अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नए साल की शुरुआत काफी गुस्से के साथ हुई है और यह गुस्सा पाकिस्तान पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ट्रंप ने पाकिस्तान को झूठा और धोखेबाज बताया.
डॉनल्ड ट्रंप ने ट्विटर के जरिए पाकिस्तान पर गुस्सा निकाला है. देश और दुनिया को नए साल की शुभकामनाएं देने के बाद, यह राष्ट्रपति ट्रंप का इस साल का पहला ट्वीट है. उन्होंने लिखा, "पिछले 15 साल से पाकिस्तान अमेरिका को बेवकूफ बनाकर 33 अरब डॉलर की सहायता प्राप्त कर चुका है और उसने बदले में हमें सिर्फ झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया, वह हमारे नेताओं को बेवकूफ समझता है. वह उन आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह मुहैया कराता है, जिन्हें हम अफगानिस्तान में तलाश रहे हैं. अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि ट्रंप सरकार ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 25.5 करोड़ डॉलर की मदद राशि को रोक कर रखा हुआ है और शायद वह उसे यह देने से इनकार भी कर दे. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि ट्रंप ने खुल कर पाकिस्तान पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया हो. इससे पहले उन्होंने बीते साल अगस्त में भी कहा था कि पाकिस्तान आतंकी तत्वों को सुरक्षा मुहैया कराता है. पिछले महीने ही उन्होंने पाकिस्तान को मिलने वाली सहायता राशि को रोकने की ओर इशारा भी किया. राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा था, "हम हर साल पाकिस्तान को इतना धन देते हैं. उन्हें हमारी मदद भी करनी होगी."
हालांकि पाकिस्तान इससे हमेशा ही इनकार करता आया है कि वह किसी भी तरह से आतंकियों का साथ देता है. लेकिन ट्रंप के इस ट्वीट के बाद से अब तक पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रया नहीं आई है और ना ही व्हाइट हाउस ने इस पर कोई बयान जारी किया है कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों में और किस किस तरह से बदलाव देखे जाएंगे.
क्यों सड़कों पर उतर आए ईरान के लोग?
ईरान में कई साल बाद इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. अलग अलग शहरों में सड़कों पर उतरे ये हजारों लोग आखिर कौन हैं और क्या चाहते हैं, चलिए जानते हैं.
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कब हुई शुरुआत?
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को मशाद शहर से हुई, जब बढ़ती महंगाई के खिलाफ सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए. अगले दो दिनों के भीतर ये प्रदर्शन राजधानी तेहरान समेत कई और शहरों तक पहुंचे गए.
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प्रदर्शनों का कारण?
कुछ प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असामनात के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. वहीं बहुत से लोग सरकार की नीतियों से खफा हैं. प्रदर्शनों के दौरान, "रोहानी मुर्दाबाद", "फलस्तीन को भूल जाओ", और "गजा नहीं, लेबनान नहीं, मेरी जिंदगी ईरान के लिए है" जैसे नारे लग रहे हैं.
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प्रतिबंधों की मार?
कुछ लोग आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ की वजह ईरान की विदेश नीति को बता रहे हैं जो कई क्षेत्रीय संकटों में उलझा है, तो कइयों की राय में, ईरान पर लगे प्रतिबंधों का असर अब जनता की जेब पर होने लगा है. कुल मिलाकर लोग सरकार से नाराज हैं.
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सरकार समर्थक भी सड़कों पर
ईरानी राष्ट्रपति हसन रोहानी और सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खमेनेई का समर्थन करने वाले कट्टरपंथियों ने भी सड़क पर उतर कर अपनी आवाज बुलंद की. हालांकि सरकार समर्थक इन प्रदर्शनाकरियों की संख्या सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों से काफी कम दिखी.
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कितने शहरों में प्रदर्शन?
अब तक एक दर्जन से ज्यादा शहरों से प्रदर्शनों होने की खबर है, जिनमें जनजान, केरमानशाह, खोरामाबाद, अबार, अराक, दोरुद, इजेह, तोनेकाबोन, तेहरान, करज, मशाद, शहरेकोर्द और बांदेर अब्बास शामिल हैं.
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क्या कहती है सरकार?
राष्ट्रपति हसन रोहानी ने कहा है कि लोगों में बढ़ रही हताशा को वह समझते हैं और जनता को प्रदर्शन करने का हक है. लेकिन उन्होंने कहा कि हिंसा और तोड़फोड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
ईरानी सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया और खासकर टेलीग्राम का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद सरकार ने कई मैसेजिंग एप्स पर रोक लगा दी है. सरकार ने टेलीग्राम से हिंसा भड़काने वाले अकाउंट्स को बंद करने के लिए कहा है.
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कितने हताहत?
ईरान में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 21 लोगों के मारे जाने की खबर है. इसके अलावा सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है. प्रदर्शनों के कारण ईरान की सरकार को तीखी आलोचना झेलनी पड़ रही है.
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क्या बोला विश्व समुदाय?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों को गिरफ्तार ना करने के लिए कहा है. उन्होंने कहा, "दमनकारी व्यवस्था हमेशा नहीं रह सकती. दुनिया देख रही है." जर्मनी और फ्रांस ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई है.
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पाकिस्तान के बाद ट्रंप ने ट्विटर पर ईरान पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ओबामा सरकार के साथ समझौता करने के बाद भी ईरान हर तरह से विफल होता दिख रहा है. ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों पर उन्होंने लिखा है, "ईरान के लोग खाने और आजादी के लिए भूखे हैं. मानवाधिकारों के साथ साथ वहां की संपत्ति भी लूटी जा रही है. अब बदलाव का वक्त आ गया है."