अब बात 20 साल पुरानी नहीं रही. आराम के बजाय अब डॉक्टर मानते हैं गर्भवती महिलाओं के लिए तकरीबन हर रोज व्यायाम जरूरी है. यह मां और शिशु दोनों को फायदा पहुंचाता है.
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तकरीबन बीस साल पहले डॉक्टर एक गर्भवती महिला को जितना हो सके आराम की सलाह देते थे. इस डर से कि कहीं भ्रूण का विकास न प्रभावित हो जाए या गर्भपात ना हो जाए. लेकिन अब इस बारे में एक नया नजरिया है. अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रीशंस एंड गायनकॉलोजिस्ट्स (एसीओजी) का कहना है कि शारीरिक गतिविधियों से अधिकतर गर्भवती महिलाओं को 'बेहद कम खतरा' है जबकि इसके फायदे बहुत हैं.
एसीओजी की ओर से हाल ही में जारी की गई एक नई गाइडलाइन में यह महत्वपूर्ण बात कही गई है कि व्यायाम को समय से पहले प्रसव, भ्रूण के विकास और गर्भपात की वजह मानने के तर्क में कोई वजन नहीं है. इसके उलट एसीओजी के मुताबिक, ''महिलाओं को गर्भाव्स्था से पहले, उसके दौरान या बाद में एरोबिक या सहन शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.''
इस दिशा निर्देश में गर्भावस्था के अधिकतर दिनों में 20 से लेकर 30 मिनट तक हल्के व्यायाम की सलाह दी गई है. इस बात से कोई फर्क नहीं पढ़ता कि आपका वजन कितना है या आपकी उम्र क्या है.
नीना फरारी कोलोन सेंटर फॉर प्रिवेंशन इन चाइल्डहुड एंड यूथ में खेल विज्ञानी हैं. डीडब्लू से बात करते हुए वे कहती हैं, ''इन अमेरिकी दिशा निर्देशों में जो बात सबसे अहम है, वह यह है कि इसमें स्पष्ट रूप से तैराकी या घूमने जैसे खेलों की बात कही गई है जो कि जोड़ों के लिए लाभदायक होते हैं. लेकिन अगर आप गर्भावस्था से पहले धावक रहे हैं तो आपको इसे जारी रखना चाहिए. यह बात इसमें नई है. इसे हम पहले नहीं जानते थे.''
व्यायाम आपको स्वस्थ रहने में भी मदद करता है. इससे गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह की शिकायत भी दूर रहती है, जो कि गर्भ को नुकसान पहुंचा सकता है.
गर्भावस्था के दौरान कुछ खास किस्म के योग भी मददगार होते हैं. खासकर इस दौरान वजन के बढ़ जाने से मांओं की पीठ में अक्सर दर्द रहता है. योग सिखाने वाली सुजाने क्लोस लेमन कहती हैं, ''योग इसके लिए बहुत फायदेमंद है. योग के जरिए गर्भवस्था के दौरान महिलाओं की क्षमता बढ़ाई जा सकती है.''
यानि अब व्यायाम से बचने का कोई बहाना नहीं है. लेकिन हां, उन खेलों से जरूर बचने की जरूरत है जो कई तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं, मसलन क्रिकेट, हॉकी, रग्बी, या हैंड बॉल जैसे खेल.
निकोल गोएबेल/आरजे
होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखा जाए. इनसे मां और बच्चे दोनों को फायदा होता है.
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गर्भावस्था के दौरान मां कैसा महसूस कर रही है यह बहुत जरूरी है, इससे होने वाले बच्चे की सेहत पर भी असर पड़ता है. मां के लिए उसका बच्चा दुनिया की सबसे बड़ी खुशियों में से एक होता है. जरूरी है कि वह इस खुशी के एहसास को मरने न दे.
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मां औप बच्चे के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी घर के दूसरे सदस्यों पर भी होती है. शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण मां का मूड पल भर में बदल सकता है. ऐसे में बाकियों को सहयोग बनाकर चलना जरूरी है, खासकर पति को.
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सुबह नहाते समय हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. इसके बाद जैतून के तेल से मालिश मां के लिए फायदेमंद है, यह सलाह है जर्मन दाई हाएके सोयार्त्सा की.
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मां के शरीर में हो रहे हार्मोन परिवर्तन के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. हफ्ते में एक दिन चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल अच्छा है. एक चम्मच दही में कच्चा एवोकाडो मिलाकर लगाएं और दस मिनट बाद धो दें.
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गर्भावस्था के दौरान कसरत जरूरी है. आसन लगाकर पेट के निचले हिस्से से सांस खींचकर छोड़ना तनाव दूर करता है. इस दौरान दिमाग में एक ही ख्याल हो, "यह सांस मेरे बच्चे को छू कर गुजर रही है."
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सुबह बहुत कुछ खा सकना आसान नहीं, अक्सर सुबह के वक्त मां को उल्टी की शिकायत रहती है. हर्बल चाय या फिर हल्का फुल्का बिस्कुट या टोस्ट खाना बेहतर है. नाश्ते में इस बात पर ध्यान दें कि वह फाइबर वाला खाना हो. फल खाना और भी अच्छा है.
अक्सर गर्भावस्था के दौरान बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं. बालों के लिए इस दौरान हल्के केमिकल वाले शैंपू का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. हफ्ते में एक दिन एक चम्मच जैतून के तेल में दही और अंडे का पीला भाग मिलाकर लगाने से बालों की नमी लौट आती है. गर्भावस्था में हेयर कलर का इस्तेमाल ना करें.
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शरीर और दिमाग के स्वस्थ होने के साथ दोनों के बीच संतुलन बहुत जरूरी है. गर्भावस्था के दौरान पैदल चलना भी फायदेमंद है. स्वीमिंग के दौरान पानी से कमर को काफी राहत मिलती है.
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मां के लिए दांतों को साफ रखना भी जरूरी है, दिन में दो बार ब्रश करें लेकिन नर्म ब्रश से. शुरुआती छह महीनों में दांतों का खास ख्याल रखें और डेंटिस्ट से भी नियमित रूप से मिलते रहें.
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विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चे के लिए हरी सब्जियां और आयोडीन युक्त भोजन फायदेमंद है. बच्चे को खूब आयरन और कैल्शियम की भी जरूरत होती है. ध्यान रहे कि खानपान में इन चीजों की कमी नहीं होनी चाहिए. नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाना भी जरूरी है.
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दिन में करीब दो लीटर पानी पीना स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है. ज्यादा पानी पीने से मां का शरीर चुस्त महसूस करता है.