ब्रिटेन के मैनचेस्टर में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने और भी हमलों की आशंका जताते हुए सेना की तैनाती का फैसला लिया है. मैनचेस्टर एरीना के आत्मघाती हमलावर की पहचान भी जाहिर कर दी गयी है.
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ब्रिटेन में कई महत्वपूर्ण जगहों पर सेना तैनात कर दी गयी है. मैनचेस्टर एरीना में हुए आत्मघाती हमले के बाद देश में और भी आतंकी हमलों की आशंका को देखते हुए प्रधानमंत्री थेरीजा मे ने इसकी घोषणा की. मैनचेस्टर के एक म्युजिक कंसर्ट के बाद हुए हमले में 22 लोगों की मौत हो गयी और 59 लोग घायल हैं.
पुलिस ने हमलावर की पहचान कर ली है. ब्रिटेन में जन्मे 22 साल के सलमान आबेदी को हमलावर बताया गया है. उसका परिवार मूल रूप से लीबिया से था. जुलाई 2005 के बाद से ब्रिटेन में हुआ यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है. 2005 में चार ब्रिटिश मुस्लिम आत्मघाती हमलावरों ने संगठित रूप से हमले किये थे और लंदन के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को निशाना बना कर 52 लोगों की जान ले ली थी.
मैनचेस्टर टाउन हॉल में मैनचेस्टर एरीना के पीड़ितों की याद में संदेश लिखती ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरीजा मे.तस्वीर: Reuters/B. Birchall
प्रधानमंत्री मे ने हमले के पीछे किसी बड़े समूह का हाथ होने के संकेत मिलने की बात कही है. उन्होंने कहा, "देश के महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले सशस्त्र पुलिस अधिकारियों की जगह सेना ले लेगी. अहम समारोहों और खेल के मुकाबलों जैसे बड़े आयोजनों में भी सशस्त्र सेना तैनात होगी."
यूरोपा लीग के फाइनल मैच में मैनचेस्टर युनाइटेड और डच फुटबॉल क्लब एएफसी आयाक्स बुधवार को आमने सामने होंगे. खेल के पहले सभी खिलाड़ी कुछ समय का मौन रख कर मैनचेस्टर हमले में मारे गये लोगों को याद करेंगे. बीते 10 सालों में पहली बार ब्रिटेन में खतरे के स्तर को "गंभीर" से "अति गंभीर" घोषित किया गया है. केवल दो हफ्तों में देश में आम चुनाव भी कराये जाने हैं.
आरपी/एमजे (रॉयटर्स, एएफपी)
ब्रेक्जिट के लिए ब्रिटिश चुनाव के मायने
ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरीजा मे ने 8 जून को चुनाव कराने की घोषणा की है. एक जनमत संग्रह में ब्रेक्जिट का फैसला लिये जाने के बाद इन चुनावों की ईयू के साथ ब्रिटेन के संबंधों में अहम भूमिका होगी.
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स्थिरता के लिए जरूरी
ब्रेक्जिट के मुद्दे पर हर पार्टी में विभाजन था. मतदाताओं के फैसले के बावजूद यह विभाजन बना हुआ है. नये चुनाव संसद और सरकार में स्थिरता लायेंगे और ईयू के साथ सौदेबाजी में मददगार साबित होंगे.
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मजबूरी का फैसला
मध्यावधि चुनाव कराने का थेरीजा मे का फैसला यू टर्न है क्योंकि पहले उन्होंने इससे इंकार किया था. उन्होंने कहा था कि देश को चुनाव के बदले स्थिरता की जरूरत है. लेकिन साफ है कि वेस्टमिंस्टर विभाजित है.
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जीत का फायदा
थेरीजा मे के लिए चुनाव करवाना जुआ खेलने जैसा है. यदि वह चुनाव जीत जाती है तो घरेलू मोर्चे पर और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उनकी स्थिति मजबूत होगी. ईयू के साथ वार्ता में वह आत्मविश्वास दिखा पाएंगी.
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बहुमत का फायदा
यदि थेरीजा मे को चुनावों में बड़ा बहुमत मिलता है तो वह कंजरवेटिव पार्टी के अंदर मौजूद ईयू विरोधियों के शिकंजे से बाहर निकल पाएंगी. इसके अलावा ये जीत प्रधानमंत्री के रूप में भी उनकी स्थिति को मजबूत करेगी.
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वार्ता में मजबूती
यूरोपीय संघ के नेता ब्रेक्जिट के फैसले के बाद ब्रिटेन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. चुनावी जीत उन्हें मार्च 2019 में होने वाली वार्ता के लिए घर पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करायेगी.
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राजनीतिक दबाव
यदि संसदीय चुनाव योजना के अनुसार 2020 में होते तो ईयू के साथ सदस्यता छोड़ने की वार्ता में थेरीजा मे पर बहुत दबाव होता. वार्ता का असर चुनावी बहस और उसके नतीजों पर भी होता. अब उन्हें इस दबाव से राहत मिल जायेगी.
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अगले चुनाव
अब अगले चुनाव 2022 में होंगे. यदि ईयू के साथ ब्रेक्जिट वार्ता के कुछ नकारात्मक आर्थिक असर होते हैं तो उनसे निबटने के लिए उन्हें काफी समय मिल जायेगा. थेरीजा मे आने वाले समय के लिए तैयार हो रही हैं.
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चुनाव के मायने
ब्रिटिश प्रधानमंत्री के चुनाव कराने के फैसले का मतलब यह भी है कि यूरोपीय संघ की तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी 2017 में ही चुनावों का सामना कर रही हैं. ये चुनाव ईयू का भविष्य तय करेंगे.