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डॉयचे वेले: रइफ बदावी को फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड

२५ फ़रवरी २०१५

अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लड़ने वाले सउदी अरब के उदारवादी ब्लॉगर रइफ बदावी को डॉयचे वेले ने अपने पहले फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड के लिए चुना.

Kanada Saudi-Arabien Demonstration für Blogger Raif Badawi
तस्वीर: picture-alliance/empics

जेल में बंद सऊदी अरब के ब्लॉगर रइफ बदावी को डॉयचे वेले का पहला "फ्रीडम ऑफ स्पीच" अवार्ड दिया जाएगा. यह पुरस्कार डीडब्ल्यू के अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन पुरस्कारों "द बॉब्स" की श्रृखंला में दिया जा रहा है. 31 साल के ब्लॉगर रइफ बदावी को मई 2014 में सऊदी शासन ने 10 साल की कैद, भारी जुर्माना और 1,000 कोड़ों की सजा सुनाई थी. 9 जनवरी को वह 50 कोड़ों की पहली खेप झेल चुके हैं.

डॉयचे वेले के महानिदेशक पेटर लिमबुर्ग ने बताया, "डॉयचे वेले के गवर्निंग बोर्ड ने सर्वसम्मति से रइफ बदावी को चुना है." उन्होंने आगे कहा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मानवाधिकार के प्रति उनकी निडर प्रतिबद्धता एक मिसाल है. हमारे अवॉर्ड से एक संकेत जाता है और उनके भविष्य को लोगों की नजर में लाने में मदद मिलती है. हम उम्मीद करते हैं कि इससे सऊदी अरब के उन लोगों पर दबाव बढ़ेगा जो बदावी को रिहा करने के लिए जिम्मेदार हैं."

बदावी की पत्नी इंसाफ हैदर ने कनाडा से बात करते हुए डॉयचे वेले को बताया, “मैं बहुत खुश हूं! डॉयचे वेले के फ्रीडम ऑफ स्पीच अवॉर्ड से सऊदी शासन तो एक साफ संदेश मिलेगा. यह बेहद शर्मनाक है कि रइफ अब भी जेल में है, खासतौर पर ऐसे वक्त में जब सऊदी अरब इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहा है और खुद मानवाधिकारों की अनदेखी कर रहा है. मैं डॉयचे वेले के समर्थन के लिए बहुत आभारी हूं."

बदावी की पत्नी इंसाफ हैदरतस्वीर: picture-alliance/dpa/C. Burston

ग्लोबल मीडिया फोरम में होगा पुरस्कार समारोह

द बॉब्स - बेस्ट ऑफ आनलाइन एक्टिविज्म की 11वीं वार्षिक प्रतियोगिता में डॉयचे वेले उल्लेखनीय ऑनलाइन एक्टिविस्ट्स और प्रोजेक्ट्स का सम्मान करता है. इस साल डीडब्ल्यू ने फ्रीडम ऑप स्पीच अवॉर्ड की शुरुआत की है जिससे किसी ऐसे व्यक्ति या पहल को सम्मानित किया जा सके, जो डिजिटल दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को असाधारण रूप से बढ़ावा दे रहा हो.

फ्रीडम ऑफ स्पीच और द बॉब्स की तीन अन्य जूरी श्रेणियों के विजेताओं को 23 जून को जर्मनी के बॉन में होने वाले ग्लोबल मीडिया फोरम में पुरस्कृत किया जाएगा.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए निडर

रइफ बदावी ने अपने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए कई सालों से संघर्ष किया है. उन्होंने फ्री सऊदी लिबरल्स नाम की अपनी वेबसाइट में सऊदी अरब के राजनीतिक और सामाजिक दुश्वारियों को बखूबी उठाया है. उदाहरण के तौर पर, उन्होंने धार्मिक पुलिस पर एक व्यंग्यात्मक लेख लिखे और देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को आतंकवादियों का गढ़ बताया था. उन्होंने वैलेंटाइन डे पर भी लिखा, जिसे मनाए जाने पर सऊदी अरब में प्रतिबंध है. जून 2012 में उन्हें गिरफ्तार कर उन पर इस्लाम, धार्मिक नेताओं और राजनेताओं का अपमान करने के आरोप लगे. 2013 में उनकी पत्नी इंसाफ हैदर को अपने तीन बच्चों के साथ सऊदी अरब छोड़ना पड़ा. उन्हें कनाडा में राजनीतिक शरण मिली हुई है.

आरआर/ओएसजे

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