भारतीय सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में एक पाकिस्तान आतंकी को कब्जे में लिया है. बीते महीनों में भारत-पाकिस्तान सीमा पर नियमित गोलीबारी हुई है. इसके बीच अगस्त में ही दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिलने वाले हैं.
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स्थानीय लोगों की मदद से नावेद नाम के इस शख्स ने अपने दूसरे साथियों के साथ जम्मू और कश्मीर के ऊधमपुर में बीएसएफ काफिले पर हमला बोला था. पंजाब के दीनानगर पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के केवल नौ दिन बाद ही ऊधमपुर जिले में हुआ यह आतंकी हमला पिछले एक दशक में पहला मामला है. ऊधमपुर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के काफिले पर हमला करने वाले आतंकवादियों में से एक को जिंदा पकड़ लिया गया. आधिकारिक सूत्रों ने पकड़े गए आतंकवादी की पहचान मोहम्मद नवीद याकूब के रूप में की है जो पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है. हमले में सीमा सुरक्षा बल के दो लोग मारे गए जबकि 11 लोग घायल हुए.
पूछताछ में नवीद ने बताया कि करीब दो महीने पहले वह अपने चार और साथियों के साथ कश्मीर घाटी में दाखिल होने की कोशिश की थी लेकिन फिर आगे बढ़ने में असफल रहने पर उन्हें बारामुला होते हुए लौटना पड़ा. बाद में नवीद और तीन अन्य आतंकियों ने बारामुला इलाके में ही बाड़ को काटकर घुसने में सफलता पाई और कुछ दिनों तक तंगमर्ग और बाबा रेशी में छुपे रहे. इसके बाद दो हिस्सों में बंटकर नवीद अपने एक साथी नोमान के साथ दक्षिण कश्मीर के कुलगाम पहुंचा, जहां से उन दोनों ने जम्मू के ऊधमपुर जाने के लिए सवारी ली. पकड़े गए आतंकी ने बताया है कि उसे लश्कर ए तैयबा ने ट्रेनिंग दी थी.
लोकसभा में एक बयान में भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को कब्जे में लिए गए आतंकवादी के बारे में जानकारी दी. सिंह ने बताया कि जिंदा गिरफ्त में लिए गए नवीद से सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकियों के निशाने के बारे में सूचना ली जाएगी. इस बीच यह भी साफ हो गया है कि भारत इन आतंकी घटनाओं के बावजूद पड़ोसी देश के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख स्तर पर बातचीत की योजना पर अडिग है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, "23-24 अगस्त को दोनों देशों के एनएसए के बीच वार्ता आयोजित करने के हमारे प्रस्ताव पर अभी इस्लामाबाद की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है. वार्ता का मेजबान देश होने के कारण भारत ने ये तारीखें भारत के राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार अजित डोवाल और पाकिस्तानी सलाहकार सरताज अजीज को भेजी हैं. प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ ने जुलाई में ही रूस के उफा में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी और बातचीत को आगे बढ़ाने का फैसला किया था.
आरआर/एमजे (पीटीआई)
दोस्ती की बांह पर आतंकियों के हमले
भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी शांति वार्ता की कोशिशें होती हैं, तभी कुछ ऐसा होता है कि माहौल बिगड़ जाता है. एक नजर उन घटनाओं पर जिन्होंने दोनों देशों को बार बार बातचीत की मेज से युद्ध के उन्माद तक पहुंचाया.
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कारगिल युद्ध
अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ की अगुवाई में भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती नए मुकाम पर थी. बसें चल रही थीं, आम लोग आसानी से इधर उधर आ रहे थे. तभी मई 1999 में भारत प्रशासित कश्मीर की चोटियों पर पाकिस्तानी सैनिकों का कब्जा हुआ. इसके बाद नवाज शरीफ का तख्तापलट हुआ और कारगिल के मास्टरमाइंड जनरल परवेज मुशर्रफ सत्ता में आए.
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आगरा सम्मेलन
जून 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की आगरा में शिखर बैठक हुई. माना जाता है कि दोनों नेता कश्मीर विवाद को हल करने के काफी करीब पहुंच चुके थे. लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि एक झटके में सारी वार्ता विफल हो गई. इसे ऐतिहासिक चूक कहा जा सकता है.
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संसद पर हमला
13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला हुआ. हमले में छह पुलिसकर्मी, दो सुरक्षाकर्मी, एक बागवान और पांच आतंकवादी मारे गए. इस हमले के बाद भारतीय सेनाएं पाकिस्तान सीमा पर तैनात कर दी गई. पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड रोक दी गई. अमेरिका के दखल से युद्ध टला.
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समझौता एक्सप्रेस
भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती की प्रतीक बनी रेल सेवा भी आतंकवादी हमले का शिकार बनी. फरवरी 2007 में दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियों में धमाके हुए. 68 लोगों की मौत हुई. पाकिस्तान का आरोप है कि धमाके हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों ने किए.
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हमलों की बाढ़
2008 में भारत के कई शहरों में आतंकवादी हमलों की बाढ़ सी आई. रामपुर, जयपुर, अहमदाबाद, बेंगलुरू, दिल्ली और पूर्वोत्तर भारत में कई हमले हुए. तत्कालीन यूपीए सरकार लाचार सी दिखने लगी. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उपजने लगा.
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मुंबई हमले
और 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले ने नई दिल्ली के सब्र का बांध तोड़ दिया. विदेशी एजेंसियों की मदद से बहुत जल्दी यह साफ हो गया कि आतंकी हमले के दौरान कराची से निर्देश ले रहे हैं. तब से अब तक नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच शांति वार्ता पुराने रूप में बहाल नहीं हो सकी है.
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पास आकर दूर हुए
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच एक बार शांति वार्ता की कोशिशें शुरू हुई. शुरुआत सकारात्मक हुई लेकिन कश्मीरी अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात के बाद वार्ता की कोशिशें फीकी पड़ने लगी. जम्मू कश्मीर में सरहद पर दोनों देशों के बीच समय समय पर गोली बारी होने लगी.
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गुरदासपुर और ऊधमपुर हमला
जुलाई 2015 में पंजाब के गुरुदासपुर में हुए आतंकवादी हमले और उसके हफ्ते भर बाद जम्मू के ऊधमपुर में भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले हुए. हमलों में आतंकवादियों से ज्यादा सुरक्षाबल के जवान मारे गए. इन हमलों का असर भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य में होने वाली बातचीत पर पड़ना तय है.
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बारूद का ढेर
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल इस्लामाबाद जाकर पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने वाले हैं. भारत का मानना है कि पाकिस्तान भारत पर हमलों के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल कर रहा है. भारतीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान भारत के सब्र का इम्तिहान ले रहा है.