अमेरिका में खसरे के टीके से एक कैंसर पीड़ित महिला के इलाज में मदद मिली है. रिसर्चरों का दावा है कि यह तरीका कैंसर से निपटने की दिशा में अचूक इलाज साबित हो सकता है.
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इस इलाज को विकसित करने वाले डॉक्टर स्टीफन रसेल ने बताया, "हमें ऐसी थेरैपी मिल गई है जिसे मरीज को एक बार देने पर ज्यादा लंबे समय तक कैंसर को पनपने से रोका जा सकता है." उन्होंने कहा कि वह इसे एक जबरदस्त उपलब्धि मानते हैं.
इस थेरैपी को जिस महिला पर आजमाया गया उनकी उम्र 49 वर्ष है. वह अस्थिमज्जा के कैंसर से जूझ रही थीं. इसे मल्टिपल मायलोमा भी कहते हैं. ट्यूमर उनके माथे पर था, कैंसर उनकी अस्थिमज्जा के जरिए फैल रहा था. उन्हें मीजल्स वायरस की डोज, एमवी-एनआईएस दी गई जो कि मायलोमा प्लाज्मा कोशिकाओं के लिए घातक होती है.
खसरे के टीके की साधारण खुराक में मीजल वायरस की दस हजार इकाइयां होती हैं. जबकि इस रिसर्च में दी गई डोज में इकाइयों की संख्या सौ अरब थी. रसेल ने बताया कि खुराक देने के बाद महिला में कमाल का परिवर्तन देखा गया. हालांकि शुरुआत में कुछ मामूली विपरीत प्रभाव भी हुए, जैसे सिर में तेज दर्द होना. लेकिन धीरे धीरे उनके माथे पर से कैंसर गायब हो गया. कुछ और समय बाद कैंसर अस्थिमज्जा से भी साफ हो गया.
कैंसर से बचने के तरीके
कैंसर को जीवन का अंत नहीं समझ लेना चाहिए. वैज्ञानिकों को पता लग चुका है कि यह बीमारी होती कैसे है. फिर बचने के उपाय भी हो सकते हैं.
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किस्मत अपने हाथ
विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर के लगभग आधे मामले कम किए जा सकते हैं. कैंसर के ट्यूमर का हर पांचवां मामला सिगरेट पीने से होता है. इससे फेफड़ों के कैंसर के अलावा कई और तरह के ट्यूमर भी हो सकते हैं.
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मोटापे से खतरा
कैंसर की दूसरी सबसे बड़ी वजह मोटापा है. शरीर में जब इंसुलिन बढ़ता है तो वह हर तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा देता है. मोटी महिलाओं की वसा कोशिकाओं में सेक्स हॉर्मोन भी ज्यादा निकलते हैं जिससे गर्भाशय या स्तन कैंसर हो सकते हैं.
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आलसी मत बनिए
लंबे रिसर्च से पता चला है कि नियमित व्यायाम से ट्यूमर का खतरा कम हो जाता है. कारण है कसरत से शरीर में इंसुलिन का स्तर कम होना. जरूरी नहीं कि आप बहुत भागदौड़ वाले खेल ही खेलें. साइकिल चलाने और टहलने से भी फायदा है.
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ज्यादा न पीजिए
शराब से मुंह, गले और खाने की नली में ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है. धूम्रपान और शराब साथ लेने से कैंसर का खतरा 100 गुना बढ़ जाता है. अधिक से अधिक वाइन का एक ग्लास ही सेहत के लिए ठीक होता है.
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'रेड मीट' कम
आंतों के कैंसर के लिए इसे जिम्मेदार माना जाता है. दूसरी ओर मछली का मांस कैंसर से बचाता है.
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ज्यादा धूप नहीं
सूरज की पराबैंगनी किरणें शरीर में इतने अंदर तक जा सकती हैं कि कोशिकाओं में घुस कर जीनोम यानि आनुवांशिक संरचना बदल दें. 'सन टैन' के शौकीनों को ध्यान देना होगा क्योंकि ज्यादा धूप से त्वचा का कैंसर हो सकता है.
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आधुनिक दवाएं भी दोषी
एक्सरे से जीनोम यानि आनुवांशिक संरचना पर असर पड़ता है. लेकिन बदलती रोजमर्रा में मुश्किलें बहुत हैं. हवाई जहाजों में सफर के दौरान भी लोग कैंसर पैदा करने वाले विकिरण के संपर्क में आते हैं.
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संक्रमण से कैंसर
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संक्रमण से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है. इससे तस्वीर में दिखाई दे रहा बैक्टीरिया पेट में पहुंच जाता है और वहां कैंसर पैदा करता है. इन संक्रमणों से बचने के टीके लिए जा सकते हैं.
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इतनी बुरी नहीं गर्भनिरोधक गोलियां
इन गोलियों से स्तन कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है, लेकिन ओवरी या अंडाशय के कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है. कम से कम कैंसर के मामले में तो गोलियां लेना अच्छा है.
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बाकी प्रकृति जिम्मेदार
कई बार सारी अच्छी आदतों के बावजूद बीमारी हो सकती है. कभी उम्र का तकाजा ले डूबता है तो कभी पीढ़ी दर पीढ़ी जीन से होने वाली बीमारी. रिपोर्ट: ब्रिगिटे ओस्टेराथ/ऋतिका राय संपादन: ए जमाल
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रसेल ने बताया कि पूरी तरह ठीक होने में महिला को नौ महीने लगे. जब उनके माथे का ट्यूमर दोबारा लौटता हुआ नजर आया तो डॉक्टरों ने उसका लोकल रेडियोथेरैपी से इलाज किया. मिनियापोलिस स्टार ट्रिब्यून में छपी रिपोर्ट के अनुसार यह महिला फिलहाल स्वस्थ है. वह उम्मीद कर रही हैं कि अगले महीने भी जब उनके डॉक्टर उनकी रिपोर्ट लेकर आएंगे तो यही कहेंगे कि कैंसर दोबारा नहीं पनपा, वह अब भी कैंसर मुक्त हैं.
हालांकि इस शोध के अंतर्गत एक अन्य महिला पर आजमाया गया यही तरीका कारगर साबित नहीं हुआ. उनकी टांगों पर ट्यूमर थे, इस इलाज से उन्हें दूर नहीं किया जा सका. इमेजिंग की उच्च तकनीक का इस्तेमाल करके डॉक्टरों ने उनके शरीर में मीजल वायरस की गतिविधि को देखा. उन्होंने पाया कि वायरस उन सभी हिस्सों पर आक्रमण कर रहा है जिन हिस्सों में कैंसर विकसित हो रहा है.
इससे पहले छोटी डोज में यह टेस्ट आजमाया जा चुका था, लेकिन इतनी ज्यादा डोज के साथ ये दोनों पहले मामले थे. इन दोनों ही मिहलाओं के मामले में कैंसर उस हद तक पहुंच चुका था जहां इसका इलाज किसी और तरीके से संभव नहीं रह गया था. इन परिणामों ने कैंसर से इलाज के लिए उम्मीद जगाई है. हालांकि इस तरह की थेरैपी के आम होने से पहले अभी बहुत रिसर्च और बाकी है.