पाकिस्तान में 25 जुलाई को हुए चुनावों के बाद इमरान खान की पार्टी सरकार बनाएगी. इमरान को छह बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा. चलिए जानते हैं क्या हैं ये चुनौतियां.
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70 साल बाद भी पाकिस्तान कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है. दशकों से सैन्य और असैन्य नेतृत्व की खींचतान के शिकार होने वाले पाकिस्तान में अब बढ़ते चरमपंथ और फैलती जनसंख्या की वजह से कई नई चुनौतियां सिर उठा रही हैं.
सुरक्षा
हाल के बरसों में सेना के कई अभियानों के बाद पाकिस्तान में सुरक्षा के हालात में सुधार आया है. लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान चरमपंथ के मूल कारणों पर ध्यान नहीं दे रहा है. यही वजह है कि अब भी चरमपंथी बड़े हमले करने की ताकत रखते हैं.
पाकिस्तानी सेना को ललकारता युवा पश्तून
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इस बार चुनाव प्रचार के दौरान हुए हमलों में कम से कम 175 लोग मारे जा चुके हैं. 13 जुलाई को बलूचिस्तान में एक चुनावी रैली के दौरान हुए धमाके में 149 लोग मारे गए.
यह पाकिस्तान के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा आतंकवादी हमला है जिसकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली. विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि चरमपंथी गुट फिर से पाकिस्तान में सिर उठाने की कोशिश कर रहे हैं.
विदेश नीति
पाकिस्तान की नई सरकार के लिए विदेश नीति एक बड़ी चुनौती होगी. भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कई साल से तनावपूर्ण हैं. 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को नई दिल्ली आमंत्रित किया था. इसके अलावा खुद मोदी भी पाकिस्तान गए.
लेकिन यह गर्मजोशी ज्यादा दिन नहीं चल सकी. आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर दोनों देशों में टकराव बढ़ता गया और फिलहाल बातचीत का कोई संकेत नहीं दिखाई देता है
अमेरिका से भी पाकिस्तान के रिश्ते हाल के सालों में बहुत खराब हुए हैं. ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद में बड़ी कटौती की और अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान को काफी खरी खोटी सुनाई. अमेरिका की बेरुखी पाकिस्तान को चीन के और ज्यादा करीब ला रही है.
बुद्ध से हार गया तालिबान
बुद्ध से हार गया तालिबान
अफगानिस्तान के बामियान की तर्ज पर पाकिस्तान की स्वात घाटी में भी तालिबान ने पहाड़ को काट कर उकेरी गई बुद्ध की प्रतिमा को डायनामाइट से उड़ा दिया था. लेकिन अब वहां बुद्ध फिर मुस्करा रहे हैं.
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स्वात के बुद्ध
पाकिस्तान की स्वात घाटी के जहानाबाद इलाके में ग्रेनाइट के एक पर्वत पर उकेरी गई बुद्ध की प्रतिमा 1400 साल पुरानी है. बामियान की तर्ज पर 2007 में तालिबान ने इसे डायनामाइट से उड़ाने की कोशिश जिससे प्रतिमा को काफी नुकासन हुआ.
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धरोहर पर हमला
कई साल तक पाकिस्तान की स्वात घाटी तालिबान के कब्जे में रही. इस दौरान उन्होंने इस इलाके की ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति को तहस नहस करने में कसर नहीं छोड़ी. इससे परवेश शाहीन जैसे लोगों के दिल को बहुत चोट लगी.
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असहिष्णुता
यह प्रतिमा लगभग 20 फीट ऊंची है. दस साल पहले चरमपंथियों के इसके ऊपर चढ़ तक विस्फोटक सामग्री लगाई. लेकिन इससे बुद्ध के चेहरे के ऊपरी हिस्से को ही नुकसान हुआ जबकि इसके पास एक अन्य मूर्ति के टुकड़े टुकड़े हो गए थे.
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इतिहास पर चोट
स्वात में बुद्धिज्म के विशेषज्ञ परवेश शाहीन कहते हैं, "ऐसे लगा कि जैसे उन्होंने मेरे पिता की हत्या कर दी. उन्होंने मेरी संस्कृति और इतिहास पर हमला किया." अब इटली के विशेषज्ञों की मदद से इलाके को संरक्षित किया जा रहा है.
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मुस्कराते बुद्ध
अब इस प्रतिमा को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है. 2012 में शुरू हुए इस काम को कई चरणों में पूरा किया गया. पुरानी तस्वीरों और थ्रीडी तकनीक की मदद से इस काम को अंजाम दिया गया.
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ताकि बाकी रहे निशान..
मरम्मत का यह काम 2016 में पूरा हुआ. इतालवी विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्रतिमा बिल्कुल पहले जैसी तो नहीं दिखती, लेकिन ऐसा जानबूझ कर किया गया है ताकि पता चले कि इसे कभी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी.
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अहम तीर्थ स्थल
79 वर्षीय शाहीन कहते हैं कि यह प्रतिमा शांति, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है. यह इलाका सदियों तक बौद्ध धर्म के श्रद्धालुओं के लिए एक अहम तीर्थ स्थल रहा. लेकिन भारत के बंटवारे के बाद बॉर्डर खींच गए और वहां जाना मुश्किल होता गया.
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स्वर्णकाल
स्वात घाटी में 10वीं सदी के आसपास बौद्ध धर्म खत्म हो गया. उसकी जगह हिंदू और इस्लाम धर्म ने ली. यहां दूसरी से चौथी सदी तक बौद्ध धर्म के लिए स्वर्णकाल माना जाता है. तब इस घाटी में एक हजार से ज्यादा बौद्ध मठ और स्तूप थे.
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इटली का निवेश
इटली की सरकार ने स्वात घाटी की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए पांच साल के भीतर 25 लाख यूरो का निवेश किया. इस काम में स्थानीय लोगों की भी खूब मदद ली गई. अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे इलाके में टूरिज्म बढ़ेगा.
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सुरक्षा हालात
स्वात घाटी से तालिबान के बाहर किए जाने के बाद हालात में बहुत सुधार आया है. घरेलू पर्यटक भी वहां जाने लगे हैं. लेकिन इसी साल फरवरी में एक चरमपंथी हमले में 11 सैनिकों की मौत बताती हैं कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है.
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शिक्षा का असर
स्वात में कई लोगों का मानना है कि बुद्ध धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ाने में मदद करेंगे. पत्रकार फजल खालिक कहते हैं कि शिक्षा और सोशल मीडिया के कारण सांस्कृतिक विरासत के लिए मौजूद खतरे कम हुए हैं.
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'हमारा धर्म'
मिंगोरा में एक म्यूजियम भी बनाया गया है जहां इलाके की ऐतिहासिक धरोहरों को संजोया गया है. इसके क्यूरेटर फैज-उर रहमान कहते हैं कि यहां बौद्ध धर्म को पसंद करने वाले मुल्लाओं का स्वागत है. उनके मुताबिक, "इस्लाम से पहले यही तो हमारा धर्म था."
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आर्थिक संकट
पाकिस्तान की नई सरकार को आर्थिक तंगियों का सामना करना होगा. अटकलें लग रही हैं कि पाकिस्तान को पांच साल के भीतर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से दूसरा बेलआउट पैकेज मांगना पड़ सकता है.
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार सिमटता जा रहा है और पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में लगातार गिरावट आ रही है. व्यापार घाटे को कम करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ही रुपये की कीमत को घटा रही है.
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चीन पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है. लेकिन यह चिंता भी बढ़ती जा रही है कि पाकिस्तान को इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ेगी. आलोचक चीन के निवेश की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से करते हैं. लेकिन सरकार कहती है कि चीन पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना समृद्धि के नए मौके पैदा करेगी.
तेल के बढ़ते दाम भी पाकिस्तान को पसीना छुड़ा रहे हैं. कपड़े जैसे जिन उत्पादों का पाकिस्तान निर्यात करता है, उन्हें भी चीन के सस्ते सामान से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी टक्कर मिल रही है. विदेशों में बसे पाकिस्तानी भी अब अपने वतन में कम पैसा भेज रहे हैं. रेटिंग एजेंसी फिच का कहना है कि पाकिस्तान में नई सरकार के पास कदम उठाने के लिए "सीमित समय" ही होगा.
देखिए इस्लामाबाद का नया एयरपोर्ट
इस्लामाबाद को मिला नया एयरपोर्ट
पाकिस्तान में दस साल से बन रहा एयरपोर्ट आखिरकार तैयार हो गया है. 3 मई को इसका उद्घाटन होगा. एक नजर इसी एयरपोर्ट पर.
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क्षमता
नया एयरपोर्ट राजधानी इस्लामाबाद से 30 किलोमीटर दूर है. यह सालाना 90 लाख मुसाफिरों और 50 हजार मीट्रिक टन कार्गो को संभालने में सक्षम है.
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सबसे खराब एयरपोर्ट
नया एयरपोर्ट इस्लामाबाद के मौजूदा बेनजीर भुट्टो इंटरनेशनल एयरपोर्ट का स्थान लेगा जिसे 2014 में "गाइड टू स्लीपिंग इन एयरपोर्ट" वेबसाइट ने दुनिया का सबसे खराब एयरपोर्ट बताया था.
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विलंब
नए एयरपोर्ट को 2016 में ही काम शुरू कर देना चाहिए था. लेकिन इसका काम लगातार लटकता गया और अब दो साल की देरी के साथ इस एयरपोर्ट का उद्घाटन होने वाला है.
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ए380 भी उतरेगा
नए एयरपोर्ट के रनवे इतने बड़े हैं कि उन पर दुनिया का सबसे बड़े विमान ए380 भी उतर सकता है और उड़ान भर सकता है. अब तक इस्लामाबाद में इस विमान को नहीं उतारा जा सकता था.
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एयरब्रिज
एयरपोर्ट पर 15 एयरब्रिज बनाए गए हैं जिनके जरिए मुसाफिर सीधे टर्मिनल से बोर्डिग कर पाएंगे. यानी उन्हें बसों के जरिए विमानों तक ले जाने की जरूरत नहीं होगी.
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लागत
शुरू में एयरपोर्ट पर 36 अरब पाकिस्तानी रुपये (31.1 करोड़ डॉलर) की लागत आने का अनुमान था. लेकिन अब अधिकारियों का कहना है कि नए एयरपोर्ट को बनने पर 70 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च हुए हैं.
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पहली उड़ान
नया एयरपोर्ट 4,300 एकड़ में फैला हुआ है. एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद सबसे पहले यहां पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का एक घरेलू विमान उतरेगा.
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छोटा एयरपोर्ट?
सालाना 90 लाख मुसाफिरों की क्षमता वाले इस एयरपोर्ट को दुनिया के कई एयरपोर्ट के मुकाबले छोटा ही माना जाएगा. मिसाल के तौर पर दुबई इंटरनेशल एयरपोर्ट 8 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम है.
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जनसंख्या
रुढ़िवादी पाकिस्तान में परिवार नियोजन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यही वजह है कि पाकिस्तान एशिया में सबसे ज्यादा जन्मदर वाले देशों में शामिल है. विश्व बैंक और पाकिस्तान सरकार के आकंड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में प्रति महिला तीन बच्चे का औसत है.
पाकिस्तान में 1960 के मुकाबले जनसंख्या पांच गुनी हो गई है, जो अब 20 करोड़ के पार जा पहुंची है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण सामाजिक और आर्थिक प्रगति का कोई असर नहीं दिखता.
समस्या यह है कि पाकिस्तान में गर्भनिरोधकों के बारे में खुल कर बात भी नहीं होती. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जनसंख्या की बढ़ती रफ्तार को काबू नहीं किया गया तो उसे पालने के लिए देश के प्राकृतिक संसाधन कम पड़ जाएंगे.
पानी की किल्लत
पाकिस्तान में पीने केपानी के भी लाले पड़ सकते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि अगर अधिकारियों ने पानी की किल्लत से निपटने के लिए कदम नहीं उठाए तो पाकिस्तान गंभीर सूखे के संकट का सामना करने को मजबूर होगा.
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2025 तक पाकिस्तान में पानी की बुरी तरह किल्लत हो सकती है. इसका मतलब है कि प्रति व्यक्ति सिर्फ 500 घन मीटर पानी बचेगा
कराची के जू में बिलखते जानवर
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पाकिस्तान में विशाल हिमालय ग्लेशियर और नदियां हैं. इसके अलावा मॉनसून की बारिश और उससे आने वाली बाढ़ हर साल का किस्सा है. लेकिन इस पानी को बचाकर रखने का कोई इंतजाम नहीं है. पूरे देश में सिर्फ तीन बड़े जल भंडारण बेसिन हैं जबकि दक्षिण अफ्रीका या कनाडा जैसे देशों में ऐसे बेसिनों की संख्या एक हजार से ज्यादा है.
मंडराते जल संकट से निपटने के लिए भंडारण की व्यवस्था चाहिए और इसके लिए राजनीतिक पहलों की जरूरत है. लोगों को जल संरक्षण के बारे में भी जागरूक करने के लिए काफी कुछ किए जाने की जरूरत है.
पाकिस्तान और सेना
पाकिस्तान के 71 साल के इतिहास में लगभग आधे समय तक सेना ने देश पर राज किया है. इसलिए सैन्य और असैन्य नेतृत्व के बीच हमेशा से खींचतान रही है जिसे जानकारी लोकतंत्र और प्रगति की राह में बाधा समझते हैं.
2013 में उम्मीद बंधी जब पहली बार एक चुनी हुई सरकार ने सत्ता दूसरी चुनी हुई सरकार को सौंपी लेकिन सेना और सत्ताधारी पीएमएल (एन) पार्टी के बीच रस्साकशी बार बार सुर्खियों में रही. भ्रष्टाचार के आरोपों में नवाज शरीफ को ना सिर्फ प्रधानमंत्री पद गंवाना पड़ा बल्कि उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दे दिया गया.
भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार करने वाले नवाज शरीफ इसके अपने खिलाफ सेना और अदालतों की साजिश बताते हैं. नई सरकार के लिए सेना से संबंधों में संतुलन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं.
एके/एनआर(एएफपी)
ये है पाकिस्तान का सबसे खतरनाक इलाका
फाटा: दुनिया की नाक में दम करने वाला इलाका
पाकिस्तान के कबाइली इलाके लंबे समय तक आतंकवाद का गढ़ रहे हैं. 2018 में इस इलाके को पाकिस्तान के खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत में शामिल किया गया. जानिए क्यों खास है फाटा कहा जाने वाला यह इलाका.
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सबसे खतरनाक जगह
पाकिस्तान के कबाइली इलाकों को कभी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दुनिया का सबसे खतरनाक इलाका बताया था. इस पहाड़ी इलाके को लंबे समय से तालिबान और अल कायदा लड़ाकों की सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है.
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केपीके का हिस्सा
अब इस अर्धस्वायत्त इलाके को पाकिस्तान के खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत में शामिल किया जा रहा है. यानी अब तक कबाइली नियम कानूनों से चलने वाले इस इलाके पर भी अब पाकिस्तान का प्रशासन और न्याय व्यवस्था के नियम लागू होंगे.
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सात जिले
अफगानिस्तान की सीमा पर मौजूद पाकिस्तान के कबाइली इलाके में सात जिले हैं जिन्हें सात एजेंसियां कहा जाता है. संघीय प्रशासित इस कबाइली इलाके को अंग्रेजी में फेडरली एडमिनिटर्ड ट्राइबल एरिया (FATA) कहा जाता है.
गुलामी मंजूर नहीं
फाटा की आबादी लगभग पचास लाख है जिसमें से सबसे ज्यादा पख्तून लोग शामिल हैं. ब्रिटिश राज में इस इलाके को फाटा नाम दिया गया था. यहां रहने वाले पठान लड़ाकों ने खुद को गुलाम बनाने की कोशिशों का डटकर मुकाबला किया था.
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सस्ती बंदूकें
अभी तक यह इलाका पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बफर जोन की तरह रहा है. यह इलाका सस्ती बंदूकों की मंडी के तौर पर बदनाम रहा है. अफीम के साथ साथ यहां तस्करी का सामान खुले आम बिकता है.
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कबीलों का राज
ब्रिटिश अधिकारियों ने 1901 में इस इलाके के लिए फ्रंटियर क्राइम्स रेग्युलेशन बनाया था, जिसके तहत राजनीति तौर पर नियुक्त होने वाले लोगों को यहां शासन का अधिकार है. इन लोगों के पास एक व्यक्ति के जुर्म की सजा पूरे कबीले को देने तक का अधिकार है.
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स्वायत्तता का लालच
1947 में पाकिस्तान बनने के बाद भी फाटा में वैसे ही शासन चलता रहा जैसे अंग्रेजी दौर में चलता था. पाकिस्तान की सरकार ने इलाके के लोगों को स्वायत्ता लालच दिया ताकि वे पाकिस्तान में शामिल हो जाएं.
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विकास नहीं हुआ
इलाके को स्वायत्ता की भारी कीमत चुकानी पड़ी. विकास के लिए मिलने वाली रकम दशकों तक यहां पहुंची ही नहीं. इसका नतीजा यह हुआ कि कबाइली इलाके और बाकी पाकिस्तान में जमीन आसमान का अंतर नजर आता है.
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उग्रवाद की उपजाऊ जमीन
वंचित लोगों में नाराजगी पैदा होना आम बात है. इसलिए यह इलाका चरमपंथ का गढ़ बन गया है जो न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पड़ोसी अफगानिस्तान के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन कर उभरा.
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सोवियत संघ के खिलाफ
फाटा 1979 में अफगानिस्तान में रूसी हमले के दौरान सोवियत संघ के खिलाफ सीआईए समर्थित मुजाहिदीन के अभियान का अहम ठिकाना रहा है. दुनिया भर के इस्लामी लड़ाके यहां पहुंचे, जिनमें से कुछ ने बाद में अल कायदा खड़ा किया.
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चरमपंथियों की पनाहगाह
11 सितंबर 2001 के हमले के बाद अमेरिका ने जब अफगानिस्तान पर हमला किया तो वहां से भाग कर तालिबान और अल कायदा के चरमपंथियों ने इसी इलाके में शरण ली. तहरीक ए तालिबान का यहीं जन्म हुआ.
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ड्रोन हमले
अमेरिका ने कई बरस तक इस इलाके में ड्रोन हमलों के जरिए चरमपंथियों को निशान बनाया. हालांकि पाकिस्तान हमेशा ऐसे हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार देता रहा.
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पाकिस्तान सरकार के दावे
पाकिस्तान सरकार दावा करती है कि इस इलाके में आतंकवादी ठिकाने खत्म कर दिए गए हैं. हालांकि अमेरिका कहता है कि अफगानिस्तान में नाटो और अफगान बलों पर हमले करने वाले चरमपंथी अब भी फाटा को इस्तेमाल कर रहे हैं.