जी20 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से पाकिस्तान के साथ मिलकर बनाए जा रहे आर्थिक गलियारे पर सवाल उठाए. चीन ने भी भारत से एक दूसरे की चिंताओं को समझने और सृजनात्मक समाधान निकालने की अपील की है.
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चीन में आयोजित हुए जी20 सम्मेलन के दौरान मेजबान देश चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत से सहयोग के मुद्दे पर कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार सुधरते संबंधों में आगे और भी आपसी समझ और भरोसा विकसित करने की जरूरत है. चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में जिनपिंग ने कहा, "हमें एक दूसरे की चिंताओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए और जिन सवालों पर विवाद हों उन्हें सृजनात्मक तरीके से सुलझाना चाहिए." चीनी राष्ट्रपति ने दोहराया कि "चीन भारत के साथ बड़ी मुश्किल से बेहतर हुए द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखने के लिए पूरी मेहनत करने को तैयार है."
सबसे ऊंचे पुल
क्या आपको ऊंचाई से डर लगता है, अगर हां, तो इन जगहों पर आप न जाएं. ये दुनिया के सबसे ऊंचे पुल हैं.
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नीचे देखने पर घबराहट
जल्द ही यह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल कहलायेगा. ये पैदल पुल चीन के हुनान प्रांत के झांगजियाजी नेशनल पार्क में बन रहा है. इस पर कांच लगाया जाएगा ताकि नीचे का नजारा दिखे. यह पुल 300 मीटर ऊंचा और 430 मीटर लंबा है.
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जम्परों का आकर्षण
पुल का नाम "ब्रेव मेन" रखा गया है. रस्सियों पर झूलने वाले इस पुल को पार करने के लिए हिम्मत चाहिए. पुल पर बंजी जंपरों के लिए नीचे छलांग मारने की सुविधा भी है. यह दुनिया का सबसे ऊंचा बंजी जंप पुल भी है.
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सिर्फ कांच
पुल पर काम भी उन्हीं लोगों ने किया है जो ऊंचाई से नहीं डरते. पहला कांच लगाने के बाद कर्मचारियों ने जश्न जैसा भी मनाया. पुल के डिजायनर हाइम डोटान ने स्टील या कंक्रीट की जगह कांच का फर्श लगाने का फैसला किया. अगस्त की शुरुआत में पुल का उद्घाटन होगा. इस पर फैशन शो भी होंगे.
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कहां फंस गया
चीन में कांच वाले ऐसे कुछ और पुल हैं. वे इतने ऊंचे नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद कांच के ऊपर चलने में अच्छे अच्छों की हालत कुछ ऐसी हो जाती है.
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मियो वियादुक, फ्रांस
चीन के इस निर्माण से पहले सबसे ज्यादा ऊंचे पुल का रिकॉर्ड फ्रांस के मियो वियादुक ब्रिज के नाम था. गाड़ियों के लिए बना यह पुल 343 मीटर ऊंचा है.
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रस्की ब्रिज, रूस
रूस ने इस पुल के जरिये बास्फोरस की खाड़ी को जोड़ दिया. तीन किलोमीटर लंबे इस पुल की ऊंचाई 320 मीटर है.
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सुतोंग ब्रिज, चीन
यांगत्से नदी पर बना यह पुल 306 मीटर ऊंचा है. इसका निर्माण जून 2003 में शुरू हुआ और मई 2008 में पुल का उद्धाटन हुआ.
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करीब 46 अरब डॉलर की लागत से बनाया जा रहा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पाकिस्तानी कश्मीर के इलाके से होकर गुजरता है. पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से यह अपेक्षा जताई कि इस विवादित इलाके और वहां से पैदा होने वाले आतंकवाद के मद्देनजर चीन को भी भारत की रणनीतिक चिंताओं के प्रति "संवेदनशील" होना चाहिए.
चीन से लगी सीमा पर मिसाइलों की तैनाती
चीनी रक्षा मंत्रालय ने अगस्त में कहा था कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए वे भारत की ओर से और प्रयासों की उम्मीद करते हैं ना कि इसे विपरीत दिशा में ले जाने की. यह बयान तब आया था जब भारत ने चीन से लगी अपनी सीमा पर एडवांस्ड क्रूज मिसाइलें तैनात करने का निर्णय लिया था.
विवादित पानी में पांव फैलाता चीन
हाल ही में सामने आए उपग्रह चित्र देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि दक्षिण चीन सागर की विवादित जल सीमा में उभरते जमीन के टुकड़े चीन के सैनिक ठिकाने हो सकते हैं. हैरान करने वाली तस्वीरें.
तस्वीर: CSIS Asia Maritime Transparency Initiative/DigitalGlobe
फायरी क्रॉस रीफ पर चीन ने निर्माण कार्य जारी रखा हुआ है. 28 जून 2015 की यह तस्वीर दिखाती है कि यहां करीब 3,000 मीटर लंबी हवाई पट्टी लगभग बन कर तैयार हो चुकी है. फोटो में दो हैलीपैड, संचार एंटीना और रडार जैसी संरचना भी दिखती है.
तस्वीर: Asia Maritime Transparency Iniative
समुद्र के विवादित हिस्से के स्प्रैटली द्वीप के पश्चिम में स्थित फायरी क्रॉस रीफ पर निर्माण कार्य अगस्त 2014 में शुरु हुआ. ड्रेजर उपकरणों की मदद से रीफ पर करीब 3,000 मीटर लंबी और 200 से 300 मीटर चौड़ी सतह तैयार कर ली गई है.
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नवंबर 2014 की इस तस्वीर में रीफ पर चल रहे निर्माण कार्य को साफ साफ देखा जा सकता है. कथित तौर पर रीफ पर कुछ मिलिट्री टैंक और बैरक पहुंचाए जा चुके हैं.
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साउथ जॉनसन रीफ ऐसी पहली रीफ थी जिस पर निर्माण कार्य सबसे पहले पूरा हुआ. हाल की ही यह तस्वीर दिखाती है कि उत्तरी छोर पर एक रडार का काम लगभग पूरा हो गया है. एशिया मेरीटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव (एएमटीआई) के अनुसार अब यहां एक विशाल, बहुमंजिले सैनिक सुविधा केंद्र का निर्माण चल रहा है.
तस्वीर: Asia Maritime Transparency Iniative
ऊर्जा के समृद्ध साधनों से भरे इन क्षेत्रों पर चीन अपना आधिपत्य जताता आया है. यहां नौवहन मार्ग से करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का कारोबार होता है. अमेरिका इस निर्माण को ग्रेट वॉल ऑफ सैंड कह चुका है तो चीन समुद्री संसाधनों पर अपना ऐतिहासिक अधिकार मानता है.
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फिलिपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान ने भी इन हिस्सों पर अपने अपने दावे पेश किए हैं. इसके कारण कई बार जमीनी सीमा पर कई विवाद उभरे. 2014 में हनोई और चीन के बीच इस हिस्से में तेल के विशाल भंडार पर हक के मामले ने काफी तूल पकड़ा था.
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अमेरिका को चिंता इस इलाके में चीन की बढ़ती सैनिक शक्ति की है. पूरे प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में इससे अमेरिकी नौसैनिक और आर्थिक शक्ति के कम होने का अंदेशा है. वॉशिंगटन बार बार चीन से कहता आया है कि वह इन विवादित क्षेत्रों में अपना आधिपत्य स्थापित करने वाले प्रोजेक्ट बंद करे, जिन्हें चीन ठुकराता आया है.
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फिलिपींस ने यूएन में इस बाबत 2014 में एक आधिकारिक शिकायत भी दर्ज कराई है. शिकायत में "मनीला और चीन के इस तरह के प्रयासों से पूरे साउथ चाइना सी में जैवविविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को अभूतपूर्व नुकसान पहुंचाने" की बात कही गई. यह भी दावा है कि यहां कोरल रीफ के विनाश के कारण सालाना करीब 10 करोड़ डॉलर का आर्थिक नुकसान भी हो रहा है.
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भारतीय सेना के अधिकारियों का कहना है कि चीन के साथ लगी सीमा पर सेना की टुकड़ियां और ब्रह्मोस मिसाइल तैनात किए जाने की योजना है. ब्रह्मोस मिसाइल भारत-रूस संयुक्त उद्यम का नतीजा है. पूर्वोत्तर भारत के करीब 90,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके पर चीन भी अपना दावा करता है. भारत का मानना है कि चीन ने हिमालय के पश्चिम में अक्साई चीन पठार में उसके 38,000 वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा किया हुआ है.
पाकिस्तान-चीन की नजदीकी पर चिंता
दूसरी ओर परमाणु-शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों भारत और पाकिस्तान के संबंधों में दशकों से चले आ रहे सीमा विवादों को अब भी पूरी तरह सुलझाया नहीं जा सका है. भारत को उसके चिरप्रतिद्वन्द्वी पाकिस्तान को मिल रहे चीन के भारी सहयोग पर चिंता है. पाकिस्तान ने चीन के साथ एक दीर्घकालिक रक्षा समझौते और सुरक्षा सहयोग पर बातचीत करने पर सहमति बना ली है. भारत और अमेरिका के बीच और मजबूत होते रक्षा संबंधों को लेकर चिंतित पाकिस्तानी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अध्यक्षता वाली बैठक में 15 जुलाई को यह निर्णय लिया था.
विएतनाम के प्रधानमंत्री के साथ भारतीय पीएम नरेंद्र मोदीतस्वीर: Reuters/Kham
प्रधानमंत्री मोदी अपनी वियतनाम यात्रा के बाद जी20 सम्मेलन के लिए चीन पहुंचे थे. वहां मोदी ने साउथ-चाइना सी को लेकर चीन के साथ विवादों में फंसे वियतनाम को रक्षा सहयोग के क्षेत्र में 50 करोड़ डॉलर का कर्ज मुहैया कराने की पेशकश की. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि ब्रह्मोस मिसाइलें बनाने वाले ब्रह्मोस एयरोस्पेस को मोदी सरकार ने जिन पांच देशों को मिसाइलों की बिक्री तेज किए जाने का आदेश दिया है उनमें वियतनाम सबसे ऊपर है.