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ब्रिटेन में भारतीयों के लिए रियायत की मांग

६ सितम्बर २०१०

ब्रिटेन की कई कंपनियों और कारोबारियों ने कैमरन सरकार से अपील की है कि वह भारत सहित दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों की सीमा तय करने के नियम में रियायत बरते नहीं तो इससे ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ेगा.

तस्वीर: AP

कंपनियों ने देश छोड़ कहीं और से कारोबार करने की भी धमकी दी है. सरकार की नई नीति पर विचार करने की मीयाद मंगलवार को खत्म हो रही है. इसके तहत यूरोपीय संघ से बाहर के देशों से आने वाले दक्ष कर्मचारियों की संख्या सीमित करने की बात कही गई है.

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय की प्रवासी सिफारिशी कमेटी इस साल के अंत तक भारत और यूरोपीय संघ से बाहर के दूसरे देशों से आने वाले प्रोफेशनलों की संख्या का एलान कर सकती है.

प्रवासियों पर रोक लगाना चाहते हैं कैमरनतस्वीर: AP

ब्रिटेन की प्रवासी मामलों के मंत्री डेमियन ग्रीन ने जोर देकर कहा है कि दूसरे देशों से ब्रिटेन आने वालों की संख्या निर्धारित करने के बाद भी ब्रिटेन में भारत या दूसरे देशों से आने वाले योग्य लोगों को रोका नहीं जाएगा. ग्रीन ने हाल ही में भारत का दौरा किया है.

ब्रिटेन सरकार की नई नीति अमल में आने के बाद भारत के दक्ष कर्मचारियों को झटका लग सकता है. ब्रिटेन में काफी बड़ी संख्या में भारतीय कामगार काम कर रहे हैं. यह नियम अप्रैल 2011 से लागू करने का प्रस्ताव है.

लंदन फर्स्ट नाम की संस्था ने ब्रिटेन की कैमरन सरकार से अपील की है कि वह अंकों पर आधारित मौजूदा नियम को ही लागू रखे और बाहर से आने वाले लोगों की संख्या सीमित करने का विचार त्याग दे. यह संस्था ब्रिटेन की राजधानी लंदन को कारोबार के लिहाज से दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शहर बनाने की कोशिश कर रहा है.

पिछले साल के आंकड़ों की बुनियाद पर इसने दावा किया है कि गैर यूरोपीय संघ देशों से आने वाले 5,67,000 प्रवासियों में से सिर्फ 55,000 पर असर पड़ेगा. इनमें से ज्यादातर दक्ष कामगार भारत से टीयर 1 और टीयर 2 की श्रेणी में काम करने इंग्लैंड आते हैं.

लंदन फर्स्ट के मुख्य कार्यकारी बारोनिस वेलेन्टाइन ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ब्रिटेन की आम जनता ने जब इस सरकार के लिए वोट दिया होगा तो उनके दिमाग में इन लोगों का ख्याल होगा."

ग्रीन का कहना है कि इस वक्त ब्रिटेन में पांच लाख लोग हर साल आते हैं और वह इस संख्या को कम करके करीब एक लाख पर लाना चाहते हैं. हालांकि वह जोर देकर कहते हैं कि इससे भारत या दूसरे देशों से आने वाले शानदार कामगारों को असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने एक जर्नल को दिए इंटरव्यू में कहा, "अब 100 साल से भी ज्यादा वक्त से ब्रिटेन को दक्ष कामगारों से फायदा हो रहा है, जिनमें से ज्यादातर भारत से आते हैं. विदेशियों के ब्रिटेन प्रवास से हमारी संस्कृति समृद्ध हुई है और नई गठबंधन सरकार इसका फायदा उठाते रहना चाहती है."

उन्होंने कहा है, "भारत पारंपरिक तौर पर इसमें बड़ा भागीदार रहा है. नए प्रवासी नियमों से हमारे रिश्ते और बेहतर होंगे."

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः एन रंजन

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