इस्लामाबाद में 15 जनवरी को होने वाली भारत और पाकिस्तानी विदेश सचिव स्तर की वार्ता को फिलहाल टाल दिया गया है. पठानकोट एयर बेस पर हुए आतंकी हमले की जांच के क्रम में कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं.
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कुछ मीडिया संस्थानों ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की गिरफ्तारी की खबर प्रकाशित की थी. इसकी पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है. हालांकि 15 जनवरी को दोनों देशों के विदेश सचिवों की नियोजित वार्ता पर असमंजस खत्म हुआ. पाकिस्तानी विदेश मामलों के प्रवक्ता काजी खलीलुल्ला ने बताया कि भारत के साथ मिलकर दोनों पक्षों ने वार्ता को बाद की किसी तारीख को आयोजित कराए जाने का निर्णय लिया. जैश प्रमुख अजहर की गिरफ्तारी या उसे हिरासत में लिए जाने की प्रवक्ता ने पुष्टि नहीं की.
बुधवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की ओर से एक उच्च स्तरीय वार्ता के बाद जारी बयान में बताया गया कि पठानकोट हमले के सिलसिले में जैश से जुड़े "कई व्यक्तियों" को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा इस आतंकी संगठन के कई दफ्तरों का पता लगाकर उन्हें सील भी कर दिया गया है.
दो जनवरी को पठानकोट में वायु सेना के अड्डे पर हुए हमले के बाद से ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच होने वाली वार्ता को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. समाचार एजेंसी पीटीआई ने लिखा है कि विदेश सचिव स्तर की बातचीत से पहले दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात हो सकती है.
दोस्ती की बांह पर आतंकियों के हमले
भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी शांति वार्ता की कोशिशें होती हैं, तभी कुछ ऐसा होता है कि माहौल बिगड़ जाता है. एक नजर उन घटनाओं पर जिन्होंने दोनों देशों को बार बार बातचीत की मेज से युद्ध के उन्माद तक पहुंचाया.
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कारगिल युद्ध
अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ की अगुवाई में भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती नए मुकाम पर थी. बसें चल रही थीं, आम लोग आसानी से इधर उधर आ रहे थे. तभी मई 1999 में भारत प्रशासित कश्मीर की चोटियों पर पाकिस्तानी सैनिकों का कब्जा हुआ. इसके बाद नवाज शरीफ का तख्तापलट हुआ और कारगिल के मास्टरमाइंड जनरल परवेज मुशर्रफ सत्ता में आए.
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आगरा सम्मेलन
जून 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की आगरा में शिखर बैठक हुई. माना जाता है कि दोनों नेता कश्मीर विवाद को हल करने के काफी करीब पहुंच चुके थे. लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि एक झटके में सारी वार्ता विफल हो गई. इसे ऐतिहासिक चूक कहा जा सकता है.
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संसद पर हमला
13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला हुआ. हमले में छह पुलिसकर्मी, दो सुरक्षाकर्मी, एक बागवान और पांच आतंकवादी मारे गए. इस हमले के बाद भारतीय सेनाएं पाकिस्तान सीमा पर तैनात कर दी गई. पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड रोक दी गई. अमेरिका के दखल से युद्ध टला.
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समझौता एक्सप्रेस
भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती की प्रतीक बनी रेल सेवा भी आतंकवादी हमले का शिकार बनी. फरवरी 2007 में दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियों में धमाके हुए. 68 लोगों की मौत हुई. पाकिस्तान का आरोप है कि धमाके हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों ने किए.
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हमलों की बाढ़
2008 में भारत के कई शहरों में आतंकवादी हमलों की बाढ़ सी आई. रामपुर, जयपुर, अहमदाबाद, बेंगलुरू, दिल्ली और पूर्वोत्तर भारत में कई हमले हुए. तत्कालीन यूपीए सरकार लाचार सी दिखने लगी. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उपजने लगा.
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मुंबई हमले
और 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले ने नई दिल्ली के सब्र का बांध तोड़ दिया. विदेशी एजेंसियों की मदद से बहुत जल्दी यह साफ हो गया कि आतंकी हमले के दौरान कराची से निर्देश ले रहे हैं. तब से अब तक नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच शांति वार्ता पुराने रूप में बहाल नहीं हो सकी है.
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पास आकर दूर हुए
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच एक बार शांति वार्ता की कोशिशें शुरू हुई. शुरुआत सकारात्मक हुई लेकिन कश्मीरी अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात के बाद वार्ता की कोशिशें फीकी पड़ने लगी. जम्मू कश्मीर में सरहद पर दोनों देशों के बीच समय समय पर गोली बारी होने लगी.
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गुरदासपुर और ऊधमपुर हमला
जुलाई 2015 में पंजाब के गुरुदासपुर में हुए आतंकवादी हमले और उसके हफ्ते भर बाद जम्मू के ऊधमपुर में भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले हुए. हमलों में आतंकवादियों से ज्यादा सुरक्षाबल के जवान मारे गए. इन हमलों का असर भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य में होने वाली बातचीत पर पड़ना तय है.
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बारूद का ढेर
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल इस्लामाबाद जाकर पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने वाले हैं. भारत का मानना है कि पाकिस्तान भारत पर हमलों के लिए आतंकवादियों का इस्तेमाल कर रहा है. भारतीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान भारत के सब्र का इम्तिहान ले रहा है.
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इस्लामी कट्टरपंथी मौलाना मसूद अजहर को 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले का आरोपी माना जाता है. बुधवार को पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार दोषियों का पता लगाने के लिए पाकिस्तान ने एक उच्चस्तरीय टीम के गठन की घोषणा की. यह टीम पाकिस्तान के काबिल आतंकरोधी अधिकारियों और दोनों देशों से सैनिक और नागरिक खुफिया अधिकारियों को मिलाकर बनेगी.
इससे पहले अगस्त 2015 में दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों की बातचीत प्रस्तावित थी. मगर जम्मू कश्मीर के अलगावादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं से मुलाकात की बात पर इसे रद्द कर दिया गया था. इसके बाद 25 दिसंबर को अचानक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अफगानिस्तान दौरे से लौटते हुए लाहौर जाकर प्रधानमंत्री शरीफ से मिले. दोनों देशों के बीच शुरु हुआ मुलाकात और बातचीत के सिलसिला पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के कारण अस्थाई तौर पर पटरी से उतरता दिख रहा है.