न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन ब्रिज पर अचानक सफेद झंडे लहराने की गुत्थी सुलझती दिख रही है. जर्मनी के दो कलाकारों का दावा है कि उन्होंने ही अमेरिकी ध्वज हटा कर वहां सफेद झंडे फहरा दिए.
तस्वीर: Getty Images
विज्ञापन
"सार्वजनिक जगहों की खूबसूरती" का जश्न मनाने के लिए जर्मनी के दो कलाकारों ने 22 जुलाई को चुपके से यह काम किया, जिससे न्यूयॉर्क के सुरक्षा अधिकारियों की नींद हराम हो गई. कुछ लोगों ने इसे प्रैंक समझा, जबकि कुछ का कहना था कि इतने संवेदनशील इलाके में ऐसा करना आसान काम नहीं.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी के 37 साल के मीशा लाइनकॉफ और 35 वर्षीय माथियास वेर्मके चुपचाप 84 मीटर ऊंची ध्वजारोहण मीनार पर चढ़े और उन्होंने अमेरिका के झंडे हटा दिए. अखबार का दावा है कि इन दोनों ने जर्मनी से फोन पर उनसे बात की और अपने दावे के समर्थन में तस्वीरें और वीडियो पेश किए. ये वीडियो झंडे के ऊपर से फिल्माए गए थे.
न्यूयॉर्क शहर का विहंगम दृश्यतस्वीर: Saul Loeb/AFP/Getty Images
कलाकारों का कहना है कि वे जर्मन डिजाइनर जॉन रोएबलिंग की बरसी को इस तरह मनाना चाहते थे, जिन्होंने इस ब्रिज का डिजाइन तैयार किया था. उनकी मौत 22 जुलाई, 1869 को हुई थी. लाइनकॉफ ने कहा, "बर्लिन में रहते हुए हम आश्चर्यचकित हैं कि इस बात पर इतनी प्रतिक्रिया हुई. हम न्यूयॉर्क पुलिस को शर्मिंदा नहीं करना चाहते थे." वेर्मके ने भी कहा कि यह अमेरिका विरोधी गतिविधि नहीं थी. अब न्यूयॉर्क के अधिकारियों पर निर्भर करता है कि क्या वे इन दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहते हैं.
इस घटना के बाद पुलिस कमिश्नर जॉन मिलर ने कहा था, "हम इन चीजों को हल्के में नहीं लेना चाहते. यह कोई मजाक या कला नहीं है." इन दोनों कलाकारों ने दूसरे शहरों में भी ऐसा कारनामा किया है. उन्होंने अखबार को पुरानी तस्वीरें भी दी हैं, जिसमें उन्होंने टोक्यो और वियेना के पुलों पर ऐसा ही किया था. उन्होंने 2007 में ब्रुकलिन ब्रिज के तारों में बैलून भी लगा दिए थे, जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया.
एजेए/एएम (डीपीए)
इतिहास का गुम कलाकार
आज भले ही लोग उन्हें न जानते हों लेकिन जर्मनी के वास्तुकार और पुरातत्वविद फ्रांस क्रिस्टियान गाऊ ने मिस्र की नील नदी के पास के इलाकों खासकर नूबिया क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता को मसझने में बहुत अहम भूमिका निभाई है.
तस्वीर: Foustontene - Fotolia.com
खोज की यात्रा
प्राचीन मिस्र की सभ्यता ने कई जर्मनों को प्रभावित किया है. जर्मन वास्तुकार फ्रांस क्रिस्टियान गाऊ ने इसी जिज्ञासा में नूबिया की यात्रा की जो उस समय मिस्र और सूडान का हिस्सा था. नील नदी के आसपास पूजाघरों वाले इलाकों को दस्तावेज की शक्ल दे कर चित्रण करने वाले गाऊ पहले कलाकार थे. इस तस्वीर में उन्होंने देंदूर के पूजाघर को कैनवास पर उतारा.
तस्वीर: Kupferstichkabinett Wien
जोखिम और क्रांति
फ्रांस क्रिस्टियान गाऊ खतरा उठाने में पीछे नहीं रहते थे. गाऊ कोलोन में पैदा हुए थे यहीं उनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई है. पढ़ाई के दौरान वह जर्मनी से पेरिस चले गए. फ्रांसीसी क्रांति ने उन्हें अपनी ओर खींचा.
तस्वीर: Staatliche Museen/Nationalgalerie Berlin
पेरिस से रोम
1818 से 1820 तक के गाऊ नेपोलियन बोनापार्ट के लिए घूमे. उन्हें नेपोलियन का मकबरा बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन फ्रांस की रूस पर चढ़ाई करने के बाद इस पर पानी फिर गया. गाऊ इसके बाद रोम चले गए.
तस्वीर: picture alliance/Imagno
अनछुआ इलाका
बास्तुकला का बाजार सुस्त पड़ने से गाऊ की हालत भी खराब हो गई.तब भी उन्होंने लोगों से पैसे उधार लिए और नील नदी के किनारे खड़े मंदिर पर शोध कार्य शुरू किया. इससे पहले बहुत ही कम यूरोपीय कलाकारों ने इस तरफ ध्यान दिया था.
तस्वीर: Kupferstichkabinett Wien
बाढ़ की मार
ऊ ने अपने भ्रमण के दौरान जिन मंदिरों का लेखा जोखा तैयार किया वे अब नहीं हैं. असवान बांध के बनने के दौरान कई बाढ़ की भेंट चढ़ गए. इनमें से कई नष्ट करके दूसरे ठिकानों पर बनाए गए जैसे इस तस्वीर में दिखाया गया कलब्शा मंदिर. आज गाऊ के बनाए चित्र प्राचीन मिस्र सभ्यता के प्रमुख प्रमाण हैं.
तस्वीर: Kupferstichkabinett Wien
अबू सिंबेल मंदिर
अबू सिंबेल मंदिर पर गाऊ का काम बहुत बड़ा योगदान है. यह मंदिर अब यूनेस्को के तहत विश्व धरोहर है. गाऊ पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1264 बीसी में बने इन मंदिरों की आंतरिक सज्जा का लेखा जोखा जमा किया. इस तस्वीर में अबू सिंबेल का हाथर मंदिर दिखाया गया है.
तस्वीर: Kupferstichkabinett Wien
सटीक रिकॉर्ड
गाऊ की चित्रकारी एकदम फोटो की तरह सटीक होती थी. 1850 फ्रांसीसी फोटोग्राफर में मॉरिस दु कांप की यह खींची हुई यह तस्वीर इस बात की पुष्टि करती है. गाऊ के 30 साल बाद उन्होंने भी मिस्र के इन इलाकों की यात्रा की.
तस्वीर: Rheinisches Bildarchiv
भ्रमण पर किताब
गाऊ 1819 में एलेक्जेंड्रिया वापस लौटे. बाद में वह पेरिस, फिलिस्तीन और रोम गए. पेरिस में उन्होंने नूबिया के बारे में अध्ययन शुरू किया. नूबिया के बारे में जर्मन और फ्रेंच भाषाओं में छपी उनकी किताबें खूब पसंद की गईं. उनकी चित्रकारी को तांबे पर नक्श किया गया.
तस्वीर: Kupferstichkabinett Wien
पर्यटन में मदद
गाऊ के चित्रों और किताबों ने मिस्र के बारे में पुरातत्व शोधों में मदद की, साथ ही इससे वहां के पर्यटन को भी फायदा मिला. उनके काम ने कलाकारों को भी यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया. नॉबर्ट बिटनर की वॉटर कलर से बनाई गई यह पेंटिंग भी कुछ ऐसा ही दिखाती है.
तस्वीर: Kupferstichkabinett Wien
दो देशों के बीच पुल
मिस्र के बारे में अपने काम के लिए गाऊ को फ्रांस में सम्मानित किया गया. उन्होंने बाद में फ्रांसीसी नागरिकता ले ली. हालांकि कोलोन के कैथीड्रल को बनाने में उनका योगदान रहा. वास्तुकला और पुरातत्व के क्षेत्र में उनका योगदान जर्मनी और फ्रांस दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहा.