पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमलों के कथित मास्टरमाइंड जकी उर रहमान लखवी की हिरासत को गैरकानूनी करार दिया है. इस फैसले से भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में नई मुश्किलें पैदा हो गई हैं.
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2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों में 166 लोगों की जान चली गई थी और इसके तार पाकिस्तानी आतंकियों के जुड़े होने की आशंका के कारण तबसे ही दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई. पाकिस्तान की एक एंटी-टेरर कोर्ट ने दिसंबर 2013 में लखवी को रिहा करने के आदेश दिए थे, जिसका नई दिल्ली ने कड़ा विरोध किया था. इसके तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने लखवी को पब्लिक ऑर्डर लॉ के अंतर्गत हिरासत में रखने का निर्णय किया. अब इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया है. वरिष्ठ सरकारी वकील जहांगीर जादून ने समाचार एजेंसी एएफपी को यह जनकारी देते हुए बताया कि इस बारे में विस्तृत निर्णय बाद में आने की उम्मीद है.
फिलहाल आए निर्णय का अर्थ है कि लखवी को आजाद किया जा सकता है. लेकिन अभी भी सरकार चाहे तो लखवी को जेल में ही रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है. तीन महीने से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद लखवी को अब तक एक बार भी बाहर नहीं निकाला गया है. मुंबई आतंकी हमलों का आरोप पाकिस्तान के प्रतिबंधित उग्रवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा पर लगा था. भारत लंबे समय से इस बात पर नाराजगी जताता आया है कि पाकिस्तान ने ना तो खुद इन आरोपियों को सजा दी और ना ही उन्हें भारत को सौंपा. लखवी के अलावा छह और संदिग्धों पर पाकिस्तान में आरोप तय तो हुए लेकिन बीते पांच सालों में भी यह मामले ज्यादा आगे नहीं बढ़े हैं.
2008 मुंबई हमले में कम से कम 166 लोगों की मौत हुई थीतस्वीर: picture-alliance/dpa
भारत ने लखवी पर पाकिस्तानी हाईकोर्ट के ताजा फैसले की निंदा की है. भारत के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा, "पाकिस्तानी एजेंसियों को दोष साबित करने वाले सबूत अदालत में पेश करने चाहिए. आतंकवादियों की सच्चाई सामने लाने में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. किसी भी आतंकी को अच्छा या बुरा आतंकवादी नहीं कहा जा सकता." रिजुजू ने साफ कहा है, "उन्हें (पाकिस्तान) को सुनिश्चित करना चाहिए लखवी रिहा ना हो और जेल से बाहर ना निकल पाए."
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों के पीछे पाकिस्तान ने अपने देश के आतंकियों का हाथ होने की बात कभी नहीं मानी है. लेकिन लश्कर-ए-तैयबा के ही एक धड़े जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज सईद को पाकिस्तान में सार्वजनिक सभाओं और कई टेलीविजन चैनलों पर बोलते देखा जा सकता है. सईद को पकड़ने के लिए अमेरिका ने 1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया हुआ है.
आरआर/एमजे (एएफपी,पीटीआई)
पेशावर का सिसकता स्कूल
पाकिस्तान के पेशावर शहर में जिस स्कूल पर मंगलवार को तालिबान ने आतंकवादी हमला किया था, बुधवार को उसकी शक्ल किसी भूतहे घर की तरह लग रही थी. रिपोर्टरों ने स्कूल जाकर वहां का जायजा लिया.
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प्रवेश पर सुरक्षा
पाकिस्तानी सेना का एक जवान स्कूल के मुख्य द्वार पर पहरा देता हुआ. आलीशान दरवाजे से उस खतरनाक चेहरे का अंदाजा भी नहीं लग पा रहा है, जो आने वाली तस्वीरों में दिखने वाला है. कैसे बच्चों के एक स्कूल को तालिबान ने श्मशान में बदल दिया.
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चारों तरफ तहस नहस
नोटिस बोर्ड के आस पास दहशत के निशान मौजूद हैं. सेना के जवान उन जगहों को देख रहे हैं, जहां तालिबान के हमले से भारी नुकसान हुआ है. दीवार की ईंटें निकल चुकी हैं. गमले उलटे पड़े हैं. यह तस्वीर किसी स्कूल की तो नहीं लगती.
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ब्लैकबोर्ड की दीवार
स्कूल की इस दीवार पर कभी ब्लैकबोर्ड लगा होता होगा. लेकिन अब यह गोलियों से छलनी है. एक स्थानीय रिपोर्टर जब इस दीवार के पास से गुजरी, तो कुछ ऐसी तस्वीर बनी. मालूम पड़ता है कि मानो कोई जलजला आया हो.
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ये कैसा क्लासरूम
किताबें बिखरी पड़ी हैं, छात्रों का कोई नामोनिशान नहीं. गोलियां और बम खाकर पीछे की जख्मी दीवार काली पड़ चुकी है. इस सैनिक को बिखरी हुई किताबों के बीच रास्ता निकालना मुश्किल हो रहा है. सिर्फ 24 घंटे पहले यहां बच्चों से रौनक थी.
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आतंक की निशानी
पीछे की दीवार पर शायद स्कूल के प्रिंसिपलों की लिस्ट लगी है. लेकिन नजर उसके चारों ओर ज्यादा जा रही है, जो गोलियों से भुन चुका है. बोर्ड के चारों ओर के सुर्ख लाल धब्बे वो सब कुछ कह रहे हैं, जो मंगलवार को इस स्कूल में हुआ.
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अपनों की याद
कराची के एक स्कूल में दुआओं में खड़ा यह छात्र शायद अपने उन साथियों के अहसास को महसूस करने की कोशिश कर रहा है, जो तालिबान के कायराना हमले में मारे गए. पूरे पाकिस्तान के स्कूलों में मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई.
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महिलाओं की श्रद्धांजलि
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट की महिला सदस्यों ने भी मंगलवार की रात मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी और उनकी याद में मोमबत्तियां जलाईं. हमले में कम से कम 140 लोगों की मौत हो गई और तालिबान ने कई महिला टीचरों को जिंदा जला दिया.
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अपनों का गम
हमले की जगह पहुंचते हुए एक महिला अपनी सिसकियों को नहीं रोक पाई. हमले के वक्त स्कूल में कम से कम 500 बच्चे थे. इनमें से लगभग 125 बच्चे मारे गए, जबकि इतने ही और घायल हो गए. पाकिस्तान के इतिहास में यह सबसे क्रूर हमलों में गिना जा रहा है.
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एहतेजाज की याद
पेशावर की इस घटना ने हंगू के युवा छात्र एहतेजाज की भी याद ताजा कर दी, जिसने जनवरी में अपने स्कूल में घुस रहे एक आत्मघाती हमलावर को गेट के बाहर दबोच लिया था. हमलावर ने विस्फोटक को उड़ा दिया, जिससे उसकी और एहतेजाज की मौत हो गई. लेकिन स्कूल में मौजूद सैकड़ों बच्चे बच गए.