोत्तर शहर पेशावर में सात लोग मारे गए.
एक सरकारी अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "संघीय और प्रांतीय कानूनी एजेंसियां और पुलिस ने भोर होने से पहले ही देश भर में कार्रवाई शुरू कर दी और अलग अलग शहरों में बड़ी संख्या में संदिग्ध गिरफ्तार किये गये हैं."
शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना ने अफगान दूतावास से अधिकारियों को तलब कर 76 "मोस्ट वॉन्टेड" आतंकवादियों को सौंपने की मांग की. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान से अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकवादियों पर कार्रवाई करने की मांग भी की है.
सिंध प्रांत के सेहवान कस्बे में गुरुवार शाम लाल शाहबाज कलंदर की सूफी दरगाह पर आत्मघाती हमला हुआ. हमलावर ने 13वीं शताब्दी में बनाई गई दरगाह के भीतर पहले ग्रेनेड फेंका और फिर खुद को उड़ा दिया. हमले में कम से कम 70 लोग मारे गए, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी हैं. इस्लामिक स्टेट ने हमले की जिम्मेदारी ली है. ऐसी दरगाहों को इस्लामिक स्टेट इस्लाम के खिलाफ मानता है.
इस आत्मघाती हमले के बावजूद दरगाह के प्रमुख ने शुक्रवार सुबह साढ़े तीन बजे घंटी बजाई. दरगाह प्रमुख ने कहा कि वह "आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेंगे."
सिंध की सरकार ने राज्य में तीन दिन के शोक का एलान किया है. पाकिस्तान में मीडिया और सोशल मीडिया पर इस हमले और सरकार की काहिली की जमकर खिंचाई हो रही है. दरगाह सबसे करीबी हॉस्पिटल से 130 किलोमीटर दूर है. कई घायलों को सेना के हेलिकॉप्टरों और विमानों द्वारा इलाज के लिए कराची पहुंचाया गया है.
धमाके के वक्त दरगाह में कई बच्चे भी थेतस्वीर: Getty Images/AFP/A. Hassan
सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर जाहरा सैफुल्लाह नाम की एक यूजर ने लिखा, "सुन्नी, शिया, हिंदू और हर किस्म की आस्था वाले लोग अक्सर महान संत को श्रद्धाजंलि देने के लिए सेहवान जाते है. यह हमारी पहचान और संस्कृति पर हमला है."
पाकिस्तान में अक्सर ऐसे किसी हमले के बाद सेना और कट्टरपंथियों का एक धड़ा भारत और अफगानिस्तान पर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है. सोशल मीडिया में कई लोगों ने दूसरे देशों पर दोष मढ़ने के बजाए अपने अंदर झांकने की सलाह दी है. मेडिकल सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताते हुए निजमा बलूच ने लिखा, "ऐसी परिस्थितियों के बीच क्या भारत और अफगानिस्तान ने हमें हॉस्पिटल बनाने से भी मना किया है."
(क्या है इस्लामिक स्टेट)
इस्लामिक स्टेट है क्या बला?
इस्लामिक स्टेट दुनिया का सबसे ताकतवर आतंकवादी गुट है. यह कभी अल कायदा से टूटा हुआ एक गुट था लेकिन अब यह उससे बहुत आगे निकल गया है.
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इस्लामिक स्टेट आया कहां से?
इस्लामिक स्टेट को आईएसआईएल, आईएसआईएस और दाएश के नामों से भी जाना जाता है. चरमपंथी विचारधारा को मानने वाला यह गुट कभी अल कायदा से अलग हुआ था. इराक पर 2003 के अमेरिकी हमले के बाद उपजे हालात में इसकी नींव पड़ी और इसका नेतृत्व अबु बकर अल बगदादी करता है. आईएस का मकसद इराक, सीरिया और उससे बाहर भी एक इस्लामिक राज्य यानी खिलाफत का निर्माण करना है.
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कहां कहां से चलता है आईएस?
माना जाता है कि आईएस दुनिया के 18 देशों में सक्रिय है. इसने सीरिया और इराक के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर रखा है और सीरिया का शहर रक्का इसकी अघोषित राजधानी है. हालांकि जनवरी 2015 से आईएस ने अपने नियंत्रण वाली एक चौथाई जमीन गंवा दी है.
आईएस से कौन लड़ रहा है?
कई समूह आईएस के खिलाफ लड़ रहे हैं. अमेरिकी नेतृत्व में 50 से ज्यादा देशों का गठबंधन आईएस के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है. इस गठबंधन में कई अरब देश भी हैं. रूस ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थन में हवाई हमले किए हैं. क्षेत्रीय स्तर पर कुर्द पेशमर्गा बल (तस्वीर में) जमीन पर आईएस के खिलाफ लड़ रहे हैं.
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आईएस को पैसा कहां से मिलता है?
आईएस की आमदनी का मुख्य जरिया तेल और गैस की बिक्री है. माना जाता है कि सीरिया के एक तिहाई तेल उत्पादन पर अब भी आईएस का ही नियंत्रण है. हालांकि अमेरिकी नेतृत्व में हो रही हवाई कार्रवाई में आईएस के मूल्यवान ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है. इसकी आमदनी के अन्य स्रोतों में टैक्स से मिलने वाली रकम, फिरौती और लूटी हुई बहुमूल्य वस्तुएं शामिल हैं.
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कहां कहां हमले किए?
आईएस ने दुनिया भर में होने वाले कई आंतकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली है. इस साल सबसे घातक हमला इराक की राजधानी बगदाद में हुआ जिसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए और बहुत से घायल हो गए. आईएस नेता अकेले स्तर पर धमाके करने वाले लोगों को बढ़ावा देते हैं, जिसमें आईएस के समर्थक गुट की मदद के बिना ही हमलों को अंजाम देते हैं.
आईएस और हथकंडे क्या हैं?
आईएस अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए कई हथकंडे इस्तेमाल करता है. उसके लड़ाकों ने सीरिया और इराक में बहुत सी ऐतिहासिक कलाकृतियों को लूटा और बर्बाद किया है. इसके अलावा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों महिलाओं को गुलाम बनाया गया है. आईएस सोशल मीडिया को अपना प्रोपेगेंडा फैलाने और लड़ाकों की भर्ती के लिए इस्तेमाल करता है.
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कितने लोग बेघर हुए?
सीरिया में जारी संघर्ष के कारण वहां से लगभग साठ लाख लोग अन्य देशों में भागने के मजबूर हुए हैं. इनमें से बहुत से लोग पड़ोसी लेबनान, जॉर्डन और तुर्की गए हैं वहीं लाखों लोग यूरोप तक पहुंचे हैं. वहीं इराक में तीस लाख से ज्यादा लोग देश के अंदह ही विस्थापित हुए हैं.