जयपुर आर्ट समिट में प्लास्टिक की गाय पर विरोध के बाद पुलिस आयोजकों को थाने ले गई और उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की. कलाकार सिद्धार्थ करारवल ने डीडब्ल्यू से बातचीत में बताया कि उन्होंने क्या सोचकर यह इंस्टॉलेशन बनाया था.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo
विज्ञापन
[No title]
This browser does not support the audio element.
कलाकार सिद्धार्थ करारवल ने यह गाय संदर्भ आर्ट रेसिडेंसी के दौरान तैयार की थी जिसे जयपुर आर्ट समिट में दिखाया जाना था. कलाकारों के साथ बुरे बरताव और प्लास्टिक इंस्टॉलेशन को नीचे उतार कर उसे तोड़फोड़ देने की घटना पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर खेद जताया है. राजस्थान के पुलिस कमिश्नर ने कलाकारों से माफी मांगी और बजाज नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ महेंद्र गुप्ता पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हटा दिया.
इस विषय पर आप क्यो सोचते हैं, नीचे दिए बॉक्स में अपनी राय साझा करें.
ये हैं भारत के बीफ खाने वाले
भारत में खानपान की आदतें केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं बल्कि धर्म, जाति, क्षेत्र और आय पर आधारित एक जटिल समीकरण से जुड़ी हैं. देखिए सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में कौन लोग गाय या भैंस का मांस खाते हैं.
तस्वीर: AP
राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ऑफिस एनएसएसओ के 2011-12 के आंकड़ें दिखाते हैं कि भारत में करीब 8 करोड़ लोग बीफ या भैंस का मीट खाता है.
तस्वीर: Shaikh Azizur Rahman
आंकड़ों के अनुसार बीफ यानि गौमांस और भैंस का मीट खाने वाले ये लोग सभी धर्मों और राज्यों में पाये जाते हैं. इन 8 करोड़ लोगों में करीब सवा करोड़ हिन्दू हैं.
तस्वीर: Getty Images/P. Guelland
एनएसएसओ के आंकड़ों से हाल के सालों में मीट की खपत बढ़ने का पता चलता है. इस सर्वे में करीब एक लाख लोगों से आंकड़ें इकट्ठे किए गए. देखा गया कि हफ्ते और महीने की औसत अवधि में एक परिवार खाने की किन चीजों पर कितना खर्च करता है.
तस्वीर: DW/S.Waheed
विश्व में मांस की खपत का लेखाजोखा करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था एफएओ की 2007 में जारी 177 देशों की सूची में भारत को अंतिम स्थान मिला. 43 किलो के विश्व औसत के मुकाबले भारत में प्रति व्यक्ति सालाना मांस की खपत मात्र 3.2 किलो दर्ज हुई.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/dpaweb
एफएओ बताता है कि दुनिया भर में लोगों की क्रय क्षमता बढ़ने, शहरीकरण और खानपान की आदतें बदलने के कारण मांस की खपत बढ़ी है. भारत में खपत विश्व औसत से काफी कम है लेकिन वह बीफ, भैंस के मांस और काराबीफ का सबसे बड़ा निर्यातक है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/U. Baumgarten
भारत में धर्म के आधार पर गाय या भैंस का मांस खाने वाला सबसे बड़ा समुदाय 6 करोड़ से अधिक मुसलमानों का है. संख्या के मामले में इसके बाद सबसे अधिक हिन्दू समुदाय आता है. जबकि प्रतिशत के अनुसार मुसलमानों के बाद ईसाई आते हैं.
तस्वीर: DW/S.Waheed
मुसलमानों के अलावा अनुसूचित जाति और जनजाति (एससी/एसटी) गाय या भैंसों का मीट खाने वाला सबसे बड़ा तबका है. हिन्दुओं में इसे खाने वाले 70 फीसदी से अधिक लोग एससी/एसटी, 21 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग और करीब 7 फीसदी उच्च जातियों से आते हैं.