अमेरिकी विशेषज्ञों ने पाकिस्तान पर चिंता जताई है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर पाकिस्तान की जमीन से हुए आतंकी हमले के चलते भारत भड़का तो अमेरिका इस्लामाबाद की मदद नहीं कर सकेगा.
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दक्षिण एशिया पर नजर रखने वाले दो अमेरिकी विशेषज्ञों ने अमेरिकी संसदीय समिति से कहा है कि अगर अपनी जमीन पर सक्रिय भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों को रोकने में पाकिस्तान नाकाम हुआ, तो भारत से होने वाले किसी खतरे को टालने में अमेरिका इस्लामाबाद की मदद नहीं कर पाएगा.
अमेरिकी संसदीय समिति से कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के उपाध्यक्ष जॉर्ज पेर्कोविच ने कहा, "अगर पाकिस्तान भारत में सक्रिय रह चुके आतंकवादी पर कार्रवाई करने में प्रतिबद्धता नहीं दिखाता, तो हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते. शायद कुछ करने के लिए हमारे पास बहुत ज्यादा गुंजाइश भी न हो, क्योंकि यह वाकई में एक समस्या है."
अमेरिकी सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए पेर्कोविच ने कहा कि हालात बहुत बुरे नहीं हैं, अच्छी बात यह है कि भारत की पाकिस्तानी इलाके या पाकिस्तान की किसी भी चीज में दिलचस्पी नहीं है, "इसीलिए भारत का खतरा केवल पाकिस्तानी गुस्से या भारत में आतंकवाद का जबाव होगा."
सार्क दौरे पर इस्लामाबाद जाएंगे जयशंकरतस्वीर: AFP/Getty Images/S. Loeb
समिति के सामने अपना पक्ष रखते हुए कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एश्ले टेलिस ने भी कुछ ऐसी ही बात कही. टेलिस के मुताबिक पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तान के लिए खतरा लगने वाले आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए तत्पर दिख रही है, लेकिन भारत विरोधी आतंकवादियों के मामले में उसका रवैया ऐसा नहीं दिखाई पड़ता है.
भारत को चेतावनी
इस बीच भारत से लगने वाली सीमा पर पहुंचे पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल राहिल शरीफ ने नई दिल्ली को चेतावनी दी है. पाकिस्तानी सेना के बयान के मुताबिक शरीफ ने भारत पर विवादित सीमा पर लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसे उल्लंघन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई से पाकिस्तानी सेना का ध्यान भटका रहे हैं. भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बीते महीनों में कश्मीर में जमकर गोलाबारी हुई है. शरीफ ने कहा कि ऐसी भड़काऊ कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा.
3 मार्च को भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. नई दिल्ली का कहना है कि विदेश सचिव सार्क यात्रा पर हैं न कि पाकिस्तान यात्रा पर. हालांकि इसके बावजूद उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच छह महीने बंद रही द्विपक्षीय सचिव स्तर वार्ता फिर से शुरू हो सकती है.
ओएसजे/आरआर (पीटीआई,एपी)
पेशावर का सिसकता स्कूल
पाकिस्तान के पेशावर शहर में जिस स्कूल पर मंगलवार को तालिबान ने आतंकवादी हमला किया था, बुधवार को उसकी शक्ल किसी भूतहे घर की तरह लग रही थी. रिपोर्टरों ने स्कूल जाकर वहां का जायजा लिया.
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प्रवेश पर सुरक्षा
पाकिस्तानी सेना का एक जवान स्कूल के मुख्य द्वार पर पहरा देता हुआ. आलीशान दरवाजे से उस खतरनाक चेहरे का अंदाजा भी नहीं लग पा रहा है, जो आने वाली तस्वीरों में दिखने वाला है. कैसे बच्चों के एक स्कूल को तालिबान ने श्मशान में बदल दिया.
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चारों तरफ तहस नहस
नोटिस बोर्ड के आस पास दहशत के निशान मौजूद हैं. सेना के जवान उन जगहों को देख रहे हैं, जहां तालिबान के हमले से भारी नुकसान हुआ है. दीवार की ईंटें निकल चुकी हैं. गमले उलटे पड़े हैं. यह तस्वीर किसी स्कूल की तो नहीं लगती.
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ब्लैकबोर्ड की दीवार
स्कूल की इस दीवार पर कभी ब्लैकबोर्ड लगा होता होगा. लेकिन अब यह गोलियों से छलनी है. एक स्थानीय रिपोर्टर जब इस दीवार के पास से गुजरी, तो कुछ ऐसी तस्वीर बनी. मालूम पड़ता है कि मानो कोई जलजला आया हो.
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ये कैसा क्लासरूम
किताबें बिखरी पड़ी हैं, छात्रों का कोई नामोनिशान नहीं. गोलियां और बम खाकर पीछे की जख्मी दीवार काली पड़ चुकी है. इस सैनिक को बिखरी हुई किताबों के बीच रास्ता निकालना मुश्किल हो रहा है. सिर्फ 24 घंटे पहले यहां बच्चों से रौनक थी.
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आतंक की निशानी
पीछे की दीवार पर शायद स्कूल के प्रिंसिपलों की लिस्ट लगी है. लेकिन नजर उसके चारों ओर ज्यादा जा रही है, जो गोलियों से भुन चुका है. बोर्ड के चारों ओर के सुर्ख लाल धब्बे वो सब कुछ कह रहे हैं, जो मंगलवार को इस स्कूल में हुआ.
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अपनों की याद
कराची के एक स्कूल में दुआओं में खड़ा यह छात्र शायद अपने उन साथियों के अहसास को महसूस करने की कोशिश कर रहा है, जो तालिबान के कायराना हमले में मारे गए. पूरे पाकिस्तान के स्कूलों में मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई.
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महिलाओं की श्रद्धांजलि
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट की महिला सदस्यों ने भी मंगलवार की रात मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी और उनकी याद में मोमबत्तियां जलाईं. हमले में कम से कम 140 लोगों की मौत हो गई और तालिबान ने कई महिला टीचरों को जिंदा जला दिया.
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अपनों का गम
हमले की जगह पहुंचते हुए एक महिला अपनी सिसकियों को नहीं रोक पाई. हमले के वक्त स्कूल में कम से कम 500 बच्चे थे. इनमें से लगभग 125 बच्चे मारे गए, जबकि इतने ही और घायल हो गए. पाकिस्तान के इतिहास में यह सबसे क्रूर हमलों में गिना जा रहा है.
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एहतेजाज की याद
पेशावर की इस घटना ने हंगू के युवा छात्र एहतेजाज की भी याद ताजा कर दी, जिसने जनवरी में अपने स्कूल में घुस रहे एक आत्मघाती हमलावर को गेट के बाहर दबोच लिया था. हमलावर ने विस्फोटक को उड़ा दिया, जिससे उसकी और एहतेजाज की मौत हो गई. लेकिन स्कूल में मौजूद सैकड़ों बच्चे बच गए.