यूरोप के स्कूलों में एक्सकर्सन की परंपरा है. कहते हैं कि यात्रा सीखने का मौका देती है. लेकिन स्विट्जरलैंड के विडलिसबाख का एक टीचर सीमाओं को तोड़ रहा है और जून में 15 साल के बच्चों से 80 किलोमीटर की ट्रेकिंग करा रहा है.
फफोले, आंसू और तकलीफ 38 साल के टीचर स्टीव क्नुषेल के एक्सकर्सन का हिस्सा है. लेकिन बच्चे भाग नहीं रहे, मां बाप स्कूल को रोक नहीं रहे और टीचर तकलीफ और बर्दाश्त की नई सीमाओं को तलाशने में लगा है. पिछले साल एक्सकर्सन पर बच्चों ने 60 किलोमीटर की दूरी तय की थी, इस बार 24 घंटे के अंदर 80 किलोमीटर का लक्ष्य है.
स्टीव क्नुषेल का कहना है कि सामान्य यात्राएं बहुत बोरिंग होती हैं. स्मार्ट फोन पीढ़ी के बच्चों की आरामतलबी की आदत को तोड़ने के लिए हाई स्कूल टीचर ने अपने एक्सकर्सन को मुश्किल बनाना शुरू किया, लेकिन वह तमाम मुश्किलों के बावजूद बच्चों में लोकप्रिय भी होता गया. स्विस न्यूज पोर्टल 20 मिनट्स के अनुसार क्नुषेल कहते हैं कि शारीरिक और मानसिक सीमाओं पर पहुंचना बच्चों को एक दूसरे से जोड़ता है. उन्हें यह देखकर अच्छा लगता है कि तकलीफ दूसरों को भी हो रही है.
60 या 80 किलोमीटर का मार्च हो तो बच्चों के बीमार होने या घायल होने की भी संभावना होती है. इस स्थिति से निबटने के लिए 16 बच्चों के साथ 8 वयस्क भी चलते हैं. इस बार की ट्रेकिंग रात में शुरू होगी, जिसका पहला चरण 40 किलोमीटर का होगा. यदि कोई पैदल नहीं चल पाया तो उसे स्ट्रेचर पर ले जाया जाएगा. ट्रेकिंग इतनी मुश्किल है कि स्विस सेना ने इस ना करने की सलाह दी थी. लेकिन स्टीव क्नुषेल का अनुभव अलग रहा है.
चिकित्सकों को भी इस योजना पर कोई आपत्ति नहीं है, हालांकि वे इसके लिए अच्छी तैयारी करने की सलाह देते हैं क्योंकि आज के बच्चों को इतना चलने की आदत नहीं रह गई है. लुसान यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट चिकित्सक जेराल्ड ग्रेमियोन का कहना है कि यदि चालीस साल पहले यह सवाल किया जाता कि बच्चों से ऐसी ट्रेकिंग करवाना लापरवाही है तो लोग हंसते.
स्टीव क्नुषेल मानते हैं कि इस तरह की ट्रेकिंग पर हर किसी को नहीं ले जाया जा सकते. पहले सामान्य ट्रेकिंग पर देखा और परखा जाता है कि कौन इस चुनौती का सामना करने में सक्षम है. स्कूली बच्चे खुद फैसला लेते हैं कि उन्हें ट्रेकिंग पर जाना है या नहीं. माता पिता को लिखकर देना होता है कि उन्हें कोई ऐतराज नहीं है. बच्चों के लिए यह ट्रेकिंग एक चुनौती है और लक्ष्य हासिल करने के बाद उन्हें संतुष्टि होती है कि मेहनत से लक्ष्य हासिल हो सकता है.
जर्मनी में ट्रैकिंग
जर्मनी में पैदल घूमने के लिए करीब दो लाख किलोमीटर का रास्ता है. हमने आपके लिए ढूंढे हैं 10 ट्रैक जो बहुत ही खूबसूरत हैं.
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सुंदर रास्ता
18वीं सदी में जब लोग इस सपनीली जगह घूमने जाने लगे तो अजीबोगरीब से दिखने वाले ये पत्थर भी खूबसूरत बन गए. उस समय ड्रेसडेन के दक्षिणी हिस्से की इन चट्टानों के आसपास ट्रैकिंग की जाती. 2006 में इसे बाकायदा संरक्षित किया गया.
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यूरोप का ई5
ट्रैकिंग का मशहूर इलाका है बवेरिया के अलगॉय में आल्प्स पर्वत श्रृंखला. यहां आसान से मुश्किल हर तरह के रास्ते हैं. यहीं से शुरू होता है यूरोप का ट्रैकिंग ट्रैक ई5. यह फ्रांस के अटलांटिक तट से शुरू हो कर इटली के वेरोना में खत्म होता है.
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द वे ऑफ सेंट जेम्स
स्पेन के सांतियागो डे कंपोस्तेया में सेंट जेम्स की कब्र मध्ययुग से ही ईसाई श्रद्धालुओं में लोकप्रिय है और वहां तक जाने के लिए कई ट्रैकिंग वाले रास्ते हैं. जर्मनी में 30 ऐसे रास्ते हैं जो सेंट जेम्स वे कहलाते हैं.
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हाइड श्नुकेन वेग
उत्तर के लूनेबैर्गर हाइडे से निकला रास्ता गर्मियों के आखिर में जामुनी रंग का हो जाता है क्योंकि यहां खास जंगली फूल खिलते हैं. ताकि ये इलाका ऐसा बना ही रहे यहां हाइडेश्नुकेन भेड़ें हैं जो इन झाड़ियों को चर जाती हैं. हैम्बर्ग से सेले तक जाने वाले इस रास्ते का नाम इन्हीं भेड़ों के कारण पड़ा है.
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राइन के किनारे
राइन घाटी में प्रकृति, संस्कृति, इतिहास और मजा सब कुछ है. राइनश्टाइग नाम का 320 किलोमीटर का रास्ता बॉन से वीसबाडेन तक जाता है. रास्ते में किले, मठ, चर्च, अंगूर के खेत दिखाई देते हैं और साथ में खूबसूरत नदी का किनारा.
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जर्मन फ्रांसीसी बुर्गेनवेग
खास रास्ते वह हैं जो रोमांचक अनुभव देते हैं. ये रास्ते जर्मनी के ट्रैकिंग संघ ने तय किए हैं. पैलेटिनेट जंगल में ही 25 ऐसे खास रास्ते हैं. इनमें से एक जर्मनी के पैलेटिनेट और फ्रांस के एल्सास को जोड़ने वाला जर्मन फ्रांसीसी बुर्गेनवेग भी है.
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ब्रॉकन का रास्ता
हार्त्स की पहाड़ियां भी घूमने की बढ़िया जगह है. ब्रॉकन बहुत ही सुंदर है. 1,141 मीटर ऊंचा यह पर्वत हार्त्स की सबसे ऊंची जगह है. यहां ऐतिहासिक ब्रॉकेन रेल के जरिए भी जाया जा सकता है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है तेज हवा.
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रेनश्टाइग
जर्मनी के पसंदीदा रास्तों में से एक यह भी है. यह 170 किलोमीटर लंबा रास्ता जर्मनी के दक्षिण पूर्वी प्रांत थ्युरिंजिया के जंगल से होता हुआ जाता है. जर्मनी के बंटवारे के दौरान यह रास्ता बंद था.
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ग्रीन बैंड
40 साल तक जर्मनी पूर्व और पश्चिम के बीच बंटा रहा. उस समय सीमा पर जंगल लगा दिया गया था. अब उस समय की 1,393 किलोमीटर लंबी सीमा के साथ साथ घूमा जा सकता है और सीमा की निगरानी करने वाली चौकियों सहित अतीत के प्रतीकों को देखा जा सकता है.
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वाडेन सी
उत्तरी तट का मजा ही कुछ और है यहां का जीवन कीचड़ और समंदर के बीच हिचकोले खाता है. पानी जब उतर जाता है तो खूब बड़ा इलाका घूमने के लिए खुल जाता है. उत्तरी तट का वाडेन सी यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल है.