जर्मनी में शरणार्थियों की बहस के बीच सीरिया और इराक से लौट रहे लड़ाकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. जर्मन संघीय पुलिस प्रमुख होल्गर मुंच के मुताबिक ऐसे 400 लोगों की गतिविधियों पर पुलिस की पैनी नजर है.
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मुंच ने एआरडी टीवी चैनल को बताया कि इस्लामिक स्टेट जैसे लड़ाके समूहों में शामिल होने के लिए जर्मनी से सीरिया और इराक जाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है. लेकिन वापस लौट रहे लड़ाकों की संख्या लगातार बढ़ रही है जिनसे आतंकी हमलों का खतरा हो सकता है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि पुलिस ऐसे 750 लोगों को जानती है जो जर्मनी से इराक और सीरिया युद्द में हिस्सा लेने गए थे. उन्होंने बताया कि उनमें से एक तिहाई लोग वापस भी आ गए हैं.
मुंच ने कहा, "यहां से जाने की लहर में कमी आई है लेकिन इसके साथ ही 400 से ज्यादा ऐसे लोग हैं जिनसे खतरा हो सकता है. उनपर हमें नजर रखनी होगी." मुंच ने कहा कि इस्तांबुल में हुआ आत्मघाती हमला जिसमें 10 जर्मन मारे गए, इस ओर संकेत नहीं करता कि जर्मनी में हमले का खतरा पहले से ज्यादा है. तुर्की की सरकार के अनुसार यह आतंकी हमला इस्लामिक स्टेट के एक लड़ाके का काम था जो तुर्की में शरणार्थी बनकर घुसा था. साथ ही कहा गया कि निशाना खास तौर पर जर्मन नहीं थे. जर्मनी और तुर्की दोनों ही अमेरिका के नेतृत्व में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जारी हवाई हमलों में भागीदार हैं.
जर्मनी 2015
एक सेल्फी संकेत में बदल गया. क्या चांसलर को और दूसरे लोगों को इस तरह की तस्वीर के असर का अंदाजा था? साल की समाप्ति 10 लाख शऱणार्थियों के साथ हो रही है. 2015 आधुनिक जर्मनी के इतिहास का अहम साल है.
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भावनाएं और सख्ती
जुलाई 2015 की यह महत्वपूर्ण तस्वीर थी. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने भावनाएं तो दिखाईं लेकिन सख्त रहीं. उन्होंने 14 वर्षीय फलीस्तीनी लड़की को सहलाया और उसके दर्द पर मरहम जरूर लगाया, जिनके माता पिता अभी भी शरण का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन यह भी कहा कि जर्मनी सबको शरण नहीं दे सकता. लड़की सोशल मीडिया स्टार बन गई लेकिन चांसलर की बड़ी आलोचना हुई.
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प्रोमिस्ड लैंड की चांसलर
और अचानक काफिले आने लगे. सीरिया, इराक, अफगानिस्तान से शरणार्थियों ने जर्मनी आना शुरू कर दिया. वे सब यहां शरण चाहते हैं. गर्मियां खत्म होने से पहले ही लाखों लोग जर्मनी पहुंच चुके थे. राजनीतिज्ञों में खलबली मची थी. अंगेला मैर्केल ने घोषणा की शरण के अधिकार में संख्या की सीमा नहीं है. चांसलर ने मानवीयता दिखाई और युद्ध ग्रस्त इलाकों के दमित पीड़ितों की स्टार बन गईं.
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हर सोमवार
एक ओर हजारों लोग अपनी इच्छा से शरणार्थियों की मदद करने में, जर्मनी में उनके निवास को आसान बनाने में लगे थे. इतना कि स्वागत की संस्कृति साल का अहम शब्द बन गया. तो दूसरी ओर बहुत से लोग मैर्केल की शरणार्थी नीति के खिलाफ एकजुट हो रहे थे. पेगीडा नाम के संगठन के लिए ड्रेसडेन शहर हर सोमवार को आप्रवासन और प्रतिनिधि लोकतंत्र के खिलाफ विरोध का ठिकाना रहा.
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घृणा में आगजनी
जर्मनी ने 2015 में अपना यह चेहरा भी दिखाया. इस साल शरणार्थियों के रहने के लिए बने 600 घरों पर हमला किया गया. 2011 में उनकी संख्या सिर्फ 18 थी. सुरक्षा अधिकारियों ने इन हमलों में अब किसी ग्रुप का समन्वित हाथ होने का सबूत नहीं पाया है. हमला करने वाले लोग आम तौर पर स्थानीय युवा हैं. और उनमें से अधिकांश अब तक विदेशियों का विरोध करने के कारण पुलिस फाइलों में नहीं हैं.
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हवाई त्रासदी
यूरोप में विमान हादसा. 24 मार्च को बार्सिलोना से डुसेलडॉर्फ आ रहा यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. 150 लोग मारे गए. उनमें हाल्टर्न शहर के हाई स्कूल के 16 बच्चे भी थे. त्रासद बात यह रही कि मनोरोग के शिकार को-पाइलट ने जर्मनविंग्स कंपनी के यात्री विमान को जानबूझकर बार्सिलोना से डुसेलडॉर्फ के रास्ते में फ्रांस की आल्प पहाड़ियों पर टकरा दिया.
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राजनीतिक रिश्तेदारी
गद्दी पर बैठने के बाद से ही वे जर्मनी के लोगों को आकर्षक और दिलचस्प लगती रही हैं. इस साल जब ब्रिटेन की महारानी अपने संभवतः अंतिम राजकीय दौरे पर जर्मनी आईं तो यह कुछ कुछ रिश्तेदारों से भेंट जैसी भी थी. महारानी के पति प्रिंस फिलिप जर्मन मूल के हैं. शायद जर्मन सहानुभूति के पीछे ब्रिटेन का ताज वाला गणतंत्र होना है, जैसा कि एक बार जॉर्ज ऑरवेल ने कहा था.
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अतीत का सामना
ये कैसा भाव प्रदर्शन था. आउशवित्स के नाजी यंत्रणा शिविर में कैद रहीं एफा कॉर ने कुख्यात एसएस के पूर्व सदस्य 94 वर्षीय ऑस्कर ग्रोएनिंग की ओर अदालत में सुलह का हाथ बढ़ाया. आउशवित्स के अपराधियों के खिलाफ सबसे ताजा मुकदमे में 81 वर्षीया कॉर ने कहा, "मैंने नाजियों को माफ कर दिया है." अब तक सामान्य जिंदगी जी रहे पूर्व गार्ड ग्रोएनिंग ने भी नाजी काल के नैतिक अपराध को स्वीकार किया.
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ताकतवर चांसलर
जब पश्चिमी दुनिया बवेरिया में चांसलर मैर्केल की मेहमान थी, उस समय तक मैर्केल को लेकर विवाद शुरू नहीं हुआ था, वह मतदाताओं के दिलों पर एकछत्र राज कर रही थीं और यूरोप में उनका रुतबा था. विला एलमाउ में जी-7 शिखर सम्मेलन के अंत में ग्लासहाउस गैसों में कमी लाने का फैसला हुआ. नतीजा पेरिस में पर्यावरण समझौते के रूप में सामने आया.
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राजनीति और साहित्य
इस साल जर्मनी और विश्व ने जिन लोगों को खोया उनमें नोबेल पुरस्कार विजेता जर्मन साहित्यकार गुंटर ग्रास और पूर्व चांसलर हेल्मुट श्मिट भी थे. कोलकाता में एक साल रह चुके ग्रास की मौत 13 अप्रैल को हुई तो लोकप्रिय पूर्व चांसलर हेल्मुट श्मिट ने 10 नवंबर को आखिरी सांसें लीं, हालांकि ग्रास एसपीडी के समर्थक थे लेकिन दोनों शख्सियतों में ज्यादा अपनापन नहीं था.
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नामी ब्रांड का पतन
भरोसेमंद, इमानदार और किफायती - इसके लिए जर्मन कंपनी फोक्सवागेन की कारों का नाम था. और तब इस साल हुआ रहस्योद्घाटन कि कंपनी ने दुनिया भर को धोखा दिया है. लाखों डीजल गाड़ियों में ऐसा सॉफ्टवेयर लगा था जो उत्सर्जन के बारे में सही सूचना नहीं देता था. कंपनी पर अब अलग अलग देशों में करोड़ों का दावा ठोंका गया है.
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बात मनवाने की कला
जैसे जैसे जर्मनी में शरणार्थी संकट गहराता गया, चांसलर अंगेला मैर्केल का राजनैतिक फातिहा पढ़ने की तैयारी होने लगी. पार्टी का बड़ा हिस्सा उनके खिलाफ था. लेकिन मैर्केल ने अपना जुझारुपन दिखाया और कार्ल्सरूहे में हुए पार्टी सम्मेलन में पार्टी और आलोचकों का विश्वास जीतने में कामयाब रहीं. उन्होंने कहा कि जर्मनी ताकतवर है, वह चुनौती का सामना कर पाएगा.
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शक का माहौल
एआरडी टीवी के लिए हुए एक ताजा सर्वे में पाया गया कि कोलोन में नव वर्ष की पूर्व संध्या पर महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी के बाद से लोग देश की शरणार्थी मुद्दे से निपट सकने की क्षमता के बारे में चिंतित हैं. वे और शरणार्थियों के आने की बात से असहज महसूस कर रहे हैं. सर्वे में 51 फीसदी जर्मन वयस्कों ने जाहिर किया कि वे चांसलर अंगेला मैर्केल के दावों पर यकीन नहीं करते जिनमें वह बार बार कहती हैं कि जर्मनी हालात से निपट सकता है. हालांकि अक्टूबर में ऐसा कहने वाले 48 फीसदी ही थे. टेलिफोन सर्वे में 1000 लोगों को शामिल किया गया.
ताजा आंकड़े बताते हैं कि जर्मनी में आत्मरक्षा के लिए हथियार और पेपर स्प्रे खरीदने का सिलसिला बढ़ गया है. खरीदारी में वृद्धि पेरिस हमले के बाद ही बढ़ गई थी. कोलोन में हुई घटना ने इसे और बढ़ाया है. हथियार उद्योग के एक सर्वे में यह बात पता चली. लोगों में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है. छुरे से लेकर नकली फायरिंग करने वाले पिस्तौल तक, पिछले महीनों में इन हथियारों को खरीदने वाले जर्मनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वे आत्मरक्षा के हथियारों से लैस हो रहे हैं.
सीरिया में शक्ति प्रदर्शन
यूरोप शरणार्थी संकट और आतंकी हमलों की आशंका से जूझ रहा है तो सीरिया में विश्व और स्थानीय ताकतें शक्ति प्रदर्शन में लगी हैं. तुर्की का रूसी बमवर्षक को गिराना इसी प्रहसन का हिस्सा है.
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रूस का एसयू-24 विमान नीचे से उड़ते हुए बमबारी कर सकता है. तुर्की की सेना ने ऐसे ही रूसी बमवर्षक को सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाकर गिरा दिया. विमान तुर्क सीमा से चार किलोमीटर दूर सीरिया के अंदर गिरा.
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तुर्की ने 24 नवंबर को रूस का एक बमवर्षक मार गिराया. तुर्की का आरोप है कि उसने रूसी लड़ाकू विमान को दस बार चेतावनी दी जिसे पाइलट ने नजरअंदाज कर दिया. उसके बाद तुर्की ने हमले की प्रक्रिया को सक्रिय किया.
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विदेशी विमान के तुर्की की सीमा के 20 किलोमीटर के अंदर आने पर उन्हें चेतावनी दी जाती है. आठ किलोमीटर करीब आने पर एफ-16 को तैयार कर दिया जाता है. सीमा के हनन पर विदेशी विमान को गिरा दिया जाता है.
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रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने तुर्की की कड़ी आलोचना की है और उसे आतंकवाद का समर्थक बताया है. पुतिन ने विदेश मंत्रालय द्वारा नागरिकों को तुर्की की यात्रा पर न जाने की सलाह का समर्थन किया है. उन्होंने इसे आवश्यक कदम बताया.
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रूस और तुर्की के रिश्तों में खटास का आर्थिक असर भी होगा. हर साल करीब 33 लाख रूसी तुर्की जाते हैं. विदेश मंत्री लावरोव की चेतावनी के बाद विमान कंपनी एयरोफ्लोत का शेयर भाव भी गिरा है जो रूसी पर्यटकों को तुर्की ले जाता है. अंताल्या में क्रेमलिन पैलेस होटल.
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रूसी बमवर्षक तुर्की-सीरिया सीमा पर सीरिया के उस इलाके में गिरा जहां तुर्क मूल के तुर्कमान जाति के लोग रहते हैं. वे सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार का विरोध कर रहे हैं. तुर्की उन्हें समर्थन देता है. रूस का कहना है कि वह आईएस के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है.
मार गिराए गए विमान में दो पाइलट थे. वे हमले के बाद इजेक्ट हो गए. उनमें से एक की मौत हो गई जबकि दूसरे पाइलट को रूसी और सीरियाई स्पेशल फोर्स ने रात की कार्रवाई के बाद बचा लिया. वह लताकिया में रूसी हवाई चौकी पर सुरक्षित पहुंच गया है.
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रूसी विमान को गिराए जाने के बाद तुर्की के राष्ट्रपति एरदोवान और प्रधानमंत्री दावोतोग्लू अपनी हवाई सीमा की रक्षा के तुर्की के अधिकार पर जोर दे रहे हैं. उन्हें अमेरिका सहित नाटो के दूसरे सदस्यों का समर्थन भी मिला है.
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पेरिस पर आतंकी हमले के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहमति के संकेत दिख रहे थे. पुतिन और एरदोवान अंताल्या में मिले थे. लेकिन तुर्की द्वारा रूसी बमवर्षक को गिराए जाने के बाद इस बात की उम्मीद कम हुई है कि सीरिया में सहमति संभव होगी.
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जर्मन विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर ने मॉस्को और अंकारा से समझदारी की अपील की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस घटना का असर सीरिया समस्या के समाधान के लिए हाल ही में शुरू हुई बातचीत पर नहीं पड़ेगा.
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जर्मनी के हथियार निर्माताओं और विक्रेताओं के संघ के निदेशक इंगो माइनहार्ड के मुताबिक 2014 की तुलना में इस साल हथियारों की बिक्री दोगुना हो गई है. संस्था के 1100 सदस्यों के बीच कराए गए टेलिफोन सर्वे के अनुसार छोटे हथियारों के लाइसेंस के लिए आवेदन देने वालों की तादाद भी बढ़ी है. इसके अलावा कोलोन के मार्शल आर्ट प्रशिक्षक योसेफ वेर्नर ने बताया कि महिलाओं के आत्मरक्षा के कोर्स के बारे में पूछताछ लगभग पांच गुना बढ़ गई है.