चीन ने अमेरिका से कहा कि पाकिस्तान पर उंगली उठाने से आतंकवाद से लड़ने में मदद नहीं मिलेगी.
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अमेरिका ने सुझाव दिया था कि चीन, पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने के लिए राजी करे. इस पर चीन ने पाकिस्तान का बचाव करते हुए दो टूक कहा कि इस्लामाबाद को आतंकवाद के साथ जोड़ना 'हितकर' नहीं होगा.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने कहा, "हमने कई बार कहा है कि पाकिस्तान ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण त्याग और योगदान दिया है और देशों को एक दूसरे पर उंगली उठाने के बजाए समान हितों के आधार पर आतंकरोधी सहयोग को मजबूती देनी चाहिए." लु कांग ने मीडिया से कहा, "यह वैश्विक आतंकरोधी प्रयासों के लिए हितकारी नहीं है."
पिछले सप्ताह एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि चीन, पाकिस्तान में आतंकियों के सुरक्षित आश्रयों को उखाड़ फेंकने में मददगार साबित हो सकता है. इस पर लु कांग ने कहा, "चीन हमेशा से किसी देश विशेष को आतंकवाद से जोड़ने का विरोध करता रहा है और हम किसी एक देश पर आतंकरोधी गतिविधियों की जिम्मेदारी नहीं थोप सकते." उन्होंने आगे कहा, "वास्तव में, चीन उन देशों का बचाव करता है, जो आतंकरोधी प्रयासों का सही तरीके से निर्वहन करते हैं. चीन आपसी विश्वास और सम्मान के आधार पर आतंकवाद के मामले पर सभी वैश्विक संयुक्त प्रयासों का भी स्वागत करता है."
चीन ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपने 'मजबूत भाई' पाकिस्तान का बचाव किया. बीजिंग का कहना है कि इस्लामाबाद ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बहुत बलिदान दिया है और शानदार काम किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति के सभी सहायता को रोके जाने वाले ट्वीट के बाद भी चीन ने पाकिस्तान के बचाव में कूदने में देर नहीं की थी.
ट्रंप ने ट्वीट में कहा था कि उनका प्रशासन पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी सहायता पर रोक लगा रहा है क्योंकि उसने धन का इस्तेमाल आतंकवाद को खत्म करने के लिए नहीं किया. ट्रंप की घोषणा के कुछ दिन बाद वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद को दी जानी वाली सुरक्षा मदद रद्द कर दी. चीन ने पाकिस्तान में भारी मात्रा में निवेश किया हुआ है. चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में पचास अरब डॉलर का निवेश किया है.
आईएएनएस/आईबी
क्या है अमेरिकी मदद का मतलब
साल 2018 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 25.5 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद रोक दी. इसके पहले अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के बजट में कटौती की. जानते हैं इस अमेरिकी मदद के बारे में.
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क्या है अमेरिकी मदद
अमेरिका की वर्तमान विदेशी सहायता प्रणाली को 1961 के विदेशी सहायता अधिनियम के तहत तैयार किया गया था. इसका मकसद दुनिया भर में अमेरिकी सरकार की ओर से उठाए गए सहायता प्रयासों को ठीक से लागू करना था. अमेरिका में इस मदद को "दुनिया के साथ संसाधन वितरण" कहा जाता है.
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किस क्षेत्र में दी जाती है
इस सहायता में केवल विदेशी सैन्य और रक्षा मदद ही शामिल नहीं होती बल्कि तकनीकी, शैक्षिक और अन्य सहयोग भी शामिल होता है. यह मदद विदेशी सरकारों, सैन्य बल, कारोबारी समूह या चैरिटेबल समूह मसलन संयुक्त राष्ट्र या अन्य गैर सरकारी संगठन को दी जा सकती है.
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कितनी मदद देता है अमेरिका
कुछ अध्ययनों के मुताबिक अमेरिका कुल संघीय बजट का 1.3 फीसदी हिस्सा बतौर मदद देता है. लेकिन मदद का आंकड़ा हर साल बदलता रहता है. जानकारों के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को बड़े स्तर पर मदद दी.
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कब हुआ मदद में इजाफा
1990 के दशक में ऐसी ही मदद सोवियत संघ को दी गई जो बाद में कम कर दी गई. 9/11 के हमलों के बाद मदद की सीमा बढ़ाई गई. विशेषज्ञों के मुताबिक जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा इराक और अफगानिस्तान में दी जाने वाली मदद और वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रम के चलते इसमें बढ़ोत्तरी हुई.
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कैसे किया जाता है खर्च
साल 2015 के आंकड़ों मुताबिक, कुल मदद का 38 फीसदी हिस्सा दीर्घकालीन विकास सहायता के रूप में दिया जाता है. यह विश्व के उन गरीब देशों के दी जाती है जिनकी अर्थव्यवस्था तो कमजोर है ही साथ ही स्वास्थ्य मानकों में भी पिछड़े हुए हैं.
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संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा
इसका 15 फीसदी हिस्सा विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के विकास कार्यक्रम में भी जाता है. इसके अतिरिक्त 35 फीसदी हिस्सा सैन्य और सुरक्षा सहायता है, 16 फीसदी हिस्सा मानवीय मदद मसलन भूकंप, सूखा, युद्ध आदि और 11 फीसदी राजनीतिक मदद के रूप में शामिल है.
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कौन करता है मदद का प्रबंधन
अमेरिकी विदेशी सहायता के प्रबंधन में तकरीबन 21 एजेंसियां शामिल हैं. लेकिन 1961 के कानून मुताबिक अमेरिकी सरकार ने यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटररनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) बनाई. यह एक एक अर्ध-स्वतंत्र एजेंसी है जो राष्ट्रपति, आंतरिक मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल के निर्देशों के तहत काम करती है. हालांकि इसके अलावा तमाम अन्य एजेंसियां भी विदेशों में दी जाने वाली मदद का प्रबंधन करती हैं.
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किन देशों को मिलती हैं मदद
दुनिया के 200 से भी ज्यादा देशों को अमेरिका मदद देता है. साल 2015 के आंकड़ों मुताबिक, सबसे अधिक मदद पाने मुख्य देश हैं, अफगानिस्तान, इस्राएल, इराक, मिस्र और जॉर्डन. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट मुताबिक अफगानिस्तान को मदद का बड़ा हिस्सा सुरक्षा कारणों से मिलता है, वहीं इस्राएल को सैन्य मदद दी जाती है. मिस्र और इराक को भी सुरक्षा के लिहाज से दी मदद दी जाती है.
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अफ्रीका भी सूची में
अमेरिका से विकास के लिए जिन देशों को मदद मिलती है उनमें शीर्ष 10 में अफ्रीकी देश आते हैं. कुछ हिस्सा संयुक्त राष्ट्र और अन्य संस्थाओं को भी जाता है.
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कितना बड़ा दानी है अमेरिका
विदेशियों को मदद से लिहाज से देखा जाए तो अमेरिका सबसे बड़ा दानी है. इसके बाद दूसरे स्थान पर ब्रिटेन और तीसरे पर जर्मनी, चौथे पर फ्रांस और पांचवे पर जापान का नंबर आता है.