फेसबुक पर दोस्तों और परिजनों की पोस्ट ज्यादा दिखेगी
१२ जनवरी २०१८
फेसबुक के जरिए अपना कारोबार बढ़ाने वाली कंपनियां इस खबर को देखकर परेशान हो सकती हैं. क्योंकि फेसबुक अब विज्ञापनों के बजाय अपने न्यूज फीड में दोस्तों और परिवार वालों को अधिक अहमियत देगी.
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के संस्थापक और प्रमुख कार्यकारी मार्क जकरबर्ग ने इस साल फेसबुक में किए जाने वाले नए बदलावों पर खुलकर चर्चा की. इन बदलावों के तहत कंपनी अब ऐसी न्यूज फीड को प्राथमिकता देगी जो दोस्तों और परिवारों की ओर से साझा की गई होंगी. साथ ही कंपनी किसी ब्रांड या अन्य पब्लिशर्स के कंटेट को न्यूज में कम करेगी.
जकरबर्ग ने कहा ने पिछले सालों में फेसबुक अलॉगरिद्म ऐसे कंटेट को प्रमुखता देती रही जो लाइक्स या कमेंट्स के जरिए यूजर्स को बांधे रखता था. अब कंपनी ने इस रणनीति को बदल दिया है. उन्होंने कहा कि लक्ष्य बदल रहे हैं ताकि सार्थक बातचीत को बढ़ाया जा सकें. फेसबुक के उपाध्यक्ष जॉन हेगेमैन ने साफ किया कि इन बदलावों का सोशल नेटवर्क पर दिए जाने वाले विज्ञापनों पर कोई असर नहीं होगा.
एक मिनट में कितना पैसा कूटते हैं ये अमीर
आप एक मिनट फेसबुक देखिए, इतनी देर में जकरबर्ग 5,593 डॉलर कमा चुके होंगे. देखिए दुनिया के सबसे बड़े अमीरों की प्रति मिनट कमाई.
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10. लिलियन बेटनकोर्ट (लॉरियल की मालकिन)
4,121 डॉलर प्रति मिनट
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09. चार्ल्स और डैविड कॉख (कॉख इंडस्ट्रीज)
4,908 डॉलर प्रति मिनट
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08. माइकल ब्लूमबर्ग (ब्लूमबर्ग के मालिक)
4,888 डॉलर प्रति मिनट
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07. मार्क जकरबर्ग (फेसबुक के संस्थापक)
5,593 डॉलर प्रति मिनट
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06. कैरी एलिसन (ऑरेकल के मालिक)
5,707 डॉलर प्रति मिनट
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05. जेफ बेजोस (एमेजॉन के संस्थापक)
5,981 डॉलर प्रति मिनट
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04. कार्लोस स्लिम हेलू (टेलमैक्स के मालिक)
6,894 डॉलर प्रति मिनट
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03. वॉरेन बफेट (बैर्कशायर हैथवे के मालिक)
7,671 डॉलर प्रति मिनट
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02. एमानसियो ओरटेगा (जारा के मालिक)
8,219 डॉलर प्रति मिनट
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01. बिल गेट्स (माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक)
8,858 डॉलर प्रति मिनट
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दरअसल पिछले कुछ समय से फेसबुक और बाजार में इसके अन्य प्रतिस्पर्धी आलोचनाओं का शिकार हो रहे हैं. आलोचना ये कि यहां दिखाए जाने उत्पाद और अन्य सामग्री, यूजर्स पर गहरी छाप छोड़ती है. राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे पर लोगों के मतभेद, विवाद बढ़ने लगे हैं, साथ ही सोशल मीडिया की लत लोगों में घर करती जा रही है. इन्हीं वजहों के चलते फेसबुक नियमन पर भी बहस चल रही थी.
फेसबुक की आलोचना इस बात को लेकर भी रही है कि इसने भ्रामक सामग्री और गलत जानकारी को हवा दी है. साथ ही साल 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के अतिरिक्त अन्य देशों के राजनीतिक घटनाक्रमों को भी प्रभावित किया है. पिछले साल फेसबुक ने एक खुलासे में माना था कि रूसी एजेंटों ने इसका प्रयोग अमेरिकी चुनावों के दौरान गलत संदेशों के प्रचार के लिए किया. फेसबुक को दुनिया के 2 अरब से भी ज्यादा लोग हर माह इस्तेमाल करते हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्क है.
एए/एनआर (रॉयटर्स)
डाटा बेचकर पैसा बनाता फेसबुक
दुनिया में तकरीबन 200 करोड़ लोग फेसबुक के एक्टिव यूजर्स हैं, लेकिन ये यूजर्स फेसबुक को एक रुपये का भुगतान नहीं करते. ऐसे में सवाल उठता है कि फेसबुक कंपनी चलाने के लिए पैसा कहां से लाती है. जानते हैं फेसबुक की कमाई का राज
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आइडिया बनी कंपनी
होस्टल से कमरे से शुरू हुआ एक छोटा आइडिया आज एक ग्लोबल प्रोजेक्ट बन गया है, दुनिया की लगभग एक चौथाई जनसंख्या आज फेसबुक की रजिस्टर्ड यूजर में शामिल है.रोजाना तकरीबन 200 करोड़ लोग फेसबुक पर लाइक, कमेंट के साथ-साथ तस्वीरें भी डालते हैं.
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कंपनी की आय
मोटा-मोटी फेसबुक पर औसतन हर एक यूजर दिन के करीब 42 मिनट बिताता है. पिछले कुछ सालों में कंपनी की कुल आय, तीन गुना तक बढ़ी है और आज की तारीख में इसकी नेट इनकम करीब 900 करोड़ यूरो तक पहुंच गई है.
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मुफ्त सेवायें
अब सवाल है कि जब फेसबुक की सारी सुविधायें यूजर्स के लिए फ्री हैं तो पैसा कहां से आता है. सीधे तौर पर बेशक फेसबुक अपने यूजर्स से पैसा नहीं लेता लेकिन ये यूजर्स के डाटा बेस को इकट्ठा करता है और उन्हें कारोबारी कंपनियों को बेचता है. आपका हर एक क्लिक आपको किसी न किसी कंपनी से जोड़ता है.
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डाटा के बदले पैसा
फेसबुक अपने यूजर डाटा बेचकर कंपनियों से पैसे कमाता है. मसलन कई बार आपसे किसी साइट या किसी कंपनी में रजिस्टर होने से पहले पूछा जाता है कि क्या आप बतौर फेसबुक यूजर ही आगे जाना चाहते हैं और अगर आप हां करते हैं तो वह साइट या कंपनी आपकी सारी जानकारी फेसबुक से ले लेती है.
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विज्ञापनों का खेल
दूसरा तरीका है विज्ञापन, अपने गौर किया होगा कि आपको अपने पसंदीदा उत्पादों से जुड़े विज्ञापन ही फेसबुक पर नजर आते होंगे. मसलन अगर आपने पसंदीदा जानवर में बिल्ली डाला तो आपके पास बिल्लियों के खाने से लेकर उनके स्वास्थ्य से जुड़े तमाम विज्ञापन आयेंगे
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ऑडियंस टारगेटिंग
सारा खेल इन विज्ञापनों की प्लेसिंग का है. इस प्रक्रिया को टारगेटिंग कहते हैं. फेसबुक मानवीय व्यवहार से जुड़ा ये डाटा न सिर्फ कंपनियों को उपलब्ध कराता है बल्कि तमाम राजनीतिक समूहों को भी उपलब्ध कराता है. मसलन ब्रेक्जिट के दौरान उन लोगों की टारगेटिंग की गई थी जो मत्स्य उद्योग से जुड़े हुए हैं.
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कौन होता प्रभावित
इन सब के बीच ये अब तक साफ नहीं हुआ है कि कौन किसको कितना प्रभावित कर रहा है और कंपनियों को फेसबुक के साथ विज्ञापन प्रक्रिया में शामिल होकर कितना लाभ मिल रहा है. साथ ही डाटा खरीदने-बेचने की इस प्रक्रिया में कितने पैसे का लेन-देन होता है.
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कोई जिम्मेदारी नहीं
फेसबुक किसी डाटा की जिम्मेदारी नहीं लेती और न ही इसकी सत्यता की गारंटी देता हैं. डिजिटल स्पेस की यह कंपनी अब तक दुनिया का पांचवा सबसे कीमती ब्रांड बन गया है. कंपनी ने कई छोटी कंपनियों को खरीद कर बाजार में अपनी एक धाकड़ छवि बना ली है.