बिन लादेन के 'बॉडीगार्ड' को वापस जर्मनी लाने का आदेश
२५ जुलाई २०१८
इस्लामी कट्टरपंथी सामी ए को गैरकानूनी तरीके से जर्मनी से ट्यूनीशिया भेज दिया गया. चूंकि विदेशियों का दफ्तर उसे अब तक वापस नहीं ला पाया है, अदालत ने बोखुम शहर को धमकी दी है और वापस लाने की समयसीमा तय कर दी है.
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गेल्जेनकिर्षेन की प्रशासनिक अदालत ने अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के संदिग्ध बॉडीगार्ड के ट्यूनीशिया प्रत्यर्पण को अत्यंत गैरकानूनी बताया था और उसे विदेशी दफ्तर के खर्च पर वापस लाने का आदेश दिया था. लेकिन बोखुम शहर ने अब तक इस आदेश को नहीं माना है.
अब अदालत ने बोखुम शहर के विदेशी कार्यालय को 10,000 यूरो के जुर्माने की धमकी देते हुए सामी ए को मंगलवार तक वापस लाने को कहा है. जर्मनी में अब तक इस बात को साबित नहीं किया जा सका है कि अल कायदा प्रमुख का संदिग्ध पूर्व बॉडीगार्ड आतंकवादी संगठन का सदस्य था.
लेकिन इस बीच इस बात की संभावना अत्यंत कम है कि ट्यूनीशिया सामी ए को वापस भेजने को तैयार होगा. ट्यूनीशिया के अधिकारी भी उसके खिलाफ आतंकवाद के आरोपों की जांच कर रहे हैं.
क्या भूल गए लादेन को
क्या भूल गये सब ओसामा बिन लादेन को
ओसामा बिन लादेन की मौत के छह साल बाद आज अल-कायदा की स्थिति कमजोर पड़ गयी है. लेकिन अब भी दुनिया से आतंकवाद का खात्मा नहीं हुआ. अल-कायदा के खिलाफ अमेरिका की जीत जरूर हुई थी लेकिन अब दुनिया आईएस से परेशान है.
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अल-कायदा की जगह
आतंकवादी समूह अल कायदा और इसके प्रमुख ओसामा बिन लादेन को भुलाने में अमेरिका से ज्यादा इस्लामिक स्टेट का हाथ रहा है. आईएस ने ना केवल मध्यपूर्व में अल-कायदा की खाली जगह को भरा बल्कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र पर भी अपना दबदबा कायम किया, जहां कभी अल-कायदा सक्रिय था.
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आईएस का खौफ
आज तालिबान के कई गुटों समेत दक्षिण एशिया के कई आतंकवादी समूह, इस्लामिक स्टेट (आईएस) के करीब जा रहे हैं. आईएस ने पिछले कुछ सालों में ही इराक और सीरिया के कई इलाकों में अपना दबदबा कायम किया. दुनिया भी आज ओसामा बिन लादेन को भूल कर, आईएस प्रमुख अबु-बकर बकदादी से खौफ खा रही है.
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लादेन की मौत
मई 2011 में जब अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में लादेन को मारा था तो पूरी दुनिया ने चैन की सांस ली थी. लादेन अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन था जिस तक पहुंचने में अमेरिका को छह साल से भी अधिक का समय लगा. इस दौरान पाकिस्तान पर भी आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगे
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कायम कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद
आज भले ही अल-कायदा कमजोर पड़ गया हो लेकिन कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा फलती फूलती जा रही है. बिन लादेन को मरे सालों हो गये लेकिन उसकी मौत से लेकर अब तक कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद नये चरम पर पहुंच गया है.
अमेरिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि अल कायदा के पतन का सबसे अधिक लाभ आईएस को मिला है और आज यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है. लेकिन इनके काम करने के तरीके में बड़े अंतर है.
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तरीके में अंतर
आईएस ने सीरिया और इराक के कुछ क्षेत्रों में सफलतापूर्वक अपने केंद्र स्थापित किये हैं वहीं अल-कायदा ने कभी अपने क्षेत्र स्थापित नहीं किये. आईएस ने वित्तीय संसाधनों के लिये इराक और सीरिया के तेल क्षेत्रों में भी अपना नियंत्रण स्थापित किया.
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बाकी है अल-कायदा
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि दक्षिण एशिया में अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठन अब भी सक्रिय हैं और आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर अफगानिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद नहीं किया गया तो अल-कायदा वहां फिर से जड़ें जमा सकता है.
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कहां है अल-जवाहिरी
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अल कायदा प्रमुख अल-जवाहिरी पाकिस्तान के कराची शहर में छुपा हो सकता है. कुछ अमेरिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि अल-कायदा को कमजोर समझना अमेरिका की भूल हो सकती है. क्योंकि वह भी अमेरिका के खिलाफ किसी साजिश में शामिल हो सकती है.
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ट्यूनीशिया ने बुधवार को कहा है कि सामी ए को जर्मनी वापस भेजे जाने का कोई कानूनी आधार नहीं है. ट्यूनीशिया के कानूनी मंत्रालय के प्रवक्ता सोफियान सेलिटी ने कहा है कि जर्मनी ने अब तक कोई औपचारिक आग्रह नहीं किया है. उन्होंने कहा कि उसे वापस भेजना राज्य की संप्रभुता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा.
गेल्जेनकिर्षेन की प्रशासनिक अदालत ने अपने फैसले में बोखुम के विदेशी मामलों के कार्यालय की इस बात के लिए आलोचना की है कि उसने अब तक सामी ए को वापस लाने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए हैं. ट्यूनीशियाई नागरिक सामी ए की शिकायत पर आदालत ने अब अधिकारियों को मंगलवार तक की मोहलत दी है.
अदालत ने शिकायत की है कि अब तक विदेश मंत्रालय की मदद से सिर्फ सामी ए के ठिकाने और उसकी मौजूदा हालत के बारे में ट्यूनीशिया के अधिकारियों से सवाल पूछे गए हैं. अदालत का कहना है कि ये पर्याप्त नहीं है.
ये है ओसामा का बेटा हमजा बिन लादेन
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अदालत के प्रवक्ता ने कहा है कि बोखुम इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है, लेकिन अभी तक उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बर्लिन में कहा है कि उन्हें ट्यूनीशिया के अधिकारियों से अब तक सिर्फ इतनी मौखिक जानकारी मिली है कि सामी ए की हालत परिस्थियों के अनुसार ठीक है. उसे जर्मनी से वापस भेजे जाने के बाद हिरासत में ले लिया गया था.
सामी ए पर आरोप है कि वह 2011 में मारे गए अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का बॉडीगार्ड था. उसे 13 जुलाई को जर्मनी से ट्यूनीशिया वापस भेज दिया गया था. एक दिन पहले ही गेल्जेनकिर्षेन की प्रशासनिक अदालत ने फैसला किया था कि उसे वापस भेजा जाना कानूनी नहीं है. लेकिन अदालत का फैसला सामी ए को वापस भेजे जाने के बाद अधिकारियों तक पहुंचा. वापसी के फैसले से नाराजत जजों ने इस कार्रवाई को गंभीर रूप से गैरकानूनी बताया. बोखुम शहर में सामी ए को वापस लाने के फैसले के खिलाफ अपील की है.