पेशावर में पाकिस्तान एयरफोर्स के बेस पर हुए आतंकवादी हमले में 33 लोगों की मौत हो गई. हाल के समय में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ यह तालिबान का सबसे बड़ा हमला है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/A. Majeed
विज्ञापन
पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल आसिम बाजवा के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में 13 आतंकवादी मारे गए हैं. सेना के मुताबिक आतंकवादी शुक्रवार सुबह पेशावर की इकबाल रोड पर बने एयरफोर्स कैंप में घुसे. दो गुटों में बंटे आतंकवादियों ने सेना की वर्दी पहनी थी. दोनो गुट अलग अलग जगहों से कैंप में दाखिल हुए.
तस्वीर: Getty Images/AFP/A. Majeed
कैंप के अंदर एक मस्जिद है, जिसमें शुक्रवार को लोग नमाज के लिए जुटे थे. तभी हमला हुआ. 16 नमाजी मौके पर ही मारे गए. सेना के प्रवक्ता के मुताबिक आतंकवादियों ने आत्मघाती जैकेट पहनी थी. वे एके-47 और ग्रैनेड मोर्टार से लैस थे. जबावी कार्रवाई में पाकिस्तानी एयरफोर्स के एक कैप्टन की भी मौत हुई है.
तहरीक ए तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है. बीते साल दिसंबर में पेशावर के आर्मी स्कूल में हुए आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तानी सेना अफगान सीमा से सटे इलाकों में तालिबान पर लगातार हवाई हमले कर रही है.
ओएसजे/एसएफ
पेशावर का सिसकता स्कूल
पाकिस्तान के पेशावर शहर में जिस स्कूल पर मंगलवार को तालिबान ने आतंकवादी हमला किया था, बुधवार को उसकी शक्ल किसी भूतहे घर की तरह लग रही थी. रिपोर्टरों ने स्कूल जाकर वहां का जायजा लिया.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
प्रवेश पर सुरक्षा
पाकिस्तानी सेना का एक जवान स्कूल के मुख्य द्वार पर पहरा देता हुआ. आलीशान दरवाजे से उस खतरनाक चेहरे का अंदाजा भी नहीं लग पा रहा है, जो आने वाली तस्वीरों में दिखने वाला है. कैसे बच्चों के एक स्कूल को तालिबान ने श्मशान में बदल दिया.
तस्वीर: AFP/Getty Images/F. Naeem
चारों तरफ तहस नहस
नोटिस बोर्ड के आस पास दहशत के निशान मौजूद हैं. सेना के जवान उन जगहों को देख रहे हैं, जहां तालिबान के हमले से भारी नुकसान हुआ है. दीवार की ईंटें निकल चुकी हैं. गमले उलटे पड़े हैं. यह तस्वीर किसी स्कूल की तो नहीं लगती.
तस्वीर: AFP/Getty Images/A Majeed
ब्लैकबोर्ड की दीवार
स्कूल की इस दीवार पर कभी ब्लैकबोर्ड लगा होता होगा. लेकिन अब यह गोलियों से छलनी है. एक स्थानीय रिपोर्टर जब इस दीवार के पास से गुजरी, तो कुछ ऐसी तस्वीर बनी. मालूम पड़ता है कि मानो कोई जलजला आया हो.
तस्वीर: Reuters/F. Aziz
ये कैसा क्लासरूम
किताबें बिखरी पड़ी हैं, छात्रों का कोई नामोनिशान नहीं. गोलियां और बम खाकर पीछे की जख्मी दीवार काली पड़ चुकी है. इस सैनिक को बिखरी हुई किताबों के बीच रास्ता निकालना मुश्किल हो रहा है. सिर्फ 24 घंटे पहले यहां बच्चों से रौनक थी.
तस्वीर: AFP/Getty Images/A Majeed
आतंक की निशानी
पीछे की दीवार पर शायद स्कूल के प्रिंसिपलों की लिस्ट लगी है. लेकिन नजर उसके चारों ओर ज्यादा जा रही है, जो गोलियों से भुन चुका है. बोर्ड के चारों ओर के सुर्ख लाल धब्बे वो सब कुछ कह रहे हैं, जो मंगलवार को इस स्कूल में हुआ.
तस्वीर: Reuters/F. Aziz
अपनों की याद
कराची के एक स्कूल में दुआओं में खड़ा यह छात्र शायद अपने उन साथियों के अहसास को महसूस करने की कोशिश कर रहा है, जो तालिबान के कायराना हमले में मारे गए. पूरे पाकिस्तान के स्कूलों में मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई.
तस्वीर: Reuters/A. Soomro
महिलाओं की श्रद्धांजलि
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट की महिला सदस्यों ने भी मंगलवार की रात मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी और उनकी याद में मोमबत्तियां जलाईं. हमले में कम से कम 140 लोगों की मौत हो गई और तालिबान ने कई महिला टीचरों को जिंदा जला दिया.
तस्वीर: AFP/Getty Images/R. Tabassum
अपनों का गम
हमले की जगह पहुंचते हुए एक महिला अपनी सिसकियों को नहीं रोक पाई. हमले के वक्त स्कूल में कम से कम 500 बच्चे थे. इनमें से लगभग 125 बच्चे मारे गए, जबकि इतने ही और घायल हो गए. पाकिस्तान के इतिहास में यह सबसे क्रूर हमलों में गिना जा रहा है.
तस्वीर: AFP/Getty Images/A. Majeed
एहतेजाज की याद
पेशावर की इस घटना ने हंगू के युवा छात्र एहतेजाज की भी याद ताजा कर दी, जिसने जनवरी में अपने स्कूल में घुस रहे एक आत्मघाती हमलावर को गेट के बाहर दबोच लिया था. हमलावर ने विस्फोटक को उड़ा दिया, जिससे उसकी और एहतेजाज की मौत हो गई. लेकिन स्कूल में मौजूद सैकड़ों बच्चे बच गए.