तुर्की ने की चीन में उइगुर कैंपों को बंद करने की मांग
११ फ़रवरी २०१९
तुर्की ने चीन से उइगुर मुस्लिम समुदाय के लिए चलाए जा रहे कैंपों को बंद करने की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इन कैंपों में 10 लाख से ज्यादा उइगुर नजरबंद हैं.
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तुर्की की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश से कैंपों पर कार्रवाई करने की मांग की है. तुर्की के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने उइगुरों को चीनी समाज में मिलाने की चीन सरकार की व्यवस्थित नीति को "मानवता के लिए बड़ी शर्म" बताया था. तुर्की सरकार का कहना है कि इन कैंपों और जेलों में जबरन बंद उइगुर समुदाय के लोगों को उत्पीड़न और ब्रेनवॉशिंग का शिकार बनाया जा रहा है.
इसके विपरीत चीन की सरकार इसे देश के पश्चिमोत्तर में स्थित शिनजियांग प्रांत में इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ कार्रवाई और शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षा के कदम बताती है. हाल में उइगुर कवि और संगीतकार अब्दुररहीम हेइत की हिरासत में मौत हो गई थी. पिछले दिनों मानवाधिकार संगठन उइगुरों के मुद्दे पर चीन की आलोचना करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मुसलमान देशों ने चीन की आलोचना नहीं की है. चीन इन देशों का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है.
शिनजियांग में आतंकवाद विरोधी फोर्सतस्वीर: Imago/VCG
तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामी अकसॉय ने कहा है कि अब ये "कोई रहस्य" नहीं है कि दस लाख से ज्यादा उइगुरों को जबरन हिरासत में रखा जा रहा है, जिन लोगों को कैंपों में नहीं रखा जा रहा है वे भी अत्यंत दबाव में हैं. उन्होंने शिनजियांग में "मानवीय त्रासदी खत्म करने के लिए प्रभावी कदमों" की मांग की. अकसॉय ने अपने बयान में हेइत की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि हेइत की त्रासद मौत ने शिनजियांग में "मानवाधिकारों के गंभीर हनन" पर तुर्की के जनमत की प्रतिक्रिया को और बढ़ा दिया है. उइगुर समुदाय के लोग अपने को तुर्की के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से जुड़ा महसूस करते हैं.
ईद मनाते उइगुरतस्वीर: Getty Images/K. Frayer
संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार आयोग ने पिछले साल रिपोर्ट दी थी कि उइगुर समुदाय के दस लाख से ज्यादा लोगों को चीनी बंदी शिविरों में रखा जा रहा है. ये शिविर गोपनीय नजरबंदी शिविरों जैसे हैं. इन कैंपों में उन्हें समाजिक और राजनीतिक वैचारिक शिक्षा दी जाती है. चीन सरकार ने लंबे समय तक इन कैंपों के अस्तित्व से इंकार किया था, लेकिन बाद में इसे वैधानिक मान्यता दे दी गई थी. उइगुर तुर्क मूल के मुस्लिम हैं जो चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं. पिछले सालों में वहां हुए उपद्रवों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं. 1949 में चीन में साम्यवादी शासन आने के बाद चीन ने इलाके को मिला लिया था.
एमजे/आईबी (रॉयटर्स, डीपीए, एएफपी)
चीन के उइगुर मुसलमान
चीन में रहने वाले उइगुर मुसलमान न तो दाढ़ी रख सकते हैं और न ही धार्मिक कपड़े पहन सकते हैं. चीन सरकार के नए नियमों के मुताबिक उन पर कई बंदिशें लगाई गई हैं. चलिए जानते हैं कौन हैं उइगुर लोग.
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नए नियम, नयी बंदिशें
उइगुर चीन में रहने वाला एक जातीय अल्पसंख्यक समुदाय है. ये लोग सांस्कृतिक रूप से खुद को चीन के मुकाबले मध्य एशियाई देशों के ज्यादा करीब पाते हैं. मुख्यतः चीन के शिनचियांग प्रांत में रहने वाले उइगुर लोग न तो सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ सकते हैं और न ही धार्मिक कपड़े पहन सकते हैं.
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धार्मिक कट्टरपंथ
नए सरकारी नियमों के मुताबिक मस्जिद में जाने के लिए व्यक्ति को कम से 18 साल का होना चाहिए. इसके अलावा अगर कोई सार्वजनिक जगह पर धार्मिक उपदेश देता दिखा तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी. इसके अलावा धार्मिक रीति रिवाज से शादी और अंतिम संस्कार को भी धार्मिक कट्टरपंथ से जोड़कर देखा जा रहा है.
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शक और संदेह
उइगुर लोग शिनचियांग में सदियों से रह रहे हैं. 20वीं सदी की शुरुआत में उन्होंने अपने इलाके को पूर्वी तुर्केस्तान नाम देते हुए आजादी की घोषणा की थी. लेकिन 1949 में माओ त्सेतुंग ने ताकत के साथ वहां चीनी शासन लागू कर दिया. उसके बाद से चीन और उइगुर लोगों के संबंध संदेह और अविश्वास का शिकार हैं.
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बदल गया समीकरण
शिनचियांग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए चीन की सरकार ने देश के अन्य हिस्सों से हान चीनियों को वहां ले जाकर बसाया है. 1949 में शिनचियांग में हान आबादी सिर्फ छह प्रतिशत थी जो 2010 में बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई. शिनचियांग के उत्तरी हिस्से में उइगुर लोग अल्पसंख्यक हो गए हैं.
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'अच्छे' मुसलमान
चीन में उइगुर अकेला मुस्लिम समुदाय नहीं है. हुई मुस्लिम समुदाय को भाषा और सांस्कृतिक लिहाज से हान चीनियों के ज्यादा नजदीक माना जाता है. उन्हें अधिकार भी ज्यादा मिले हुए हैं. अपनी मस्जिदें और मदरसे बनाने के लिए उन्हें चीन की सरकार से मदद भी मिलती है.
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आतंकवाद और अलगाववाद
शिनचियांग की आजादी के लिए लड़ने वाले गुटों में सबसे अहम नाम ईस्ट तुर्केस्तान इस्लामिक मूवमेंट का है. इसके अलावा तुर्केस्तान इस्लामिक पार्टी भी है जिस पर अल कायदा से संबंध रखने के आरोप लगते हैं. इस गुट को शिनचियांग में हुए कई धमाकों के लिए भी जिम्मेदार माना जाता है.
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समृद्धि का दायरा
शिनचियांग क्षेत्रफल के हिसाब से चीन का सबसे बड़ा प्रांत हैं और यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल है. कभी सिल्क रूट का हिस्सा रहे इस इलाके में चीन बड़ा निवेश कर रहा है. लेकिन उइगुर लोग चीन की चमक दमक और समृद्धि के दायरे से बाहर दिखाई देते हैं.
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असमानता
हाल के बरसों में शिनचियांग में उइगुर और हान चीनियों के बीच असमानता बढ़ी है. वहां हो रहे तेज विकास के कारण चीन भर से शिक्षित और योग्य हान चीनी पहुंच रहे हैं. उन्हें अच्छी नौकरियां और अच्छे वेतन मिल रहे हैं. वहीं उइगुर लोगों के लिए उतने मौके उलब्ध नहीं हैं.
(रिपोर्ट: रिज्की नुग्रहा/एके)