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दो साल के भीतर ऐसे कंगाल हुआ बीएसएनएल

ऋषभ कुमार शर्मा
१३ मार्च २०१९

बीएसएनएल ने अपने 1 लाख 76 हजार कर्मचारियों को फरवरी महीने की तनख्वाह नहीं दी है. कर्मचारी संगठनों ने संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से जल्द से जल्द तनख्वाह देने की मांग की है. आखिर बीएसएनएल इस हाल में कैसे पहुंचा?

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तस्वीर: DW/S. Waheed

साल 2016 में मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर विकास पर्व नाम से जश्न मनाया जा रहा था. तब दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सात साल में बीएसएनएल ने पहली बार मुनाफा कमाया है. बीएसएनएल को 672 करोड़ का फायदा हुआ है और चालू वित्त वर्ष में यह फायदा 2000 करोड़ तक पहुंचेगा.

फरवरी 2019 में बीएसएनएल के चेयरमैन अनुपम श्रीवास्तव ने दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन के सामने एक प्रजेंटेशन दिया. इसमें बताया गया कि कंपनी का कुल चालू घाटा 31,287 करोड़ रुपए हो गया है. इसे कम करने के लिए सरकार के सामने तीन विकल्प सामने आए. पहला, बीएसएनएल में रणनीतिक विनिवेश किया जाए. दूसरा, वित्तीय सहायता देकर कंपनी को दोबारा मजबूत बनाया जाए. तीसरा और आखिरी, कंपनी का कारोबार ही बंद कर दिया जाए. इस हालत में बीएसएनएल के पहुंचने की वजह क्या है?

मोबाइल पर कौन कितना डाटा फूंकता है

साल 2008 में बीएसएनएल की सहयोगी कंपनी में एमटीएनएल ने भारत में सबसे पहले 3जी सर्विस लॉन्च की. फरवरी 2009 में बीएसएनल ने 3जी सर्विस लॉन्च की. अप्रैल 2010 में प्राइवेट नेटवर्क ऑपरेटर्स को भी 3जी सर्विस लॉन्च करने का लाइसेंस दे दिया गया.

2016 में टेलिकॉम बाजार में एक नई कंपनी आई. इसका नाम है रिलायंस जियो. इसके मालिक भारत के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी हैं. जियो केवल 4जी और वीओएलटीई नेटवर्क पर कॉलिंग वाला नेटवर्क है. वीओएलटीई नेटवर्क यानी वॉइस ओवर लॉन्ग टर्म इवॉल्यूशन में कॉलिंग भी इंटरनेट नेटवर्क के ऊपर होती है. इसमें आवाज साफ और स्पष्ट आने के साथ-साथ कॉल ड्रॉप भी कम होते हैं. जियो ने पहले कुछ समय के लिए अनलिमिटेड कॉल, मेसेज और डाटा फ्री दिया. इसके चलते बहुत तेजी से ग्राहक दूसरी कंपनियों को छोड़ जियो के साथ जुड़ने लगे.

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टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जियो को फ्री में सर्विस देने से मना किया तो जियो ने सस्ते टैरिफ प्लान ला दिए. जियो के आने से पहले एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनल चार सबसे बड़े नेटवर्क ऑपरेटर थे. जियो से टक्कर लेने के लिए एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया ने अपने टैरिफ के रेट कम कर दिए. और इनके 4जी के दाम भी लगभग जियो के बराबर हो गए. हालांकि, जियो तब तक अपने 10 करोड़ से ज्यादा ग्राहक बना चुका था.

लेकिन इस रेस में एक कंपनी बहुत पीछे रह गई जिसका नाम है बीएसएनएल. क्योंकि बीएसएनएल ने अपनी 4जी सर्विस शुरू ही नहीं की. बीएसएनएल 4जी के जमाने में 3जी के साथ ही बना रहा. साथ ही, बीएसएनएल ने अपने 3जी टैरिफ के दाम कम नहीं किए. इसके चलते बीएसएनल को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

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बीएसएनएल ही एक मात्र ऐसी कंपनी नहीं है जिसको 4जी की इस दौड़ का नुकसान हुआ हो. जियो के आने के बाद भारतीय बाजार से कई सारे छोटे मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर गायब हो गए. टेलिनॉर, वीडियोकॉन, क्वाड्रेंट, एयरसेल, रिलायंस, टाटा इंडिकॉम और एमटीएस बंद हो गए. वहीं दो बड़े मोबाइल ऑपरेटर्स आइडिया और वोडाफोन ने आपस में समझौता कर दोनों एक कंपनी बन गए.

30 नवंबर 2018 तक के आंकड़ों के मुताबिक वोडाफोन-आइडिया के 42 करोड़, एयरटेल के 34 करोड़, जियो के 27 करोड़ और बीएसएनएल के 11 करोड़ ग्राहक हैं. बीएलएनएल के ग्राहकों में कई सारे वो सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्हें सरकार की तरफ से मोबाइल सर्विस दी गई है. पहले तीनों बड़े सर्विस प्रोवाइडर कई सालों पहले से ही 4जी सर्विस दे रहे हैं. लेकिन बीएसएनएल साल 2019 में अपनी 4जी सर्विस लॉन्च कर रहा है. फिलहाल केरल और बिहार-झारखंड के कुछ जिलों में बीएसएनएल 4जी सर्विस दे रहा है.

इस सबके चलते बीएसएनएल का आर्थिक नुकसान बढ़ता चला गया. कंपनी का खर्च बढ़ता जा रहा है जबकि आमदनी घटती जा रही है. बीएसएनएल की कुल आमदनी का करीब 55 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है. और इस खर्च में हर साल आठ फीसदी की बढ़ोत्तरी हो जाती है. बीएसएनएल ने सरकार के सामने बैंकों से लोन लेकर अपने खर्चे पूरे करने का प्रस्ताव रखा लेकिन सरकार ने नामंजूर कर दिया.

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सरकार ने कहा कि बीएसएनएल को अपने स्रोतों से पैसा जुटाना चाहिए. ये थोड़ा अजीब इसलिए है क्योंकि जियो समेत भारत की सभी टेलिकॉम कंपनियों पर बैंकों का कर्ज है. ऐसे में बीएसएनएल को कर्ज की मनाही थोड़ा अजीब है. बीएसएनएल के कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार प्राइवेट कंपनियों को बढ़ावा देना चाहती है इसलिए बीएसएनएल पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इसी आरोप को लेकर बीएसएनएल के देशभर के कर्मचारियों ने 19 फरवरी 2019 को हड़ताल की थी.

अब बीएसएनएल अपने कर्मचारियों की छंटनी करने पर भी विचार कर रही है. इसके लिए कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृति यानी वीआरएस देने, रिटायरमेंट की उम्र 60 से 58 साल करने और कर्मचारियों के ट्रैवल और मेडिकल अलाउंस में कटौती करने का प्रस्ताव रखा गया है. हालांकि इनमें से कोई भी कदम अभी अमल में नहीं लाया गया है.

अब सरकार बीएसएनएल को बनाए रखने के लिए कोई बड़ा कदम उठाती है या बीएसएनएल भी बंद होने के रास्ते पर आगे बढ़ रही है, ये तो वक्त ही बताएगा.

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