कैंसर के इलाज के एक नए तरीके की मदद से वयस्कों में ल्यूकेमिया के 88 फीसदी मामलों में सफलता मिली है. इस इलाज में मरीज की खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल होता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
विज्ञापन
अमेरिकी वैज्ञानिकों की ताजा रिसर्च में ये परिणाम सामने आए हैं. इसे इम्यूनोथेरैपी के क्षेत्र में बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है. साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन पत्रिका में छपे नतीजों के अनुसार नए परीक्षणों में ब्लड कैंसर के खास प्रकार एडल्ट बी सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया(एएलएल) के 16 मामले शामिल किए गए थे. 2013 में कैंसर के इलाज की दिशा में खास उपलब्धि के रूप में साइंस पत्रिका ने इसे 'लिविंग ड्रग' नाम से संबोधित किया था.
अमेरिका में हर साल एएलएल से करीब 1,400 लोगों की मौत होती है. इस प्रकार के कैंसर का आमतौर पर इलाज संभव है. इसलिए कई मामलों में शरीर में कीमोथेरैपी के प्रति प्रतिरोधकता पैदा हो जाती है और बीमारी फिर लौट आती है. इस शोध में 16 में से 14 मरीज पूरी तरह ठीक हो गए. उनके टी सेल जेनेटिक इंजीनियरिंग से ठीक किए गए ताकि कैंसर को शरीर से मिटाया जा सके. इन मरीजों की औसत आयु पचास वर्ष है. जब इन्हें इस इलाज के लिए लाया गया तो ठीक होने की सारी उम्मीदें छोड़ी जा चुकी थीं. उन पर कीमोथेरैपी या किसी अन्य विधि का असर पड़ना बंद हो गया था.
कैंसर को जीवन का अंत नहीं समझ लेना चाहिए. वैज्ञानिकों को पता लग चुका है कि यह बीमारी होती कैसे है. फिर बचने के उपाय भी हो सकते हैं.
तस्वीर: Getty Images
किस्मत अपने हाथ
विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर के लगभग आधे मामले कम किए जा सकते हैं. कैंसर के ट्यूमर का हर पांचवां मामला सिगरेट पीने से होता है. इससे फेफड़ों के कैंसर के अलावा कई और तरह के ट्यूमर भी हो सकते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
मोटापे से खतरा
कैंसर की दूसरी सबसे बड़ी वजह मोटापा है. शरीर में जब इंसुलिन बढ़ता है तो वह हर तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा देता है. मोटी महिलाओं की वसा कोशिकाओं में सेक्स हॉर्मोन भी ज्यादा निकलते हैं जिससे गर्भाशय या स्तन कैंसर हो सकते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
आलसी मत बनिए
लंबे रिसर्च से पता चला है कि नियमित व्यायाम से ट्यूमर का खतरा कम हो जाता है. कारण है कसरत से शरीर में इंसुलिन का स्तर कम होना. जरूरी नहीं कि आप बहुत भागदौड़ वाले खेल ही खेलें. साइकिल चलाने और टहलने से भी फायदा है.
तस्वीर: Fotolia/runzelkorn
ज्यादा न पीजिए
शराब से मुंह, गले और खाने की नली में ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है. धूम्रपान और शराब साथ लेने से कैंसर का खतरा 100 गुना बढ़ जाता है. अधिक से अधिक वाइन का एक ग्लास ही सेहत के लिए ठीक होता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
'रेड मीट' कम
आंतों के कैंसर के लिए इसे जिम्मेदार माना जाता है. दूसरी ओर मछली का मांस कैंसर से बचाता है.
तस्वीर: Fotolia
ज्यादा धूप नहीं
सूरज की पराबैंगनी किरणें शरीर में इतने अंदर तक जा सकती हैं कि कोशिकाओं में घुस कर जीनोम यानि आनुवांशिक संरचना बदल दें. 'सन टैन' के शौकीनों को ध्यान देना होगा क्योंकि ज्यादा धूप से त्वचा का कैंसर हो सकता है.
तस्वीर: dapd
आधुनिक दवाएं भी दोषी
एक्सरे से जीनोम यानि आनुवांशिक संरचना पर असर पड़ता है. लेकिन बदलती रोजमर्रा में मुश्किलें बहुत हैं. हवाई जहाजों में सफर के दौरान भी लोग कैंसर पैदा करने वाले विकिरण के संपर्क में आते हैं.
तस्वीर: picture alliance/Klaus Rose
संक्रमण से कैंसर
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संक्रमण से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है. इससे तस्वीर में दिखाई दे रहा बैक्टीरिया पेट में पहुंच जाता है और वहां कैंसर पैदा करता है. इन संक्रमणों से बचने के टीके लिए जा सकते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
इतनी बुरी नहीं गर्भनिरोधक गोलियां
इन गोलियों से स्तन कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है, लेकिन ओवरी या अंडाशय के कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है. कम से कम कैंसर के मामले में तो गोलियां लेना अच्छा है.
तस्वीर: Fotolia/Kristina Rütten
बाकी प्रकृति जिम्मेदार
कई बार सारी अच्छी आदतों के बावजूद बीमारी हो सकती है. कभी उम्र का तकाजा ले डूबता है तो कभी पीढ़ी दर पीढ़ी जीन से होने वाली बीमारी. रिपोर्ट: ब्रिगिटे ओस्टेराथ/ऋतिका राय संपादन: ए जमाल
तस्वीर: Fotolia/majcot
10 तस्वीरें1 | 10
टी सेल कम करना
इस विधि में मरीज के शरीर से कुछ टी सेल निकाल कर एक खास जीन से उनकी जेनेटिक इंजीनियरिंग इस तरह की गई कि वह कैंसर सेल पर मौजूद सीडी19 प्रोटीन को पहचान कर उस पर असर कर सकें.
टी सेल का काम होता है शरीर को खतरनाक हमलों से बचाना. लेकिन वे कैंसर को बढ़ने से नहीं रोक पाते हैं. रिपोर्ट को तैयार करने वाले मेमोरियल स्लोन केटेरिंग कैंसर सेंटर के रेनियर ब्रेंत्येंस ने बताया, "असल में हम टी सेल को प्रयोगशाला में जीन थेरैपी की मदद से यह सिखाते हैं कि वह कैंसर सेल को पहचान कर उसे कैसे नष्ट करे." ब्रेंत्येंस के अनुसार एक खास तरह के मरीजों पर यह विधि कारगर है.
पिछले साल इस टीम ने इस तरीके से पांच ऐसे मरीजों का इलाज किया था जिनमें इलाज के बाद कैंसर पलट कर वापस आ जाता था. इसके बाद से इस शोध में 60 से 80 और अमेरिकी मरीज शामिल हुए. इलाज के इस तरीके पर यूरोप में भी शोध जारी है.