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मंथन 57 में खास

११ अक्टूबर २०१३

दुनिया का सबसे बड़ा गेम्स मेला गेम्सकॉम भी जर्मनी में लगता है. यहां हर साल करीब तीन लाख लोग आते हैं, यह देखने कि गेम्स की दुनिया में क्या नया हो रहा है. मंथन में इस बार इसी पर होगी हमारी नजर..

तस्वीर: Ubisoft

युवा वैज्ञानिकों का एक दल अचानक गायब हो जाता है और उन्हें ढूंढना खेल का मकसद है. ऑल्टमाइंड्स नाम के इस गेम में एनिमेशन, टेक्स्ट और वीडियो एक साथ हैं. सच्चाई और कल्पना एक दूसरे में घुल जाती हैं. लेक्सिस न्यूमेरीक नाम की कंपनी ने इस गेम को बनाया है. पेरिस के पास स्थित यह कंपनी करीब बीस साल से गेम्स बना रही है. यहां काम करने वाले गेम डेवलपर जमील कमाल बताते हैं, "इस खेल में खिलाड़ी सुपरहीरो है और वह गूगल, फेसबुक और गूगलमैप्स का इस्तेमाल करता है."

उनका कहना है कि उनकी कंपनी को सफलता इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने ऐसे गेम्स बनाए जो पहले बाजार में नहीं थे, "जब हमने गेम्स बनाना शुरू किया उस समय बच्चों के लिए कोई गेम्स नहीं थे. हमारा पहला गेम लड़कियों के लिए था."

5,00,000 यूरो का एक गेम

फ्रांस में वीडियो गेम्स बनाने वाली 300 कंपनियां हैं. वे अपने कर्मचारियों की रचनात्मकता और उनकी शिक्षा का फायदा तो लेती ही हैं, साथ ही उन्हें सरकारी मदद भी मिलती है. फ्रांस में वीडियो गेम्स संस्कृति का हिस्सा बन गए हैं.

यूरोपीय स्तर पर मीडिया यूरोप फंड है, जो यूरोप के वीडियो गेम्स को मदद देता है. साथ ही राष्ट्रीय फिल्म फंड से भी सहायता मिलती है. ये इंटरएक्टिव वीडियो गेम्स को प्रोत्साहन देता है और गेम्स निर्माताओं की मदद करता है.

एक नया गेम बनाने में आराम से पांच लाख यूरो खर्च हो जाते हैं. इसलिए लेक्सिस न्यूमेरीक जैसी कामयाब कंपनियां भी डेवलपमेंट के लिए धन जुटाने के नए रास्ते ढूंढती हैं. कंपनी ने अपना पहला गेम लड़कियों के लिए बनाया था. इस बीच बाजार में जो गेम्स उपलब्ध हैं उनमें लड़कियों की छवि लोगों को आपत्तिजनक लग रही है. छोटे भड़काऊ कपड़े पहने नायिका को एक सेक्सी लुक देना जैसे बाजार की जरूरत बन गया है. इस बारे में गेम्स की दुनिया में क्या किया जा रहा है, यह भी मंथन के इस अंक में शामिल है.

कार में होटल, बॉल में बिजली

वीडियो गेम्स की दुनिया से ले चलेंगे आपको असली दुनिया में जो किसी सपने जैसी लगती है. जर्मनी के बॉन शहर में एक ऐसा हॉस्टल है, जहां के कमरे ईंट पत्थर से नहीं, कबाड़ से बने हैं. एक नए तजुर्बे के लिए हॉस्टल में सिर्फ जर्मनी ही नहीं, बल्कि नीदरलैंड्स, पोलैंड और रोमानिया के लोग भी पहुंचते हैं. जानिए कैसे एक पुरानी कार को होटल के फाइव स्टार कमरे जैसा बनाया गया है.

साथ ही बताएंगे आपको बिजली बनाने का एक अनोखा तरीका. यहां न ही सौर ऊर्जा का इस्तेमाल हो रहा है और ना ही पवन चक्कियों का. यह तकनीक कुछ ऐसी है कि बिजली खेल खेल में ही बन जाती है. दिखाएंगे आपको सॉकेट नाम का फुटबॉल जिसे शूट करने से ऊर्जा निकलती है. जैसे जैसे इसे खेला जाता है, इसके अंदर ही बिजली जमा होती रहती है. क्या है इस बॉल की कीमत, कहां बिक रही है यह बॉल जानिए मंथन के ताजा अंक में.

और आखिर में मिलवाएंगे आपको एक ऐसे कलाकार से जो शरीर को कुछ इस तरह से पेंट करता है कि आप पहचान ही नहीं पाएंगे कि आपके सामने कोई खड़ा है भी या नहीं. तिरोल पहाड़ियों में रहने वाले योहानेस श्टोएटर के लिए 12 साल से इंसानी जिस्म ही कैनवस है. लोगों के शरीरों पर बनाई गई तस्वीरों ने इन्हें कई पुरस्कार भी दिलाए हैं. पिछले साल वह बॉडीपेंटिंग में वर्ल्ड चैंपियन भी बन चुके हैं.

इन दिलचस्प रिपोर्टों के लिए देखना ना भूलें मंथन शनिवार सुबह 10.30 बजे डीडी-1 पर.

आईबी/एएम

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