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बिन लादेन के अंतिम दिनों के दस्तावेज

४ मई २०१२

दुनिया को आतंकी जाल में लपेटने और अमेरिका को हाई अलर्ट पर रखने वाला अल कायदा सरगना बिन लादेन जीवन के आखिरी सालों में गुट और कमजोर साथियों से निराश और असंतुष्ट था. एबटाबाद के उसके घर से मिले दस्तावेज सामने आए हैं.

तस्वीर: AP

पाकिस्तान के एबटाबाद में मिली चिट्ठियों में यह सामने आया है. ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के साल भर बाद इन चिट्ठियों को सार्वजनिक किया गया. वेस्ट प्वाइंट में अमेरिकी सैन्य अकादमी के कॉम्बैटिंग टेरेरिज्म सेंटर ने अपनी वेबसाइट पर 17 दस्तावेज जारी किए है. अक्षम साथियों और सैनिक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा से चिंतित था ओसामा बिन लादेन. वेस्ट प्वाइंट शोध संस्थान के विश्लेषक मानते हैं, "जैसा कि कई लोग सोचते थे बिन लादेन दुनिया भर में जिहादी गुटों को चाबी भरने वाला और कार्रवाई के लिए उकसाने वाला मास्टर नहीं था बल्कि अपने साथियों की अयोग्यता से परेशान था."

चिट्ठियों में बिन लादेन ने दुनिया भर में अल कायदा के हमलों में मारे जा रहे मुसलमानों के बारे में चिंता जताई. वह चाहता था कि महिलाओं और बच्चों को खतरे से दूर रखा जाए.

2010 की एक चिट्ठी में उसने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बागराम इलाके में दो टीमों के नाम एक चिट्ठी लिखी है. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और अमेरिकी जनरल डेविड पेट्रियस के विमानों को निशाना बनाने की योजना का जिक्र है.

अल कायदा की अयोग्यता

17 दस्तावेज ईमेल हैं या चिट्ठियों के ड्राफ्ट हैं जो अरबी में लिखे गए हैं. ये खत सितंबर 2006 से अप्रैल 2011 के बीच के हैं. जिसमें बिन लादेन के अलग अलग नाम लिखे हुए हैं इसमें जमाराई, अबु, अब्दुल्लाह जैसे नाम शामिल हैं.

तस्वीर: dapd

शोध संस्थान के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल लियाम कॉलिन्स कहते हैं, "बिन लादेन अल कायदा सदस्यों की अयोग्यता से चितिंत था. क्योंकि वह जनता का समर्थन नहीं जुटा पा रहे थे. उनकी मीडिया कैम्पेन बुरी थी और योजनाएं बहुत खराब बन रही थीं, जिसके कारण दुनिया भर में बेवजह कई मुसलमानों की जान जा रही थी. शायद सबसे महत्वपूर्ण खुलासा यह हो सकता है कि बिन लादेन स्थानीय जिहादी गुटों से पूरी तरह निराश हो चुका था. वह न तो गुट से जुड़े सदस्यों की कार्रवाई को काबू में रख पा रहा था न ही उनके बयानों को."

बच्चों की चिंता

मौत से एक हफ्ते पहले 26 अप्रैल 2011 को लिखे पत्र में बिन लादेन ने अरब क्रांति के बारे में लिखा है. सरगना ने उन लोगों को खड़ा करने की मांग की है जिन्होंने क्रांति में हिस्सा नहीं लिया.

अफगानिस्तान के बारे में लादेन ने लिखा है, "अफगानिस्तान में जिहाद एक कर्तव्य है." वहीं यमन के बारे में उसने कहा, "यमन में साथियों को देखना चाहिए कि मुजाहिदीन के खिलाफ राजनीतिक और मीडिया की प्रतिक्रिया क्या है और लोगों में उनकी छवि क्या बन रही है."

बिन लादेन की बड़ी चिंताओं में जिहादियों के बच्चों की चिंता भी शामिल थी. 20 अक्तूबर 2010 की चिट्ठी में लादेन ने लिखा, "साथियों को चेतावनी, उन्हें रास्तों पर नहीं मिलना चाहिए और कार से जाना चाहिए नहीं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है. मेरी इच्छा है कि मेरे बेटे हमजा और उसकी मां की सुरक्षा का आप लोग पूरा ध्यान रखेंगे."

तालिबान से नाराजगी

अमेरिकी और यूरोपीय खुफिया सेवा अधिकारियों का कहना है कि यमन से चलने वाला अल कायदा सबसे खतरनाक गुट बन कर उभरा है. लेकिन बिन लादेन एक्यूएपी को लेकर परेशान था और उसने गुट प्रमुख को सलाह दी वह यमनी सरकार और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने की बजाए अमेरिका पर ध्यान दे.

इसी तरह इराक, सोमालिया के अल कायदा को लेकर भी बिन लादेन ने चिंता जताई थी. इतना ही नहीं पाकिस्तानी तालिबान के प्रति भी अल कायदा सरगना की नाराजगी थी. हकीमुल्लाह महसूद को लिखे पत्र में बिन लादेन ने मस्जिदों और बाजारों में हमले रोकने को कहा.

एएम/आईबी (रॉयटर्स, एएफपी)

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