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ट्रंप के आखिरी दिनों का पूरा फायदा उठाना चाहता है इस्राएल

१८ जनवरी २०२१

डॉनल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले इस्राएल ने पश्चिमी तट पर यहूदी बस्ती में 780 नए घर बनाने को हरी झंडी दे दी है. इस कदम से नए राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ इस्राएल का टकराव हो सकता है.

पश्चिमी तट पर निर्माण
पश्चिमी तट पर फलीस्तीनी दावा जताते हैं लेकिन इस्राएल वहां लगातार घर बना रहा हैतस्वीर: Nir Alon/Zuma/picture alliance

पश्चिमी तट पर इस्राएली बस्तियां बनाने के विरोधी एक निगरानी समूह पीस नाऊ ने कहा है कि इस्राएली अधिकारियों ने रविवार को बस्तियों को विस्तार के तहत 780 नए घर बनाने का फैसला किया. माना जा रहा है कि इस्राएल अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्याकाल के आखिरी दिनों का फायदा उठाना चाहता है. ट्रंप ही हैं जिन्होंने दशकों से चले आ रहे अमेरिका के कूटनीतिक रुख को एकतरफा तौर पर बदला और घोषणा की कि पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियां बसाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है.

इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने पिछले हफ्ते ही प्रस्तावित निर्माण की घोषणा की. रविवार को सरकारी समिति ने 365 घरों को अंतिम मंजूरी दे दी. इसके अलावा 415 घरों के निर्माण के लिए शुरुआती मंजूदी दे दी है.

पीस नाऊ का कहना है कि इनमें 90 फीसदी घर पश्चिमी तट के अंदर हैं, जहां पर फलस्तीनी लोग अपना भावी राष्ट्र बनाना चाहते हैं.

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निर्माण की वजह

ट्रंप के कार्यकाल में इस्राएल ने बस्तियों का निर्माण तेज कर दिया. 2020 में ऐसे 12 हजार घरों को मंजूरी दी गई या उनकी योजना तैयार की गई. 2019 में अमेरिकी रुख में आए बदलाव के बाजवूद पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों को ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय समुदाय गैरकानूनी मानता है और उन्हें इस्राएली-फलस्तीनी संकट के समाधान के लिए दो राष्ट्रों वाले सिद्धांत की राह में बाधा मानता है.

माना जा रहा है कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन बस्तियों का विरोध करने वाली पुरानी नीति पर लौटेंगे, जिसे देखते हुए नेतान्याहू से उनका टकराव होना तय है. पीस नाऊ ने चेतावनी दी है, "बस्तियों से जुड़ी गतिविधियां ना सिर्फ फलस्तीनियों के साथ संकट को खत्म करने की संभावनाओं को खत्म करेंगी, बल्कि इनकी वजह से अमेरिका के आगामी बाइडेन प्रशासन के साथ इस्राएल का टकराव भी बढ़ेगा."

कितना बड़ा है विस्तार 

ट्रंप के चार साल के कार्यकाल में इस्राएल ने 27 हजार घर बनाने को मंजूरी दी है. पीस नाऊ का कहना है कि ओबामा प्रशासन के दूसरे कार्यकाल से तुलना करें तो यह संख्या ढाई गुना ज्यादा है.

कई साल से जारी बस्तियों के विस्तार के बाद पश्चिमी तट पर अभी 4.5 लाख यहूदी रहते हैं जबकि वहां रहने वाले फलस्तीनियों की संख्या 28 लाख है.

विश्लेषक कहते हैं कि अमेरिका में होने वाले सत्ता परिवर्तन के अलावा इस्राएल में 23 मार्च को होने वाले आम चुनाव को देखते हुए भी नेतान्याहू यहूदी बस्तियों के विस्तार को आगे बढा रहे हैं.

चुनाव में नेतान्याहू को धुर दक्षिणपंथी गिडेओन सार से कड़ी टक्कर मिल रही है. सार नेतान्याहू की लिकुड पार्टी से निकले हैं.

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फलस्तीनियों की प्रतिक्रिया

फलस्तीनी लोग पूरे पश्चिमी तट पर दावा करते हैं जिसे इस्राएल ने 1967 के छह दिन के युद्ध में अपने कब्जे में ले लिया था. इस्राएली पश्चिमी तट को अपने भावी राष्ट्र की मुख्य भूमि बनाना चाहते हैं. उनका कहना है कि पश्चिमी तट में बढ़ती यहूदी जनसंख्या के कारण उनकी आजादी का सपना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.

फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बाद के प्रवक्ता ने बस्तियों के विस्तार की निंदा की है. उनका आरोप है कि इस्राएल पहले से ही "उस ठप पड़ी शांति प्रक्रिया में रोड़ा अटका रहा है जिसे (नए) अमेरिकी राष्ट्रपति फिर से शुरू करना चाहते हैं."

दूसरी तरफ, यूरोपीय संघ ने अपने एक बयान में बस्तियों के विस्तार के इस्राएली कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत और दो राष्ट्रों वाले समाधान की संभावनाओं को कमजोर करने वाला बताया है.

एके/आईबी (एएफपी, एपी, रॉयटर्स)

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