पूरे देश में तालाबंदी की घोषणा के बाद अब भारत कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक चरण में पहुंच गया है. लेकिन इसके साथ ही ऐसी कई घटनाएं सामने आ रही हैं जो दिखाती हैं कि कई लोगों के लिए हालात बहुत कठिन बने हुए हैं.
तस्वीर: DW/P. Tiwari
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पूरे देश में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 519 बताई जा रही है. 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 39 लोग ठीक हो चुके हैं. ये भी बताया जा रहा है कि 1,80,000 से भी ज्यादा लोग निगरानी में हैं. प्रधानमंत्री की मंगलवार रात 8 बजे की घोषणा के बाद देश में कई जगहों से अफरा-तफरी की खबरें आईं. उनके भाषण में जरूरी सामान की आपूर्ति कैसे होगी इस बारे में विस्तृत विवरण नहीं था, इसलिए लोग तुरंत ही जरूरी सामान खरीदने दुकानों पर पहुंच गए, जिस से लम्बी कतारें लग गईं.
बाद में प्रधानमंत्री ने खुद ट्वीट कर जनता को आश्वासन दिया कि आवश्यक चीजों की कमी नहीं होने दी जाएगी और इस वजह से घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी भाषण के बाद विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये, जिनमें साफ लिखा हुआ था कि आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई है.
होम डिलीवरी में दिक्कत
कई लोगों ने पहले ही परचून का सामान खरीदने के लिए बाहर जाने की जगह इंटरनेट के जरिये घर पर मंगाने के निर्देश दे दिए थे. लेकिन अब खबर आ रही है कि ई-कॉमर्स कंपनीयों को सामान घर तक पहुंचाने में काफी दिक्कत आ रही है. ग्रोफर्स के संस्थापक सौरभ कुमार ने ट्वीट किया कि पुलिस और स्थानीय अधिकारी ग्रोफर्स के गोदामों को जबरदस्ती बंद करवा दे रहे हैं.
बिगबास्केट ने भी कुछ इसी तरह की शिकायत की.
फ्लिपकार्ट से भी लोग रोजमर्रा का सामान घर पर मंगवा रहे थे लेकिन खबर है कि फ्लिपकार्ट ने अपनी होम डिलीवरी सेवायें अस्थायी रूप से बंद ही कर दी हैं.
डॉक्टरों का निष्कासन
रविवार 22 मार्च को प्रधानमंत्री के कहने पर पूरे देश में लोगों ने महामारी से लड़ने में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका की सराहना करते हुए उनके लिए तालियां बजाई थीं. लेकिन अब जगह-जगह से खबर आ रही है कि समाज में उन्हीं डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बहिष्कार जैसा बर्ताव किया जा रहा है. कई शहरों से खबर आ रही है कि डॉक्टरों को कोरोना वायरस का संवाहक समझ कर मकान मालिक उन्हें मकानों से निकाल रहे हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने इस बारे में ट्वीट कर लोगों को ऐसा ना करने के लिए कहा है.
दिल्ली सरकार ने अधिसूचना जारी करके कहा है कि ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
दंगा पीड़ितों के लिए दोहरी मुसीबत
उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में दंगा पीड़ितों के सामने एक नई मुसीबत आ गई है. इलाके की ईदगाह में जिस राहत शिविर में दंगा पीड़ितों ने आश्रय लिया हुआ था उस शिविर को अब बंद किया जा रहा है. वहां रह रहे लोगों के घर दंगों में जला दिए गए थे इसलिए वे घर तो वापस जा नहीं सकते. ऐसे में वे कहां जाएंगे ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है.
ना कोरोना, ना हंटा, ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस
इस वक्त पूरी दुनिया कोरोना के खौफ में है. लेकिन मृत्यु दर के हिसाब से देखा जाए तो और भी कई वायरस हैं जो कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक हैं. बच के रहिए इनसे.
मारबुर्ग वायरस
इसे दुनिया का सबसे खतरनाक वायरस कहा जाता है. वायरस का नाम जर्मनी के मारबुर्ग शहर पर पड़ा जहां 1967 में इसके सबसे ज्यादा मामले देखे गए थे. 90 फीसदी मामलों में मारबुर्ग के शिकार मरीजों की मौत हो जाती है.
तस्वीर: picture alliance/dpa/CDC
इबोला वायरस
2013 से 2016 के बीच पश्चिमी अफ्रीका में इबोला संक्रमण के फैलने से ग्यारह हजार से ज्यादा लोगों की जान गई. इबोला की कई किस्में होती हैं. सबसे घातक किस्म के संक्रमण से 90 फीसदी मामलों में मरीजों की मौत हो जाती है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
हंटा वायरस
कोरोना के बाद इन दिनों चीन में हंटा वायरस के कारण एक व्यक्ति की जान जाने की खबर ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं. यह कोई नया वायरस नहीं है. इस वायरस के लक्षणों में फेफड़ों के रोग, बुखार और गुर्दा खराब होना शामिल हैं.
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रेबीज
कुत्तों, लोमड़ियों या चमगादड़ों के काटने से रेबीज का वायरस फैलता है. हालांकि पालतू कुत्तों को हमेशा रेबीज का टीका लगाया जाता है लेकिन भारत में यह आज भी समस्या बना हुआ है. एक बार वायरस शरीर में पहुंच जाए तो मौत पक्की है.
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एचआईवी
अस्सी के दशक में एचआईवी की पहचान के बाद से अब तक तीन करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं. एचआईवी के कारण एड्स होता है जिसका आज भी पूरा इलाज संभव नहीं है.
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चेचक
इंसानों ने हजारों सालों तक इस वायरस से जंग लड़ी. मई 1980 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की कि अब दुनिया पूरी तरह से चेचक मुक्त हो चुकी है. उससे पहले तक चेचक के शिकार हर तीन में से एक व्यक्ति की जान जाती रही.
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इन्फ्लुएंजा
दुनिया भर में सालाना हजारों लोग इन्फ्लुएंजा का शिकार होते हैं. इसे फ्लू भी कहते हैं. 1918 में जब इसकी महामारी फैली तो दुनिया की 40% आबादी संक्रमित हुई और पांच करोड़ लोगों की जान गई. इसे स्पेनिश फ्लू का नाम दिया गया.
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डेंगू
मच्छर के काटने से डेंगू फैलता है. अन्य वायरस के मुकाबले इसका मृत्यु दर काफी कम है. लेकिन इसमें इबोला जैसे लक्षण हो सकते हैं. 2019 में अमेरिका ने डेंगू के टीके को अनुमति दी.
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रोटा
यह वायरस नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. 2008 में रोटा वायरस के कारण दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के लगभग पांच लाख बच्चों की जान गई.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
कोरोना वायरस
इस वायरस की कई किस्में हैं. 2012 में सऊदी अरब में मर्स फैला जो कि कोरोना वायरस की ही किस्म है. यह पहले ऊंटों में फैला, फिर इंसानों में. इससे पहले 2002 में सार्स फैला था जिसका पूरा नाम सार्स-कोव यानी सार्स कोरोना वायरस था. यह वायरस 26 देशों तक पहुंचा. मौजूदा कोरोना वायरस का नाम है सार्स-कोव-2 है और यह दुनिया के हर देश तक पहुंच चुका है.