पूर्वी जर्मनी के शहर ट्रोएगलित्स में शरणार्थियों के एक घर में लगी आग के कारण का अभी भी कुछ पता नहीं लगा है. पुलिस का कहना है कि यह नस्लभेद से प्रेरित हिंसा का मामला हो सकता है.
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शरणार्थी निवास में फिलहाल एक दम्पति ही रह रहा था. मई में इस इमारत में चालीस शरणार्थियों को ठहराए जाने की योजना थी. पुलिस के अनुसार आग इतनी भयानक थी कि मकान का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया और दम्पति बाल बाल बचा. आग स्थानीय समय के अनुसार सुबह दो बजे लगी. रविवार तक पुलिस वारदात की जगह से जरूरी सबूत जमा कर चुकी थी. फिलहाल कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गयी है और पुलिस का कहना है कि आग के कारण के बारे में ठीक तरह से कुछ कहा नहीं जा सकता. लेकिन माना जा रहा है कि नस्लभेदी हिंसा के तहत जानबूझ कर यह हमला किया गया.
ट्रोएगलित्स के पूर्व मेयर मार्कुस निएर्थतस्वीर: picture-alliance/L. Schulze
जर्मनी का यह शहर पहले भी विदेशियों के साथ हिंसा के कारण सुर्खियों में रहा है. मात्र 2,800 लोगों की आबादी वाला यह शहर पिछले महीने तब चर्चा का विषय बना जब मेयर मार्कुस निएर्थ को नवनाजियों के दबाव के चलते अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. शहर में चालीस शरणार्थियों को लेने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन हुए और उग्रदक्षिणपंथियों ने मेयर के घर के बाहर नारेबाजी भी की. जर्मन अखबार बर्लिनर टागेसश्पीगल को दिए इंटरव्यू में पूर्व मेयर ने कहा कि उन्हें यकीन है कि यह हमला योजना के तहत किया गया है और हमलावर यह जानते थे कि अंदर लोग हैं. निएर्थ ने कहा, "मैं हैरान हूं, दुखी हूं और साथ ही साथ गुस्से में भी हूं." उन्होंने कहा कि शहर "कभी इस हादसे से उबर नहीं पाएगा".
शनिवार को हुए इस हमले से ना केवल जर्मनी, बल्कि पूरे यूरोप में नाराजगी का माहौल है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष थोरबियोर्न यागलांड ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि ऐसी घटना से पूरे यूरोप को सचेत हो जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "नस्लवाद, जातिवाद, राजनीतिक और धार्मिक कट्टरपंथ लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं."
फिलहाल इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि जिन चालीस शरणार्थियों को यहां ठहराया जाना था उन्हें अब कहां ले जाया जाएगा. सीरिया, इराक और उत्तरी अफ्रीका में चल रहे तनाव के कारण जर्मनी में शरणार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. पिछले दो साल में जर्मनी में शरणार्थियों के जितने आवेदन आए हैं, उतने यूरोपीय संघ के और किसी भी देश में दर्ज नहीं किए गए हैं. जर्मनी के पास फिलहाल डेढ़ लाख से ज्यादा आवेदन मौजूद हैं. इसके साथ साथ साल 2014 में विदेशियों के प्रति हिंसा के मामले भी बढे हैं.
आईबी/एमजे (डीपीए, एएफपी)
शरण की मुश्किल
उन देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है जहां ये लोग शरण के लिए पहुंच रहे हैं. जर्मनी पूरा जोर लगा कर इन लोगों को शरण देने की कोशिश में है.
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खास आवास
तेजी से बढ़ रहे शरणार्थियों की संख्या के कारण हर राज्य में आप्रवासियों के लिए विशेष ठिकाने बनाए गए हैं जहां ये शरणार्थी आवेदन स्वीकृत होने तक रह सकते हैं. पुराने अस्पतालों, मकानों और होटलों को भी इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
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होटल किराए पर
जर्मनी के कई शहरों में शरणार्थियों को जगह देने के लिए होटेल किराए पर लिए गए हैं. आना नाम का एक होटल फ्रैंकफर्ट में किराए पर लिया गया. इतना ही नहीं कोलोन में तो नीलामी में एक चार सितारा होटल (तस्वीर में) को शरणार्थियों के लिए खरीद लिया गया.
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जहाजों में
बंदरगाह शहरों में पुराने जहाजों को भी इन लोगों के लिए उपयोग में लिया जा रहा है. कई शहरों में सुपर मार्केट के खाली गोदामों में या फिर कंटेनरों में भी रहने की व्यवस्था की जा रही है.
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नई नीति
सितंबर में ही जर्मनी ने शरणार्थी नीति में बदलाव किए हैं. नई नीति के मुताबिक अब बाल्कान देशों से किसी को जर्मनी में शरण नहीं दी जाएगी. 2013 में डेढ़ फीसदी शरणार्थी सर्बिया, मैसेडोनिया और बोस्निया हर्जेगोविना से आए. कई अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों ने बर्लिन में कुछ इस तरह से घर बना लिए थे.
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समाज साथ आए
शुरुआत में जर्मनी में शरणार्थी आवास बनाए जाने का विरोध हुआ. लेकिन धीरे धीरे शहरों ने स्थानीय लोगों को अपने साथ लेना शुरू किया. अब ये लोग भी आप्रवासियों की मदद करने के लिए तैयार हुए हैं और लोगों में जागरूकता बढ़ रही है.
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स्कूलों में
सीरिया और इराक से आने वाले बच्चों को अक्सर मुश्किल होती है कि वह अपनी पढ़ाई कहां करें. कई स्कूलों में खास सुविधा शुरू की गई है ताकि ये बच्चे भी स्कूलों में पढ़ाई कर सकें. भाषा सीखने के लिए उन्हें अलग से पढ़ाया भी जाता है.
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60 फीसदी ज्यादा
जर्मनी के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2014 में जनवरी से लेकर अक्टूबर तक एक लाख पंद्रह हजार लोग जर्मनी में शरण के लिए पहुंचे. ये संख्या पिछले साल की तुलना में 60 फीसदी ज्यादा है.
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बढ़ेगी संख्या
इराक और सीरिया में जारी संघर्ष के कारण जर्मनी सहित यूरोपीय देशों में शरण की मांग करने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था के मुताबिक सीरिया और इराक से शरण मांगने वाले लोगों की संख्या सात लाख तक पहुंच सकती है.