पुतिन के दोस्त को ट्रंप ने बनाया अमेरिकी विदेश मंत्री
१४ दिसम्बर २०१६
राजनीति के नवसिखुआ डॉनल्ड ट्रंप ने एक और नवसिखुआ रेक्स टिलरसन को अमेरिका का विदेशमंत्री बनाने का फैसला किया है. डॉयचे वेले के मियोद्राग सोरिच बता रहे हैं कि क्या एक्स प्रमुख की नियुक्ति सही फैसला है.
वे अभी कुर्सी पर बैठे भी नहीं हैं, लेकिन चेहरे पर ठंडी बयार बहने लगी है. 64 वर्षीय रेक्स टिलरसन को सरकार में काम करने का कोई अनुभव नहीं है. विशाल कंपनी एक्सॉन के प्रमुख के रूप में उन्होंने दुनिया भर के शासकों के साथ कारोबार किया है और सौदे किए हैं. यहां तक कि उनसे तमगा भी लिया है. रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रूबियो ने ट्वीट किया, "वे किसी पुतिन-मित्र को स्टेट डिपार्टमेंट में नहीं देखना चाहते." उन्हीं की पार्टी के सीनेटर जॉन मैक्केन ने भी क्रेमलिन के साथ टिलरसन की नजदीकी की आलोचना की है. और सीनेटर बॉब मेनेंडेज इस नियुक्ति को बकवास बताते हैं.
ये सब नियुक्ति के लिए होने वाली सीनेट की सुनवाई से पहले टिलरसन के लिए कोई अच्छे संकेत नहीं हैं. उनके लिए सीनेट का बहुमत फिलहाल सुरक्षित नहीं दिखता है. इसके बावजूद नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उनके पक्ष में और अपनी रिपब्लिकन पार्टी के साथ एक और पंगा लेने का फैसला किया है. आखिर क्यों?
पूर्वविदेशमंत्रीकासुझाव
सच्चाई यह है कि ट्रंप और टिलरसन एक दूसरे को चुनाव से पहले ठीक से जानते भी नहीं थे. टेक्सस के टिलरसन हालांकि रिपब्लिकन हैं लेकिन चुनाव में उन्होंने दूसरे उम्मीदवारों का समर्थन किया था, वित्तीय रूप से भी. इस शख्स पर ठीक से ध्यान देने का सुझाव ट्रंप को बाहर से मिला. जेम्स बेकर और कोंडोलीजा राइस जैसे पूर्व विदेश मंत्रियों ने टिलरसन के पक्ष में बोला. और जब दोनों की बातचीत हुई तो भावी राष्ट्रपति और तेल कंपनी के सीईओ के सुर और ताल दोनों शुरू से ही मिल गए.
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दोनों विदेश नीति को एक तरह का कारोबार मानते हैं. यह कुछ हद तक सच भी है, खासकर अमेरिका के लिए. लेकिन विदेश नीति सिर्फ कारोबार नहीं है. उन मुद्दों का क्या जिनमें अमेरिका को कोई वित्तीय फायदा नहीं होने वाला है, जैसे कि मानवाधिकारों की रक्षा का मुद्दा. जो दुनिया भर में मानवाधिकारों की रक्षा की मांग करते है, वह दोस्त नहीं बनाता, खासकर तानाशाहों के साथ तो कतई नहीं. अमेरिकी विदेश मंत्रियों ने अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ सालों से यही किया है. और अगर विश्व में लोकतंत्रों की बढ़ती तादाद देखें तो उन्हें कामयाबी भी मिली है.
तो क्या रेक्स टिलरसन की नियुक्ति के बाद स्थिति बदल जाएगी? क्या अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खनिजों का दोहन और कारोबारी समझौतों में फायदा मानवाधिकारों से ज्यादा अहम हो जाएगा? क्या नाटो में और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा में अमेरिका की सक्रियता कम हो जाएगी क्योंकि उस पर खर्च होता है? क्या अमेरिका अपने में सिमट जाएगा, वह वैश्विक व्यवस्था कायम करने वाली सत्ता नहीं रह जाएगा?
अमेरिका में रिपब्लिकन डॉनल्ड ट्रंप की जीत के बाद तय हो गया है कि उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप अमेरिका की फर्स्ट लेडी होंगी.
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विदेश में जन्मी फर्स्ट लेडी
स्लोवेनिया में जन्मी मेलानिया बीते 187 साल में ऐसी पहली अमेरिकी फर्स्ट लेडी होंगी जिनका जन्म विदेश में हुआ है.
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मॉडलिंग
मेलानिया पेशे से मॉडल रही हैं और 2005 में उन्होंने डॉनल्ड ट्रंप से शादी की.
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ना उम्र की सीमा हो..
डॉनल्ड ट्रंप और मेलानिया ट्रंप की उम्र में 24 साल का अंतर है.
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2006 में मिली नागरिकता
मेलानिया 1996 में पहली बार अमेरिका गईं और इसके दस साल बाद उन्हें 2006 में अमेरिकी नागरिकता मिली.
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ट्रंप का साथ
मेलानिया ट्रंप की तीसरी पत्नी हैं. इससे पहले इवाना जेलनिकोवा के साथ ट्रंप की शादी 1977 से 1991 तक चली जबकि मार्ला मैपल्स से वो 1993 में शादी करने के बाद 1999 में अलग हो गए.
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एक बच्चा
मेलानिया और ट्रंप का एक बेटा है जिसका नाम है बैरोन ट्रंप. वैसे ट्रंप के कुल पांच बच्चे हैं.
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"ट्रंप जेंटलमैन"
चुनाव प्रचार के दौरान जब ट्रंप एक विवादित वीडियो को लेकर चौतरफा आलोचना में घिरे तो मेलानिया ने उनका जमकर बचाव किया और ट्रंप को जेंटलमैन बताया था.
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पांच भाषाएं
बताया जाता है कि मेलानिया पांच भाषाएं बोल लेती हैं जिनमें उनकी मातृभाषा स्लोवेनियन के अलावा सर्बियन, फ्रेंच, अंग्रेजी और जर्मन शामिल हैं.
यह सचमुच अब तक के पश्चिमी व्यवस्था के अंत की शुरुआत होगी. एक व्यवस्था जिसने सिर्फ ट्रांस अटलांटिक समुदाय को ही सुरक्षा और समृद्धि मुहैया नहीं कराई है बल्कि विश्व के कई सारे दूसरे देशों के साथ साथ खुद अमेरिका को भी.
प्रलय की बात करने करने का फिलहाल समय नहीं आया है, हालांकि यूरोपीय लोगों का ऐसा रुझान होता है. अमेरिका के महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदार के रूप में उन्हें भविष्य में भी आत्मविश्वास दिखाना होगा. अमेरिका अपने यूरोपीय साथियों और सहयोगियों के साथ मिलकर ही सचमुच की महाशक्ति है.
अरबपतियों और सैनिक जनरलों से भरे ट्रंप कैबिनेट के बारे में यूरोप में भले ही बहुत सारे संशय हों , लेकिन इसके बावजूद एक विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को भी खुद को साबित करने का उचित मौका मिलना चाहिए.
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को यहां तक पहुंचाने में उनकी दौलत ने काफी मदद की है. केवल ट्रंप के नाम पर दुनिया भर मशहूर हैं ये जगहें.
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लास वेगस
लास वेगस में ट्रंप इंटरनेशनल होटल एंड टावर स्थित है. इसके बराबर में मौजूद लक्जरी विन रिजॉर्ट भी इसके सामने बौना नजर आता है. ट्रंप कॉम्प्लेक्स इस शहर की तीसरी सबसे ऊंची इमारत है.
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शिकागो
शिकागो के बहुत सारे लोगों को यहां दिखने वाले ट्रंप होटल एंड टावर से परेशानी है. मेयर राहम इमैनुएल ने तो इसे "भद्दा और असुरुचिपूर्ण" तक कह डाला और उनके नाम के हिस्से 'ट्रंप' को बैन भी करवाया. लेकिन पांच साल के बाद फिर ट्रंप ने इसकी 16वीं मंजिल पर अपना नाम लगवा लिया.
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अटलांटिक सिटी
यहां ताज महल कैसे? असल में ट्रंप ने 1990 में न्यू जर्सी की अटलांटिक सिटी में ताज महल का निर्माण कार्य पूरा करवाया. करीब एक अरब डॉलर की लागत से बने इस कसीनो और होटल को 25 साल तक चलाने के बाद दिवालिया होने की नौबत आ गई थी. 2014 में यह बिक गया लेकिन नए मालिकों ने ट्रंप ब्रांड नहीं छोड़ा.
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मैनहैट्टन की सड़कों पर
न्यूयॉर्क में स्थित ट्रंप टावर उनकी बहुत खास संपत्ति माना जाता है. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के अभियान के लिए यही उनका मुख्यालय भी है. इस इमारत में फुटबॉल सितारे क्रिस्टियानो रोनाल्डो, अभिनेता ब्रूस विलिस जैसे कई मशहूर सेलेब्रिटीज के आशियाने हैं. खुद ट्रंप का परिवार भी यहीं लक्जरी टावर में रहता है.
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न्यूयॉर्क का विवादित प्रतीक
725 फिफ्थ एवेन्यू पर बने ट्रंप टावर को बहुत से स्थानीय निवासी पसंद नहीं करते तो कई इसे बहुत शालीन और टाइमलैस बताते हैं. यह छह मंजिला ट्रंप टावर संगमरमर और सुनहरे रंगों से सजा है. आधुनिक आर्किटेक्चर के शौकीनों और ट्रंप समर्थकों के लिए यह बड़ा आकर्षण है.
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गरीबी-अमीरी का साफ अंतर
पनामा सिटी के ट्रंप ओशन क्लब में एक होटल, 700 अपार्टमेंट और अपना प्राइवेट यॉट क्लब है. यह पूरे लैटिन अमेरिका की सबसे ऊंची बिल्डिंग है. हालांकि इससे पास ही स्थित गरीब लोगों की बस्ती के कारण कई लोग इन अपार्टमेंट में नहीं रहना चाहते.
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स्कॉटिश विरोध
भले ही एबरडीन, स्कॉटलैंड में बनाए अपने ट्रंप इंटरनेशनल गोल्फ लिंक्स एस्टेट को डॉनल्ड ट्रंप "दुनिया का सर्वोत्तम गोल्फ कोर्स" कहते रहें, पास की एक जमीन को बेचने के लिए एक स्थानीय स्कॉट आज तक तैयार नहीं हुआ. जून में ही ट्रंप वहां पहुंचे और स्कॉटलैंड के ईयू में बने रहने की इच्छा को नजरअंदाज करते हुए यूके के ब्रेक्जिट के निर्णय की खूब तारीफ की.
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एर्दोआन के मुकाबले ट्रंप
पूरे यूरोप में सबसे पहला ट्रंप टावर इस्तांबुल में ही बना था. यह अपने विशाल वाइन संग्रह के लिए मशहूर है. हालांकि इस ऊंचे टावर से ट्रंप का नाम हटाने की मांग हुई थी. इस कॉम्प्लेक्स का मालिक एक तुर्की अरबपति है जिसने ट्रंप ब्रांड नेम लिया हुआ था. ट्रंप के इस्लाम और मुस्लिम विरोधी विचारों के कारण राष्ट्रपति एर्दोआन समेत तुर्की के कई मुसलमान नाखुश हैं.