जर्मनी धनी और विकसित देश है. यहां युवा लोगों के सामने विकास की और जीवन में कुछ करने की ढेर सारी संभावनाएं हैं. लेकिन फिर भी लाखों किशोर ऐसे हैं जो विकास की दौर में पीछे छूट गये हैं.
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जर्मनी में ज्यादातर बच्चों और किशोरों के लिए जिंदगी संवारने के ढेर सारे रास्ते खुले हुए हैं. लेकिन हर चौथे को यानि 25 फीसदी बच्चों को खराब शुरुआती मौकों का सामना करना पड़ता है. बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए बनी संस्था ने चेतावनी दी है कि उनके लिए कुछ करने की जरूरत है.
जर्मनी में एक चौथाई लोग यानि करीब 2.2 करोड़ 27 साल से कम उम्र के हैं और ये संख्या 1991 से लगातार कम होती जा रही है. 2013 में निम्नतम स्तर पर पहुंचने के बाद पिछले सालों में उसमें थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन इसका श्रेय विदेशियों के जर्मनी आने को जाता है. बच्चों और किशोरों की स्थिति पर जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 41 प्रतिशत किशोर हायर सेकंडरी की डिग्री लेकर स्कूल पास करते हैं लेकिन करीब छह प्रतिशत बिना किसी स्कूली डिग्री के रोजगार बाजार में फेंक दिये जाते हैं.
नौजवान लोग आम तौर पर देश में लोकतंत्र की स्थिति से संतुष्ट हैं. 2015 में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार 12 से 25 वर्ष के आयु वर्ग में 73 फीसदी लोग देश में लोकतंत्र से संतुष्ट हैं. इस मामले में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के युवाओं में अंतर है. पश्चिम में 77 प्रतिशत युवा लोगों ने संतोष का इजहार किया है तो पूर्वी जर्मनी में सिर्फ 54 प्रतिशत ने.
इस संतुष्टि की एक वजह यह भी है कि जर्मनी के नौजवान सामाजिक संगठनों में अत्यंत सक्रिय हैं और उनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है. सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण संगठनों में 2010 में 29 साल से कम उम्र के करीब 25 प्रतिशत नौजवना सक्रिय थे जबकि 2002 में उनकी संख्या सिर्फ 17 प्रतिशत थी. बाल और युवा सहायता संगठन के अनुसार 14 से 19 साल के किशोर स्वयंसेवी काम में लगा सबसे सक्रिय ग्रुप है. लेकिन राजनीति को वे संशय से देखते हैं और उसमें परिवर्तन चाहते हैं. 15 से 25 वर्ष के आयु वर्ग में 85 प्रतिशत लोग राजनीति में ज्यादा युवा लोगों का प्रतिनिधित्व देखना चाहते हैं.
जर्मन किशोरों के आविष्कार और खोजें
जर्मनी में टीनएजर्स के लिए हर साल रिसर्च प्रतियोगिता "युगेंड फोर्श्ट" आयोजित होती है. 2016 में 191 युवाओं ने अपनी अपनी खोजों के साथ हिस्सा लिया. प्रस्तुत हुए 110 रिसर्च प्रोजेक्ट्स में से यहां देखिए कुछ चुनिंदा खोजें.
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क्या लड़कों से ज्यादा मददगार लड़कियां?
इस सवाल का जवाब ढ़ूंढने की कोशिश की जर्मनी में फ्रांकेनबर्ग की स्कूली छात्राओं - लॉरा क्रुपके, मारी डिपेल और इजाबेल ड्राथ ने. इन्होंने एक 'अल्टीमेटम गेम' विकसित किया और प्रश्नावली बनाई. 600 से भी ज्यादा हाई स्कूल छात्र, छात्राओं पर टेस्ट कर के नतीजा मिला कि महिलाएं ज्यादा कोऑपरेटिव होती हैं.
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वैसे लड़के भी जानते हैं कोऑपरेशन
इस टीम में यानोश ओट और रॉबिन फॉन वेरडेन ने साथ मिल कर ही एलईडी शूज बनाए हैं. डार्मश्टाट के स्कूली छात्रों ने इंडक्शन कॉयल को स्पोर्ट्स शूज के सोल में लगा दिया. इन जूतों को पहन कर दौड़ने पर इसके छोटे डायनेमो से बैटरी चार्ज हो जाती है.
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आग से बचाने वाला कागज
क्या आप सोच सकते हैं कि कोई कागज आग ना पकड़े बल्कि आग से बचाए. जर्मन शहर कासेल के छात्र यानो शाडे ने रिसाइकिल किए कागज से एक आगरोधी परत बना डाली. इसके लिए इस किशोर ने ज्वलनशील इन्सुलेशन पैनल का आविष्कार किया.
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'ऑगमेंटेड' सरौता
वुपरटाल के छात्र थोमास गेयरब्राख्ट ने होलोग्राफिक प्रोजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया. इस सरौते का केवल आधा हिस्सा सचमुच है और आधा आभासी है.
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गर्म और ठंडा दोनों कर सकने वाले ब्लाइंड्स
खिड़कियों पर लगने वाले ब्लाइंड्स जिनका गहरे रंग का हिस्सा सूर्य की रोशनी लेकर गर्मी दे और चमकीली सतह वाला हिस्सा गर्मी को दूर रखे, ऐसी है पाइने शहर के छात्र लार्स विटे की ऊर्जा बचाने वाली खोज. खास बात यह भी है कि यह शटर ऑटोमेटिक हैं और कमरे के तापमान के अनुसार एडजस्ट हो सकते हैं.
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आपके घर के लिए 3डी स्कैनर
गिसन-ओस्ट हाइस्कूल के छात्र यूलियान कूलेनकाम्फ ने घरों में आसानी से इस्तेमाल किये जाने लायक 3डी स्कैनर बनाया है. इसे बनाने में उन्होंने एक साधारण वेबकैम और लेसर का प्रयोग किया. उनका असल काम था इस साधारण से उपकरण को काम करने लायक बनाने के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करना, जो यूलियान ने खुद कोड किया.
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लीवर कैंसर से बचाने वाली बूटी
नॉए-इजेनबुर्ग के गोएथे स्कूल के छात्रों रोबेर्ट सेजलिंस्की और लुकास हरफ्रिश को ऐसी बूटी ढूंढनी थी. उन्होंने नीले फूलों और रोयेंदार पत्तियों वाले बोराज पौधे से एक जहरीला क्षारीय तत्व निकाला. यहां वे उसी तत्व के अणु 'लाइकोसामिन' का मॉडल पकड़े हुए दिख रहे हैं. अभी इस बूटी पर आगे टेस्ट किया जाना बाकी है, इसलिए फिलहाल इसका सेवन ना करें.
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जर्मनी में परिवार के मायने लगातार बदल रहे हैं. उसकी अलग अवधारणा बनती जा रही है. विवाहित माता पिता और उनके बच्चे वाले परिवार की अवधारणा लगातार टूटती जा रही है. जर्मनी में 35 प्रतिशत बच्चे अविवाहित माता पिता की संतान होते हैं. 18 वर्ष से कम आयु के 23 लाख बच्चे ऐसे परिवारों में रह रहे हैं जहां माता पिता में से सिर्फ एक घर चलाता है. वे आम तौर मांओं के साथ रहते हैं. लगातार पैचवर्क परिवार भी बन रहे हैं जहां मां और पिता अपने अपने बच्चों के साथ मिलकर नया परिवार बना रहे हैं.
देश में बच्चों और किशोरों को सबसे बड़ा खतरा गरीबी और उसकी वजह से होने वाले भेदभाव से है. किशोरों की मदद करने वालों का कहना है कि 37 लाख बच्चे और किशोर गरीबी के खतरे में हैं. उनके परिवारों की आमदनी औसत आय से कम है और इसलिए वे रोजमर्रा की जरूरत की ऐसी चीजें नहीं खरीद सकते, जो दूसरे लोगों के लिए सामान्य है. बहुत से बच्चे ऐसे परिवारों में बड़े हो रहे हैं जहां माता पिता ने कोई हुनर नहीं सीखा है या बेरोजगार हैं.
ऐसे परिवारों में शिक्षा भी समस्या है. हालांकि जर्मनी में शिक्षा मुफ्त है फिर भी वह परिवार की माली हालत पर निर्भर करता है. पिछले सालों से सरकारी प्रयासों से यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़कर 28 लाख हो गई है लेकिन व्यावसायिक प्रशिक्षण पाने वाले नौजवानों की संख्या घटकर साढ़े 13 लाख हो गई है. करीब 1 लाख से ज्यादा लोग विदेशों में पढ़ रहे हैं जबकि 2004 में यह संख्या सिर्फ 40,000 थी. इसके बावजूद कम पढ़े लिखे परिवारों और विदेशी परिवारों के बच्चों को शिक्षा पाने में ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
एमजे/एके (डीपीए)
दुनिया के सबसे अमीर किशोर
इन किशोरों के पास इतनी कम उम्र में ही करोड़ों डॉलर की दौलत है. लेकिन कहां से आई इतनी दौलत...
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निक डी एलॉयसियो (1 नवंबर 1995)
निक एकलौते किशोर हैं जो मनोरंजन जगत से ना जुड़े होने के बावजूद किशोरों में सबसे अमीर हैं. वह तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर के मालिक हैं. ऑस्ट्रेलिया में पैदा हुए निक प्रोग्रामर हैं. शुरुआत में उन्होंने घर में ही एक ऐप बनाया जिसे याहू ने खरीदा. 2014 में उन्हें एप्पल डिजाइन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.
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एबिगेल ब्रेसलिन (14 अप्रैल 1996)
एबिगेल छह साल की उम्र से ही फिल्मों में काम कर रही हैं. वह 1.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मालकिन हैं. 'जॉम्बीलैंड' और 'द कॉल' जैसी फिल्मों के लिए उन्हें जाना जाता है.
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जेडेन स्मिथ (8 जुलाई 1998)
हॉलीवुड अभिनेता विल स्मिथ के बेटे जेडेन स्मिथ की पहचान खुद उनका काम है. वह 80 लाख डॉलर के मालिक हैं. 'द परसूट ऑफ हैप्पिनेस' और जैकी चैन के साथ आई 'द कराटे किड' उनकी मशहूर फिल्में हैं.
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क्लो ग्रेस मोरेत्स (10 फरवरी 1997)
क्लो ग्रेस मोरेत्स के पास 80 लाख डॉलर की संपत्ति है. फिल्म 'किक ऐस' में मिंडी के पात्र के लिए उनके काम की खूब प्रशंसा हुई. इसके अलावा ड्रामा 'इफ आई से' में भी मुख्य भूमिका में उनके काम को खूब सराहा गया.
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एली फैनिंग (9 अप्रैल 1998)
फैनिंग 50 लाख डॉलर की मालकिन हैं. फैनिंग का काम फिल्म 'मैलिफिसेंट' के लिए खूब सराहा गया जिसमें एंजेलीना जोली ने मुख्य भूमिका निभाई थी. फिल्म 'डैडी डे केयर' में भी उनके काम की चर्चा हुई.
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